Home Disease बचे मलेरिया के डंक से - malaria in Hindi

बचे मलेरिया के डंक से – malaria in Hindi

मलेरिया – about malaria in Hindi

malaria in Hindi – गर्मी बढ़ने के साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है. साथ ही मलेरिया का खतरा भी बढ़ता है. विश्व के गरीब और विकासशील देशों में मलेरिया से मरने वालों की संख्या बहुत ही अधिक है. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में लगभग 22 करोड़ लोग इससे पीड़ित हुए वही इसके कारण करीब 4.50 लाख लोगों की मृत्यु हो गई. 

इससे इस रोग की गंभीरता को समझा जा सकता है. हालांकि वर्ष 2000 के बाद से मलेरिया से मरने वाले लोगों की संख्या में 42% की कमी हुई है, लेकिन अभी भी इसके लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है. डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया के लगभग 80% केस केवल 17 देशों में हैं, जिनमें से अधिकतर देश विकासशील है, जिनमें भारत भी शामिल है.

मलेरिया के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 25 अप्रैल को मलेरिया विश्व दिवस मनाया जाता है. प्रमुख अस्पतालों के प्रतिष्ठित डॉक्टर दे रहे हैं मलेरिया से बचाव की समुचित जानकारी. 

मलेरिया क्या है ? what is malaria in Hindi |

मलेरिया एक पैरासाइटिक बीमारी है, जो प्लाज्मोडियम नाम के पैरासाइट से होता है. यह एनोफिलीस नाम के मादा मच्छर के काटने से होता है. मलेरिया फैलाने वाले यह मच्छर रुके हुए पानी में पैदा होते हैं. मलेरिया के लक्षण मच्छर के काटने के लगभग 7 से 10 दिनों के बाद नजर आने शुरू होते हैं.
एनोफिलिस मच्छर बरसात में के मौसम में अधिक होते हैं.

क्योंकि बरसात में बारिश का पानी अधिक दिनों तक जमा रहता है और यह पानी गंदा ब दूषित हो जाता है, जिससे मलेरिया के मच्छरों की उत्पत्ति होती है.
शुरुआत में मच्छर के काटने से व्यक्ति को मलेरिया बुखार होना शुरू होता है. एनाफिलीज मादा मच्छर के डंक का जीवाणु व्यक्ति के रक्त में प्रवेश कर उनकी कोशिकाओं को प्रभावित करता है और वह आश्वस्त हो जाते हैं. 

मलेरिया के कारण – malaria causes in Hindi 

मलेरिया एक प्रकार का परजीवी ( parasite ) होता है, जिसे प्लाज्मोडियम कहा जाता है. प्लाज्मोडियम परजीवी कई प्रकार के होते हैं, लेकिन पांच ऐसे प्लाज्मोडियम परजीवी है, जिनके कारण हमारे शरीर में मलेरिया फैलता है.

मलेरिया के प्रकार – types of malaria in Hindi 

मलेरिया दो प्रकार के होते हैं.

  1. प्लाज्मोडियम वाईवैक्स.
  2.  प्लाज्मोडियम फेल्सीफेरम.

मलेरिया टेस्ट – malaria test  in Hindi 

इस रोग में साधारण दवाइयों का सेवन करने से बुखार कुछ समय के लिए खत्म हो जाता है. मगर इससे मलेरिया रोगी की परेशानियों और अधिक बढ़ सकती है, क्योंकि समय रहते सही ट्रीटमेंट ना लिया जाए, तो जान पर भी बन आती है. इसलिए टेस्ट कराना जरूरी है.

सिवियर और साधारण मलेरिया के लिए रैपिड टेस्ट कराना जरूरी है. इस टेस्ट में खून में प्लाज्मोडियम पैरासाइट की मौजूदगी का प्रतिशत निकाला जाता है. पोलिमेरेज चैन रिएक्शन टेस्ट भी करा सकते हैं. 

सेरेब्रल मलेरिया – cerebral malaria in Hindi

यह मलेरिया सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करता है. इसे काबू करना अत्याधिक कठिन होता है. बच्चों में तो इसका प्रभाव अधिक भयंकर होता है. यदि दो-तीन दिन के अंदर इस पर काबू न पाया जाए, तो मरीज बेहोशी की हालत में पहुंचने लगता है और इससे रोगी की मौत भी हो सकती है. यह अक्सर इलाज के अभाव में रोग के बढ़ जाने से होता है.

मलेरिया के लक्षण – symptoms of malaria in Hindi

मलेरिया के बहुत से लक्षण है, जरूरी नहीं सभी लक्षण एक ही मरीज में दिखाई दे. ये अलग-अलग भी दिखाई दे सकता है. जिसमें से कुछ लक्षणों का वर्णन नीचे क्या गया है.  

  1. तेज बुखार रहना.  
  2. उल्टी लगना, जी मिचलाना.
  3. कमजोरी महसूस होना.  
  4. थकावट रहना. 
  5. खून की कमी होना. 
  6. आंखों में पीलापन आना.  
  7. अधिकांशत बुखार निश्चित समय आता है.
  8. बुखार के साथ कम कभी होना. 
  9. 7 से 10 दिनों में यह लक्षण प्रकट होना होना.

मलेरिया अन्य बुखार से अलग कैसे हैं? 

मलेरिया का बुखार इंटरमिटेंट होता है यानी 24 घंटे में 3 से 4 घंटे के लिए अचानक आता है इसके बुखार में तीन स्टेज होते हैं. कोल्ड स्टेज : इस स्टेज में अचानक से बहुत तेज ठंड लगती है. हॉट स्टेज : इस स्टेज में रोगी को अचानक तेज गर्मी लगने लगती है.स्वेडिंग स्टेज : इस स्टेज में रोगी को अत्यधिक पसीना आने लगता है. ऐसा मलेरिया परजीवी के लाइफ साइकिल के कारण होता है, यदि किसी रोगी को बुखार में इस तरह के लक्षण देखने को मिले, तो फिर जांच की आवश्यकता नहीं है. 

ऐसी अवस्था में जल्द से जल्द मलेरिया की दवाई शुरू करनी चाहिए. आजकल रेजिस्टेंट मलेरिया की शिकायत बढ़ गई है. मलेरिया के परजीवी सामान्य दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक हो गए हैं. अधिकतर मलेरिया के बुखार को रेसिस्टेंट मलेरिया मानकर ही उसका इलाज किया जाता है. 

मलेरिया की जांच किस प्रकार होती है – How is malaria screened? In Hindi

पहले मलेरिया के परजीवी को ब्लड में माइक्रोस्कोप में देखा जाता था. इसमें काफी समय लगता था. कभी-कभी मलेरिया की शुरुआत में इसकी जांच कराने पर मलेरिया परजीवी नजर नहीं आते थे. आजकल इसके लिए ऑप्टिमल टेस्ट होता है.

यह एक प्रकार का इम्यूनोलॉजिकल टेस्ट होता है. शरीर में जब मलेरिया परजीवी एंटी जैन बनाता है, तो शरीर उससे लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है. इसी की सहायता से मलेरिया का पता लगाया जाता है. यह टेस्ट बहुत ही तेज गति से संपन्न होता है और इसका रिजल्ट भी बहुत हद तक सुद्ध होता है.

मलेरिया के उपचार पर प्रकाश डालें – malaria treatment in Hindi

जांच में मलेरिया पाए जाने के बाद तुरंत इसका इलाज शुरू करवाना चाहिए. पहले इसके लिए क्लोरोक्वाइन टेबलेट का उपयोग किया जाता था. लेकिन धीरे-धीरे इसकी क्षमता कम हो गई है. इससे साइड इफेक्ट भी होता है, जिससे मरीज को उल्टी होने लगती है. 

आजकल इसके लिए अर्थरेटर और लुमेथर का उपयोग किया जाता है. सेरेब्रल मलेरिया बहुत ही घातक होता है, यह ब्रेन और किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इसके लिए आरतीसुमेट टेबलेट का प्रयोग किया जाता है. जब किसी भी दवाई का असर होना बंद हो जाता है, तो फिर क्वीनन इनका प्रयोग किया जाता है. 

मॉस्किटो कॉइल का उपयोग कितना सही है? 

मच्छरों के प्रकोप के कारण मलेरिया के अलावा फाइलेरिया, डेंगू, जैपनीज इंसेफलाइटिस आदि कई बीमारियां बहुत ही तेजी से फैल रही है. इसलिए मच्छरों की रोकथाम बहुत ही जरूरी है. लेकिन इसके लिए कॉइल का उपयोग सही नहीं है. क्योंकि इससे निकलने वाला धुआं सिगरेट से भी अधिक खतरनाक होता है.

जिस तरह किसी कमरे में लकड़ी के चूल्हे को जलाने से उसकी दीवार पर धुआं की एक परत बैठ जाती है. उसी प्रकार लगातार कोयल के धुआं के संपर्क में रहने से फेफड़ों में धुआं जमा होने लगता है.
जो सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक है. मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग सबसे अच्छा है. कम पावर के लिक्विडाइजर का प्रयोग भी किया जा सकता है. 

मलेरिया कैसे फैलता है? – how does malaria spread in Hindi

मलेरिया परजीवी के जीवन चक्र के दो प्रभाव होते हैं, जिससे यह रोग बहुत तेजी से फैलता है.
संक्रमित मच्छर से स्वास्थ्य मनुष्य को : संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटती है, तो लार के साथ उसके रक्त में मलेरिया परजीवी को पहुंचा देती है. इसके काटने से 10 से 12 दिनों बाद व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण दिखते हैं. 

मलेरिया रोगी से आज संक्रमित मादा एनाफिलीज द्वारा अन्य व्यक्तियों को : रोगी को काटने पर आसंक्रमित मादा मच्छर रोगी के खून के साथ मलेरिया परजीवी को भी चूस लेती है. 12 से 14 दिनों में यह मच्छर भी मलेरिया फैलाने में सक्षम होते हैं. यह जितने भी स्वास्थ्य मनुष्य को काटते हैं, उन्हें मलेरिया हो जाता है.

मलेरिया से कैसे बचे – How to avoid malaria in Hindi

मलेरिया से बचने के लिए आसपास रखे साफ सफाई: रोग के इलाज से बेहतर इससे बचाव होता है. इसलिए पानी इकट्ठा ना होने दें. पानी को नियमित साफ करते रहे. कूलर आदि में अधिक दिनों तक पानी कट्ठा रहने से इसमें मच्छर पनप जाते हैं.

यदि बुखार होता है तो परहेज करें. खुद से दवाई न लें. चिकित्सक से सलाह मशवरा कर रही दवाई ले और यदि बुखार दो-तीन दिन लगातार है, तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेकर टेस्ट कराएं.

मच्छरों से बच्चों को ज्यादा बचाएं. घर पर मच्छर से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने और बच्चों को भी पहनाएं. खुद से दवाइयों का सेवन करने से बुखार बिगड़ भी  सकता है और रोगी की स्थिति गंभीर हो सकती है.  

कीटनाशकों का छिड़काव कराएं. कूलर का पानी बदलते रहे. घर में ज्यादा से ज्यादा लहसुन का प्रयोग करें. इसकी गंध से मच्छर पास नहीं आते हैं. मच्छर भगाने वाले ऑयल, क्रीम का इस्तेमाल भी कर सकते हैं नीम के तेल से भी मच्छर भागते हैं. मच्छरदानी का प्रयोग सबसे सही है.

जहां आप रहते हैं वहां आसपास पानी जमा न होने दें. पानी को हमेशा ढक कर रखें. यदि घर के आसपास पानी इकट्ठा रहता है. तो वहां केरोसिन या पेट्रोल का छिड़काव करें. पानी को पीने से पहले उबाल लें. इसके अलावा आप क्लोरीन की गोली का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. 

बुखार ( मलेरिया ) होने पर अपनाएं यह तरीके

तुरंत खुद से दवाई ना लें. कई बार लोग पारासिटामोल ले लेते हैं, वहीं कई बार बुखार में पारसिटामोल के साथ एंटीबायोटिक भी ले लेते हैं. ऐसा करना घातक साबित हो सकता है, क्योंकि बुखार के प्रकार के आधार पर ही ट्रीटमेंट दिया जाता है. मलेरिया में एंटीमलेरियल दवाई दी जाती है, वही टाइफाइड बुखार में एंटीबायोटिक दी जाती है. 

बुखार से पीड़ित मरीज से दूरी बनाए रखें, क्योंकि यह बीमारी फैल भी सकता है. पसीने से बुखार नहीं उतरता है. चिकित्सकों का मानना है कि बुखार होने पर खुली हवा में रहना काफी कारगर साबित होगा. खुद से टेस्ट कराने पर पैसा बर्बाद ना करे. चिकित्सक को सलाह से ही टेस्ट कराएं. 

क्या बुखार बढ़ने पर किडनी फेल हो सकता है? 

मलेरिया का संपूर्ण इलाज मौजूद है. चिकित्सक से प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर जांच कराकर, एंटी मलेरियल ड्रग्स के सेवन से मलेरिया पर काबू पाया जा सकता है. मगर आप बुखार होने पर भी चिकित्सक से ट्रीटमेंट नहीं लेंगे, तो बिगड़े हुए मलेरिया से आपको कई अन्य बीमारियों का भी सामना भी करना पड़ सकता है.

यदि लोग अधिक बढ़ जाता है, तो किडनी फैलियर होने का खतरा भी बनने लगता है. इसके अलावा दौरा पड़ना भी इस बीमारी का एक साइड इफेक्ट है. इसलिए जरूरी है कि बुखार होते ही चिकित्सक से जांच कराकर समय पर ट्रीटमेंट जरूर लें.

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