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स्त्रियों के प्रजनन अंगों को पुष्ट करता है व्याघ्रासन – Vyaghrasana in Hindi |

Vyaghrasana steps benefits in Hindi
Vyaghrasana

Vyaghrasana in Hindi

बाघ अपने शरीर को तानने व खींचने हेतु जिन शारीरिक गतिविधियों का सहारा लेता है, उन्हीं पर आधारित है| Vyaghrasana – इसे करते हुए आपकी स्तिथि बाघ के समान होती है. इसे करने से मेरुदंड को मजबूती मिलती है. साथ ही पाचन, उत्सर्जन तथा प्रजनन अंगों के व्यायाम हेतु उत्तम आसन है.

पेट व श्रोणी, दोनों ही शरीर के महत्वपूर्ण भाग है. प्रायः लोग विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रस्त रहते हैं. इनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कारण है- शरीर के इन भागो की दयनीय अवस्था. इन अंगों, मांसपेशियों तथा स्नायुओ पर किसी ना किसी रूप से प्रभाव पड़ता ही है.

अतः कुछ प्रमुख आसन तथा उनके साथ पूरक के रूप में सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास इन अंगों को स्वस्थ, सक्रिय बनाने में विशेष उपयोगी है. इनमें Vyaghrasana  अत्याधिक सरल है, जो इन अंगों की अच्छी मालिश कर मांसपेशियों को मजबूती देता है तथा स्नायुओ को सक्रियता प्रदान करता है.

Vyaghrasana अभ्यास विधि

पैरों के पंजों व घुटनों को थोड़ा अलग रखते हुए घुटनों के बल खड़े हो जाएं. सामने झुके तथा दोनों हाथों को जमीन पर रख दें. हथेलियां अधोमुखी हो. हाथों को हिला-डूलाकर ऐसी स्थिति में लाएं, जो अलग-अलग रहे.

धड़ जमीन के समानांतर हो, हाथ, कंधों के ठीक नीचे सीधे रहे. अब पूरे शरीर को शिथिल करें. तत्पश्चात दाहिने पैर को मोड़ और जांघ को छाती के पास लाएं. साथ ही पीठ को ऊपर उठाएं तथा श्वास छोड़ते हुए सिर को नीचे लाते हुए घुटने की ओर झुकाएं. ख्याल रहे, दाहिना पैर जमीन से ना छुए.

अब ठुददी अथवा नाक से दाहिने घुटने का स्पर्श करने का प्रयत्न करें तथा दाहिने जांघ से छाती पर दबाव डालें. स्वास रोके. फिर श्वास लेते हुए दाहिने घुटने को धीरे-धीरे पीछे वापस लाएं. पैर को हिलाना-डुलाना जारी रखे, लेकिन दाहिना पैर जमीन के ऊपर रहे. साथ ही दाहिने पैर को धीरे-धीरे पीछे की ओर ताने, ताकि पैर पूरी तरह सीधा हो जाए और भुजाओं को इंगित करें.

चित्र अनुसार स्थिति में आने पर सिर को धीरे से पीछे मोड़ें तथा मेरुदंड को नीचे की ओर मोड़ें. इस स्थिति में सांस रोके. दाएं पैर को पुनः पीछे लाएं और सीधा ताने. धीरे-धीरे श्वास छोड़े. यह एक आवृत्ति हुई. अब उपरोक्त संपूर्ण प्रक्रिया को दाएं पैर को जमीन पर रखते हुए बाएं पैर से दोहराएं.

Vyaghrasana के लाभ

सुबह-सुबह Vyaghrasana करने से आपकी एकाग्रता बढ़ती है और तनाव से मुक्ति मिलती है. विशेषकर इससे साइटिका या कमर के निचले हिस्से में दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है. रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है. स्नायुओ की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है. पेट की मांसपेशियों का खिंचाव होने से प्रजनन अंगों की मालिश होती है.

स्त्रियों को परदर आदि से ग्रस्त होने पर व्याघ्रासन करना चाहिए. यह परसव को भी आसान बनाता है. प्रसव के तुरंत बाद इसका अभ्यास विशेष रूप से करना चाहिए, जो पेट की चर्बी दूर कर शरीर को सुडौल बनाने में सहायता करता है.

व्याघ्रासन कब करें

वैसे तो यह अभ्यास दिन में किसी भी समय कर सकते हैं मगर सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद करना उत्तम है. यह मांसपेशियों को प्रसारित करने तथा रक्त प्रवाह बनाने हेतु उपयोगी है.

सजगता व अवधि

शारीरिक गतिविधि तथा स्वसन क्रिया के प्रति सजग रहे. प्रत्येक पैर से लगभग 5 बार यह प्रक्रिया करें.

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