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गर्भधारण करने से पहले क्यों आवश्यक है मधुमेह की जांच – Why diabetes is necessary before getting pregnant

गर्भधारण करने से पहले क्यों आवश्यक है मधुमेह की जांच – Why diabetes is necessary before getting pregnant

गर्भावस्था में स्त्रियों को मधुमेह रोग बहुत पीड़ित करता है। गर्भावस्था में मधुमेह रोग की उत्पत्ति तो नहीं होती लेकिन जिन स्त्रियों को पहले से मधुमेह रोग हो, उनकी व्यथा बढ़ जाती है, क्योंकि मधुमेह रोग के कारण अनेक विषम परिस्थितियां सामने आती है। मधुमेह के कारण गर्भवती किसी मीठी खाद्य वस्तु का सेवन नहीं कर पाती।

मधुमेह रोग के कारण स्त्रियों को गर्भधारण करने में बहुत कठिनाई होती है। यदि किसी तरह से स्त्रियां गर्भधारण कर भी लेती है, तो एक 2 महीने के अंतराल में गर्भ स्त्राव हो जाता है। गर्भावस्था में कुछ महीनों के बाद गर्भ स्त्राव की संभावना बढ़ जाती है। गर्भस्थ शिशु का भार तेजी से बढ़ने के कारण गर्भवती की परेशानियां बढ़ती जाती है। 

मधुमेह रोग से पीड़ित स्त्रियों में प्रसव से पहले गर्भ स्त्राव की अधिक आशंका रहती है। प्रसव के बाद शिशु के मधुमेह रोगी होने की संभावना अधिक रहती है। यह रोग वंशानुगत भी होता है। गर्भवती को मधुमेह होने के कारण उनके शिशु भी मधुमेह रोग से पीड़ित होते हैं। ऐसे शिशुओं को अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है।

मधुमेह रोगी स्त्रियों को गर्भ धारण करने से पहले अपने चिकित्सक से रक्त एवं मूत्र का परीक्षण कराकर परामर्श करना चाहिए। चिकित्सक के परामर्श पर ही गर्भ धारण करना चाहिए। रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होने पर कुछ दिन रुक कर सकरा की मात्रा कम हो जाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। जब तक गर्भनिरोधक साधनों का प्रयोग करते हुए ही सहवास करना हितकर होता है।

मूत्र में शर्करा की अधिक मात्रा निष्कासित हो रही हो, तो उसे औषधियों के सेवन से कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए। जब शर्करा पर नियंत्रण हो जाए, तभी गर्भ धारण करना चाहिए। गर्भधारण करने के बाद भी गर्भवती को नियमित रूप से मूत्र व रक्त में शर्करा के स्तर का परीक्षण कराते रहना चाहिए। 

गर्भावस्था में गर्भवती को अधिक पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है क्योंकि गर्भवती को अपनी शारीरिक शक्ति के संतुलन को बनाए रखने के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के लिए भी पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। गर्भस्थ शिशु मां के शरीर में से ही भोजन ग्रहण करता है।

सामान्य अवस्था में स्त्रियां शारीरिक शक्ति के लिए अधिक मात्रा में घी, दूध, मक्खन व पौष्टिक पदार्थों का सेवन करती है। लेकिन मधुमेह रोग के कारण सभी पौष्टिक पदार्थ सेवन नहीं किए जा सकते, क्योंकि वसा, शर्करा और कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ अधिक हानि पहुंचा सकते हैं। सक्ररा के कारण सभी मीठे फलों का सेवन नहीं करना चाहिए।

कुछ स्त्रियों को प्रारंभ में मधुमेह रोग का पता नहीं चल पाता क्योंकि वह मधुमेह रोग के लक्षणों से परिचित नहीं होती है। मधुमेह रोग को सरलता से पहचाना जा सकता है। इस रोग में बहुमूत्र की विकृति होती है। बार-बार मूत्र त्याग के लिए जाना पड़ता है। रात के समय मूत्र त्याग की परेशानी अधिक बढ़ जाती है। 

मधुमेह के लक्षणों का भान होते ही चिकित्सक से संपर्क करके मूत्र एवं रक्त की जांच करा लेनी चाहिए। अगर आप भी मां बनने की योजना बना रही हो, तो गर्भधारण करने से पहले मधुमेह की जांच और से करा लेना चाहिए।

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