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टीकाकरण देरी से बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा – Vaccination in Hindi – othershealth

टीकाकरण – Vaccination in Hindi

Vaccination – मेडिकल साइंस में वैक्सीन सबसे बड़ी खोज है. covid-19 के प्रकोप से बचाव के लिए बेसब्री से सभी को इसका इंतजार है. इस महामारी के कारण बच्चों की रूटीन टीकाकरण की प्रक्रिया बाधित हुई है, जिसकी जरूरत शिशुओं को जन्म के बाद होती है. बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित होने से बच्चों में सुरक्षा चक्र टूट सकता है. आइए जानते हैं टीकाकरण की जरूरत और इसके महत्व के बारे. 

महामारी के कारण वैक्सीन की डोज आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है. स्वास्थ्य केंद्रों पर इससे संबंधित शिकायतें आ रही हैं. काफी बच्चों को समय पर वैक्सीन कि डोज नहीं मिल पाई है. इससे भविष्य में बीमारियों का खतरा बढ़ेगा. संयुक्त राष्ट्र की संस्था के मुताबिक 2018 में एक करोड़ 30 लाख बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए थे.

महामारी में यह आंकड़ा बढ़ सकता है. बच्चों में संक्रमण और बीमारी का खतरा ज्यादा है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक टीकाकरण अभियान रुकने से 11 करोड़ 70 लाख बच्चों को खसरा होने का खतरा है. खसरा से हर साल लगभग 2 करोड़ बच्चे प्रभावित होते हैं. इनमें से अधिकतर बच्चों की उम्र 5 साल से कम होती है. 
2018 में खसरा की वजह से दुनिया भर में करीब 140000 बच्चों की मौत हुई थी. डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने कहा है कि वर्तमान में 24 देशों ने टीकाकरण का काम रोक दिया है. महामारी के कारण 13 अन्य देशों में भी टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुई है. भारत में यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम दुनिया में सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है. वर्तमान में इस कार्यक्रम में भी बाधा पहुंची है.

टीकाकरण ना लगवाने से होने वाली बीमारियां | Vaccination |

यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के कारण पूरे दक्षिण एशिया में करीब 40 लाख 50 हजार बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हो पाया है. हालांकि पहले भी इसमें कई बाधाएं रही है. यूनीसेफ ने चिंता जताई है कि समय पर टिका नहीं दिया गया तो, दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करना पड़ सकता है.

उदाहरण के लिए मीजल्स, हेपेटाइटिस और अन्य रोगों की आशंका बढ़ जाएगी. बच्चों को इन बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है. जरूरत है नियमित वैक्सीन की डोज सभी के लिए उपलब्ध कराने की.

टीकाकरण करवाते समय रखें इन बातों का ध्यान 

चूंकि, लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, बिना देरी किए बच्चे का टीकाकरण करवा लेना चाहिए. पिछली बार लगवाए हुए टिके की जानकारी डॉक्टर को जरूर दे. टीको में बहुत ज्यादा गैप होने की स्थिति में कई बार टीकाकरण का चक्र फिर से शुरू करना पड़ता है. इसमें कोई दिक्कत नहीं है.  

टीकाकरण चार्ट का महत्व – Vaccination chart in Hindi

माता-पिता बच्चों को वैक्सीन दिलाने को लेकर परेशान रहते हैं. खासतौर पर 6, 10 या 14 माह के विजिट पर दुविधा रहती है. यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि इसका पालन करने पर रूटीन वैक्सीनेशन की प्रक्रिया सुचारू चलती रहती है. अपने पास उपलब्ध वैक्सीन चार्ट संभाल कर रखें.

अफवाहों से रहे दूर 

वैक्सीन के साइड इफेक्ट और रिस्क को लेकर लोग चिंतित रहते हैं. सोशल मीडिया पर फेक जानकारी की वजह से अफवाह फैल जाता है. क्लीनिकल ट्रायल में इसके साइड इफेक्ट्स को परखने के बाद ही उपयोग की मंजूरी दी जाती है. विशेषज्ञ से सही जानकारी ले और अफवाहों से दूर रहें.

टीकाकरण के लिए कैलेंडर तय करना जरूरी | Vaccination |

वैक्सीन का कैलेंडर बनाना इसलिए जरूरी है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. वैक्सीन का समय इस तरह तय किया जाता है, जिससे उनका अत्यधिक प्रभावित हो. इस कैलेंडर का पालन नहीं करने पर बच्चे सुरक्षित नहीं रहते.

शिशुओं को दी जाने वाली प्रमुख वैक्सीन का प्रमुख सही समय 

  1. जन्म के समय बीसीजी, ओरल पोलियो व हेपेटाइटिस बी.
  2. 6 हफ्ते की उम्र में रोटावायरस, पेंटावेलेंट नियामोकोकल और एक्टिवेटेड पोलियो.
  3. 10 सप्ताह में पेंटावेलेंट इंजेक्शन, पोलियो और रोटावायरस का टीका.
  4. 14 सप्ताह की उम्र में पेंटावेलेंट, रोटावायरस, नियोमोकोकल, पोलियो.  
  5. 9 महीने में एमआर, ओरल पोलियो और नियमोकोकल के टीके. 
  6. फ्लू के 2 टीके 6 व 7 माह की उम्र में दी जाती है.
  7. 1 साल में हेपेटाइटिस ए, 15 महीने की उम्र में एमएमआर और चिकन पॉक्स का वैक्सीन.
  8. 18 महीने की उम्र में पेंटावेलेंट, नियमोंकोकल और ओरल पोलियो. 
  9. 5 साल में डीपीटी और पोलियो का टीका. 
  10. ( नोट: शिशु के उम्र के अनुसार टीकाकरण के लिए चिकित्सक से सलाह जरूर लें )  रोटावायरस डोज : सारे टीको में रोटावायरस केवल ऐसा है, जिसे 7 माह के उम्र के बाद नहीं दिया जा सकता. 7 माह के बाद इसके दुष्परिणाम हो सकते हैं. 7 माह से पहले इसका तीन डोज देना जरूरी है- पहली डोज 6 सप्ताह, दूसरी 10 सप्ताह और तीसरी 14 सप्ताह की उम्र में. अगर इसका डोज नहीं पढ़ा है, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर ले.

शोध : बचपन में टीका लगे लोगों को संक्रमण का खतरा कम होता है.

( Embayo ) जनरल में प्रकाशित शोध की माने, तो जिन लोगों को बचपन में खसरा, गलसुआ, रूबेला ( हल्का वायरस संक्रमण ) का टीका लग चुका है, उन्हें किसी भी प्रकार के संक्रमण का खतरा कम है. अमेरिका के लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी ( एलएसयु ) के शोधकर्ताओं ने पाया कि टीकाकरण जन्मजात सुरक्षा प्रदान करती है.
कमजोर रोगजनक वाले टिके प्रतिरोधक तंत्र की सफेद रक्त कोशिकाओं को संक्रमण के खिलाफ अधिक प्रभावी व बचाव के लिए प्रशिक्षित करते हैं. यह परतिरोधी कोशिकाओं को सक्रिय करते हैं. बचपन में लगने वाले वैक्सीन का इस्तेमाल व्यस्को मैं प्रतिरोधी कोशिकाओं को प्रेरित करने के लिए किया जा सकता है. यह संक्रमण से जुड़े गंभीर जटिलताओं को कम कर सकता है.         

Reference

Health Expertshttps://othershealth.in
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