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सियाटिका में लाभदायक है शलभासन – salabhasana in Hindi

शलभासन – salabhasana yoga in Hindi

Salabhasana – भाग दौड़ भरे जीवन में अनेक लोग शियाटीका के शिकार हो रहे हैं. इस रोग में कमर में बेतहाशा दर्द के साथ सूजन की समस्या होती है. स्पाइन के निचले भाग में स्थित सियाटिका नमक नस पर दबाव बढ़ने से ही कमर के निचले भाग में तेज दर्द होने लगता है.

सियाटिका में दर्द हिप ज्वाइंट के पीछे से शुरू होकर धीरे-धीरे तीव्र होता हुआ तंत्रिका तंत्र से होते हुए पैर के अंगूठे तक फैलता है. इसमें घुटने के पीछे के भाग में भी काफी दर्द रहता है. कभी-कभी शरीर के इन भागों में सुन्नता और पैरों में सिकुड़न भी हो जाती है. 

ऐसी अवस्था में मरीज बिस्तर से उठ भी नहीं पाता है. इसमें बिजली के झटके जैसा दर्द होता है. कभी-कभी एक के ही पैर के एक भाग में दर्द होता है और दूसरे भाग सुन हो जाता है इस समस्या से साल भाषण काफी लाभदायक है. इस समस्या में शलभासन काफी लाभदायक है.

शलभासन का अर्थ | Salabhasana Meaning |

इस रोग में शलभासन सबसे उपयुक्त है. संस्कृत में शलभ शब्द का अर्थ है टिड्डी और यह आसन ऐसा है मानो टिड्डी जमीन पर बैठी हो इसलिए इसे शलभासन कहते हैं.

शलभासन की विधि | Salabhasana Steps |

स्टेप 1:  पेट के बल सीधे लेट जाएं. सबसे पहले थोड़ी को भूमि पर टिकाए. फिर दोनों हाथों को जांघो के नीचे दबाए. बाहं शरीर के दोनों तरफ, हथेलियां जमीन की तरफ कोहनियां थोड़ी मुड़ी हुई और उंगलियों पैरों की तरफ हो.
स्टेप 2 : अब सांस अंदर लेते हुए धीरे-धीरे दोनों टांगों को सटाकर समानांतर क्रम में ऊपर उठाएं. पैरों को ऊपर उठाने के लिए हाथों की हथेलियों से जांघों को दबाएं.
स्टेप 3 : वापस आने के लिए धीरे-धीरे पैरों को भूमि पर ले आए. फिर हाथों को जांघो के नीचे से निकालते हुए मकरासन की स्थिति में लेट जाएं. केवल थोड़ी, कंधे और छाती ही जमीन से लगी होनी चाहिए.
स्टेप 4 : कुछ सेकंड इस स्थिति में लेटे रहे. सांसे साधारण व लयबद्ध हो. 

शलभासन के फायदे 

वैसे तो शलभासन के बहुत सारे लाभ है लेकिन कुछ का वर्णन नीचे किया गया है.

  1. इसे करने से ऑक्सीजन अत्यधिक मात्रा में फेफड़ों में पहुंचता है. 
  2. श्रोणि परदेश व उधर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है. 
  3. पाचन तंत्र ठीक रहता है तथा भूख बढ़ती है. 
  4.  यह आसन पेट की चर्बी भी कम करता है.
  5.  गैस, कब्ज आदि की समस्या दूर होती है. 
  6.  मेरु दंड के नीचे वाले भाग में होने वाली सभी रोगों को यह आसन दूर करता है. 
  7.  पीठ की मांसपेशियों का विकास होता है. 
  8.  शरीर के नीचे के अंगों में रक्त प्रवाह बेहतर होता है.
  9.  यह स्त्रियों के लिए भी लाभकारी है. यह गर्भाशय का सूजन दूर करता है 

शलभासन करने में क्या सावधानी बरतनी चाहिए 

घुटने से पैर नहीं मुड़ना चाहिए. थोड़ी भूमि पर टिकी रहें. 10 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहे. जिन्हें मेरुदंड, पैरों या जांघों में कोई गंभीर समस्या हो, वह योग चिकित्सक से सलाह लेकर ही यह आसन करें. इस आसन के बाद स्वास गति तेज हो जाती है. तब तक इसको दोबारा ना करें जब तक कि सांस सामान्य ना हो जाए.

शलभासन किसे नहीं करना चाहिए 

इस आसन को करने में क्या परेशानी हो, उन्हें शुरु शुरु में अर्ध शलभासन करना चाहिए. इस क्रिया में दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाने के बजाय एक ही पैर को उठाना होता है. इस प्रकार दोनों पैरों को बारी बारी से ऊपर उठाकर आसन करना चाहिए.

आसन उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो साधारण कमर दर्द या साइटिका से पीड़ित है. जो लोग हर्निया, स्लिप डिस्क, हृदय रोग या आंतों के किसी रोग से पीड़ित है, तो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए. 

इसे भी पढ़े – धनुरासन से दूर करे रीढ़ की तकलीफ | Dhanurasana Process in Hindi |

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