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कहीं जीवन भर का दर्द ना बन जाए स्पॉन्डिलाइटिस – spondylitis in Hindi

स्पॉन्डिलाइटिस – spondylitis in Hindi

spondylitis – आज वर्किंग प्रोफेशनल एक आम समस्या से पीड़ित देखे जा रहे हैं, यह समस्या है स्पॉन्डिलाइटिस की. जाहिर तौर पर यह हमारे उठने-बैठने, कामकाज के तौर-तरीके में बरती गई अनियमितताओं का परिणाम है, जो गंभीर दर्द के रूप में जीवन को कष्टमय बना रही हैं.

सबसे जरूरी यह है कि यह बीमारी हमें जकड़े, इससे पहले ही हम इसके हर पहलू को जानते हुए सचेत हो जाए. देश के प्रमुख अस्पतालों के प्रतिष्ठित डॉक्टर दे रहे हैं विस्तृत जानकारी. 

शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से स्पॉन्डिलाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है. स्पॉन्डिलाइटिस से ग्रस्त मरीजों के शरीर के जोड़ों में सूजन हो जाती है, इसके अलावा कमर और गर्दन में दर्द भी रहता है. इस बीमारी में दर्द शरीर के निचले हिस्से की ओर धीरे-धीरे बढ़ता है. 

स्पॉन्डिलाइटिस क्या है what is spondylitis in Hindi

स्पोंडिलाइटिस एक ऐसी बीमारी है जो रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है. आमतौर पर कमर से लेकर सिर तक जाने वाली रीढ़ की हड्डी में दर्द होने को ही स्पॉन्डिलाइटिस कहते हैं. यह बीमारी मुख्यता बोन डेंसिटी कम होने पर असर दिखाना शुरू कर दी है.

यह बीमारी प्रायः 40 की उम्र पार कर चुके लोगों में ही देखने को मिलती है मगर बदलती जीवन शैली के कारन यह अब युवाओं को भी तेजी से जकड़ रही है. 

स्पोंडिलाइटिस के लक्षण – symptoms of spondylitis in Hindi

इस बीमारी की शुरुआत में मरीज को थकान महसूस होती है, इसके अलावा बुखार रहना, कमर में दर्द, उल्टी होना, गर्दन में दर्द बना रहना, चक्कर आना और भूख कम लगना भी इसके प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं.

मगर धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है, और जोड़ों में दर्द असहनीय होने लगता है. यह दर्द समय के साथ-साथ बढ़ता रहता है और धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी होने लगता है. शरीर के कुछ हिस्से अपंग की तरह होने लगते हैं यानी उन हिस्सों में कुछ भी महसूस नहीं होता पैरों की उंगलियां भी सुन्न होने लगती है.

स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण कई प्रकार के होते हैं. इनमें से कुछ का वर्णन नीचे किया गया है|

  1. अकड़न व गर्दन में दर्द. 
  2. सिर में दर्द जो गर्दन से शुरू होता है.
  3. कंधों वाह बाजू में दर्द. 
  4. गर्दन को घुमाने या मोड़ने में तकलीफ होना.
  5. घुमाने पर अजीब सी आवाजें आना. 

स्पॉन्डिलाइटिस के कारण – spondylitis causes in Hindi

गलत तरीके से बैठना इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है. जब व्यक्ति गलत पोस्चर में लंबे समय तक बैठता है, तो शरीर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और धीरे-धीरे या विभिन्न हिस्सों पर प्रभाव छोड़ता है, यही दबाव रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित करता है.

स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकार – type of spondylitis in Hindi

स्पॉन्डिलाइटिस तीन प्रकार का होता है. 

Cervical spondylitis

यह सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. यह रीढ़ की हड्डी के ऊपरी भाग में कड़ापन होने से होता है. गर्दन में अत्याधिक दर्द रहता है और यह सर्वाइकल को प्रभावित करता है. धीरे-धीरे यह दर्द शरीर अन्य हिस्सों तक पहुंच जाता है. कंधों व हाथों में जकड़न रहना इसमे आम बात है.

लंबर स्पॉन्डिलाइटिस 

इसमें स्पाइन अत्यधिक प्रभावित होता है. रीढ़ की हड्डी व कमर के निचले हिस्से में असहनीय दर्द महसूस होता है. यह धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों को जकड़ती है और धीरे-धीरे ही दर्द प्रभावित होता है. 

Ankylosing spondylitis 

इसमें विशेष रूप से जोड़ प्रभावित होते हैं. रीढ़ की हड्डी समेत शरीर के विभिन्न जोड़ इस बीमारी से प्रभावित होते हैं. जोड़ों के हिलने-डुलने में से भी दर्द महसूस होता है. रीढ़ की हड्डी में कड़ापन आ जाता है और इसमें व्यक्ति को बिस्तर पर ही रहना पड़ता है. 

स्पॉन्डिलाइटिस से बचाव के उपाय- prevention of spondylitis in Hindi 

स्पोंडिलाइटिस उम्र संबंधी एक क्षय प्रक्रिया है, इसलिए इसको रोक पाना संभव नहीं होता. शरीर को बु़ड़ा होने से नहीं रोका जा सकता है, किंतु रीड की हड्डी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए काफी चीजें की जा सकती है. जिससे हमें लाभ हो सकता है. 

  1. जीवन शैली में बदलाव लाएं. 
  2. पोषक तत्व वाले भोजन ले, फास्ट फूड से परहेज रखें.  
  3. व्यायाम करें प्रतिदिन.  
  4. धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें.  
  5. कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन करें.  
  6. सही पोस्चर में बैठे.  
  7. गर्दन के नीचे मोटा तकिया ना रखें. 
  8.  बाइक चलाते वक्त एक पोस्चर में बैठे.

काम के समय रखें इन बातों का ख्याल ध्यान 

  1. हमेशा कमर सीधी करके बैठे.  
  2.  30 से 40 मिनट के अंतराल में बैठने की अवस्था बदलते रहे. 
  3. लंबे समय तक एक ही अवस्था में खड़ा ना रहे. 
  4. कुर्सी पर बैठने के बाद पैर फैला ले.  
  5. ऑफिस में कार्य करते वक्त लगातार बैठे ना रहे. कुछ मिनटों तक टहल भी लें. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है.

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस – cervical spondylitis in Hindi 

हमारे गलत तरीके से उठने बैठने एवं कार्य करने की शैली का सबसे अधिक दुष्प्रभाव हमारे रीड की हड्डी मेरुदंड पर पड़ता है. यदि हम लगातार गर्दन झुका कर कार्य करते हैं तो हमारे गर्दन की रीढ़ की हड्डी एवं इंटर्वर्टेब्रल डिस्क को प्रभावित करती है. 

धीरे-धीरे डिस्क का क्षय होने लगता है एवं गर्दन में असहनीय दर्द होता है. इसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहते हैं. पहले यह सामान्य 45 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों में होता था, खासकर जो ऑफिस में गर्दन झुकाकर टेबल पर लिखने पढ़ने का कार्य करते थे. आजकल गलत पोस्चर में कार्य करने से लोग युवावस्था में इससे प्रभावित हो रहे हैं.

इसकी शुरुआत गर्दन में हल्के दर्द से होती है. इसे नजरअंदाज करने पर यह बहुत पीड़ादायक हो जाता है. शुरुआत में गर्दन का निचला वर्टिब्रा प्रभावित होती है. पर यदि गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को कम नहीं किया गया, तो उपरी हिस्से के वर्टिब्रा भी प्रभावित हो जाते हैं. 

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से बचने का तरीका – prevention of Cervical spondylitis in Hindi 

यदि आप इस समस्या से पीड़ित है, तो नजरअंदाज ना करें और तुरंत ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं फिजियोथैरेपिस्ट से संपर्क करें. आर्थो सर्जन जरूरत होने पर एक्स-रे, सीटी स्कैन एमआरआई आदि का परामर्श देते हैं एवं दवा के साथ सर्वाइकल कॉलर का उपयोग करने की सलाह देते हैं.  

स्पोंडिलाइटिस में की जाने वाली व्याम – spondylitis exercise in Hindi 

स्पोंडिलाइटिस मैं मरीज विशेष के लिए उपयुक्त व्यायाम का निर्धारण करने से पूर्व, मरीज के रीढ़ का भौतिक परीक्षण आवश्यक है. शुरुआत में जब मरीज को दर्द ज्यादा हो, तो सबसे पहले दर्द कम करने के लिए पल्स शॉर्ट वेव, डायथर्मी, टेंस, हाई वोल्टेज गलवानिक स्टिमुलेस्न, लेजर, हॉटपैक इत्यादि का उपयोग करना चाहिए. 

शुरुआत में व्यायाम दर्द रहित मूवमेंट से शुरू होकर धीरे-धीरे दर्द की सीमा तक बढ़ाना चाहिए, ताकि रीढ़ के चारों तरफ की संरचनाओं की तन्यता वापस प्राप्त की जा सके. स्पोंडिलोसिस में दिए जाने वाले व्यायाम निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं, जिनमें से मरीज की अवस्था एवं जरूरत के हिसाब से व्यायाम का चयन करना होता है.

  1. इसोमेट्रिक एक्सरसाइज.   
  2. कोर स्टेबिलाइजेशन एक्सरसाइज.    
  3. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज : नेक मसल्स स्ट्रेचिंग, मिडिल ब्रेक स्ट्रेचिंग, पेक्टरल स्ट्रैचिंग, एलीवेटर स्ट्रेच, लोअर बैक स्ट्रेच.     
  4. विशेषज्ञ फिजियोथैरेपी द्वारा ग्रेडेड जॉइंट मोबिलाइजेशन एवं न्यूरल मोबिलाइजेशन    
  5. मयोफेशियल रिलीज टेक्निक.    
  6. इमेजरी टेक्निक.   
  7. तैरना, टहलना एवं साइक्लिंग.   
  8. वायोफीडबैक आदि. 

व्यायाम के वक्त इन बातों का रखें खास ध्यान 

लंबर, कैनल, स्टेनोसिस, स्पांडिलाइसिस के मरीज को एक्सटेंशन एक्सरसाइज नहीं करना चाहिए. 
तकिए का उपयोग ना करने से अच्छा है, कम उचाई वाले तकिए या बटरफ्लाई पीलो का उपयोग किया जाना चाहिए, पट पर सोने की बजाय, करवट में सोए, सामने झुक कर भारी समान ना उठाएं. 

स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार – spondylis treatment in Hindi 

स्पॉन्डिलाइटिस या स्पोंडिलोसिस उम्र के साथ रीढ़ की हड्डियों के क्षय होने वाली प्रक्रिया है. इसमें रीढ़ के जोड़ एवं डिस्क खराब होने लगते हैं. इस कारण कमर एवं गर्दन में लंबे समय तक दर्द की शिकायत रहती है. गलत पोस्चर या ढंग से काम करने से यह छती अधिक होती है. कमजोर हड्डियों से पीड़ित लोगों को यह बीमारी जल्द पकड़ लेती है.

बीमारी बढ़ जाने पर नसों पर दबाव पड़ने लगता है इस स्थिति में नसों में दर्द के साथ झनझनाहट होने लगती है. पैरों में होने वाले इस दर्द को सियाटीका कहते हैं. बीमारी के बढ़ जाने पर लकवा भी हो सकता है. इस स्थिति में ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है.

इस ऑपरेशन में दबे हुए नसों की सफाई कर उनमें संचार सुनिश्चित किया जाता है. कम दबाव होने पर रीढ़ में कुछ इंजेक्शन देने से भी फायदा होता है. इसलिए स्पोंडलाइसिस को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

इसके बचाव के लिए नियमित व्यायाम और कैल्शियम युक्त पोस्टिक आहार का सेवन करना चाहिए. उठने-बैठने व काम करने के तरीकों में बदलाव लाना भी आवश्यक होता है.

फिजियोथैरेपी : स्पोंडिलाइटिस से पूर्ण रूप से छुटकारा मिलना तो आसंभव है, मगर यदि आप नियमित फिजियोथैरेपी कराते हैं, तो काफी हद तक आपको इस बीमारी के असहनीय दर्द से राहत मिल सकती है. फिजियो थेरेपी से शरीर के अलग-अलग हिस्सों की एक्सरसाइज कराई जाती है. जिससे शरीर के जोड़ों में मूवमेंट बनती है और मरीज को राहत महसूस होती है.

योग भी है रामबाण : स्पॉन्डिलाइटिस से बचने के लिए आप विभिन्न योग क्रियाएं भी कर सकते हैं. वज्रासन, सर्पआसन, वक्रासन आदि आसनों का अभ्यास प्रतिदिन करने से आपको इस के दर्द से राहत मिलेगी. कुछ समय तक लगातार करते रहने से जब दर्द से राहत मिले, तो सरल धनुरासन, मत्स्यासन आदि भी करें. इनसे आप को अत्यधिक लाभ मिलेगा. योग नियमित करे. 

जीवन शैली में लाए बदलाव 

आमतौर पर स्पॉन्डिलाइटिस अर्थराइटिस का ही एक रूप है. इस बीमारी के ग्रस्त होने के बाद व्यक्ति धीरे-धीरे इसके चपेट में चला जाता है. क्योंकि इस बीमारी का कोई ठोस इलाज अभी इजाद नहीं हुआ है.

एक बार यदि व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आ गया तो ताउम्र यह बीमारी व्यक्ति को परेशान करती है. इस बीमारी को फिजियोथैरेपी योग और दवाइयों के माध्यम से कंट्रोल तो किया जा सकता है.

मगर शरीर से इस बीमारी को निकालना मुश्किल है. इसलिए यदि आपको इस बीमारी से राहत चाहिए, तो नियमित व्यायाम करते रहें और पौष्टिक आहार लें. इसके अलावा कंप्यूटर व लैपटॉप आदि पर ज्यादा समय ना बिताएं. कंप्यूटर व लैपटॉप आदि के सामने बैठते समय कमर सीधी रखें और 30-40 मिनट के अंतराल में अपना पोस्चर बदलते रहे.

युवाओं को अपने डाइट का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है. ज्यादा फास्ट फूड का सेवन ना करें. यदि आप ऑफिस आदि में बैठकर 8-9 घंटे काम करते हैं, तो हर 2 घंटे में एक ब्रेक लें और 5 मिनट के लिए टहल लें. इससे मांसपेशियों को राहत महसूस होगी और शरीर के विभिन्न हिस्सों को आराम मिलेगा. 

Reference 

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