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Leprosy in Hindi | कुष्ठ रोग के लक्षण, कारण, इलाज, दवा और उपचार |

Leprosy in Hindi
Leprosy in Hindi

कुष्ट रोग क्या है( leprosy in Hindi )

leprosy in Hindi – बहुत से लोग यह समझते हैं कि कुष्ठ रोग छुआछूत की एक बीमारी है, पर यह सही नहीं है. लेकिन कुष्ठ के संक्रमण का कारण लेप्री बैक्टीरिया है, जो व्यक्ति इससे संक्रमित होता है उसकी सांसों से निकलकर हवा में फैलता है इससे आसपास के वातावरण में सांस लेने वाले व्यक्ति को संक्रमित करता है.

लेकिन किसी स्वास्थ्य व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर इसे पूरी तरह संक्रमित होने में 4 से 5 साल लग जाते हैं व्यक्ति शुरुआती लक्षणों को देखकर उसकी इलाज से leprosy को पूरी तरह दूर किया जा सकता है.

मेडिकल साइंस में इस रोग को वायु जनित संक्रामक रोग माना गया है.आंकड़ों को मानें तो दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों से होने वाले अपंगता का एक बड़ा कारण कुष्ठ रोग है.

यह माइकोबैक्टेरियम लेप्रे बैक्टीरिया के फैलने से होता है. पीड़ित व्यक्ति के खासने या छींकने पर स्वाषण तंत्र से निकलने वाली बूंदों में लेप्रो बैक्टीरिया मौजूद होता है. जो वायु के साथ मिलकर स्वास्थ्य व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर इन बैक्टीरिया को पनपने का मौका देते हैं.

शुरुआती अवस्था में लेप्रेसी के लक्षणों की अनदेखी करने से व्यक्ति अपंगता का शिकार हो सकता है. जिससे ठीक होने में 4 से 5 साल का वक्त भी लग सकता है शुरुआती दिनों में लिप्रे बैक्टीरिया हाथ-पैर, मुंह जैसे खुले रहने वाले अंगों को प्रभावित करता है.

जब इस बैक्टीरिया का असर शरीर पर होने लगता है तो शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने लगती है और इससे प्रभावित अंग सुन होने लगते हैं. त्वचा पर दाग पड़ने लगते हैं और बाद में वहां की त्वचा रूखी और सख्त होने लगती है.

इस बैक्टीरिया का प्रभाव बढ़ने पर सेंट्रल नर्वस सिस्टम भी प्रभावित होता है. जिससे मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है. पेरीफेरल नर्वस मोटी होने लगती है और मांसपेशियां धीरे धीरे काम करना बंद कर देती है.

जब यह बैक्टीरिया हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालता है. तब हाथ पैर टेढ़े होने लगते हैं और अगर ध्यान ना दिया जाए तो हड्डियां अकड़ जाती है. जिससे हाथ वा पैर से काम करना और चलना फिरना लगभग नामुमकिन हो जाता है,

यह बैक्ट्रिया इतनी खतरनाक है कि आंखों की पुतलियों को भी प्रभावित कर देता है. आंखों को झपका नहीं पाते. आंखें हमेशा खुली रहती है, लीप्रे बैक्टीरिया मिश्रित हवा के संपर्क में आने से आंखें सूखने लगती है. और अगर यह बैक्टीरिया आंखों के अंदर चले जाए तो अल्सर होने का खतरा रहता है और इससे आंखों से दिखाई देना भी बंद हो सकता है.

उपचार: ( leprosy in Hindi )

इससे पीड़ित व्यक्ति शुरुआती अवस्था में ही समुचित जांच व उपचार कराए. और जरूरी सावधानियां बरतें और दवाइयों सही समय पर ले. तो मरीज 6 से 12 महीने में ठीक हो सकता है.

अलग-अलग उम्र के हिसाब से अलग-अलग तरह की दवाइयां मरीजों को दी जाती है जो कि सभी सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्र में बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है. जिसका लाभ लेकर आप जल्दी ही ठीक हो सकते हैं या इस बीमारी से बच सकते हैं.

इन बातो का रखे ख्याल: ( leprosy in Hindi )

1. इसके मरीज रोज सुबह उठकर आईने के सामने बैठकर शरीर के दाग, छाले और स्किन में आए बदलावों की जांच करें. महसूस करे की हाथ पैर सुन्न तो नहीं हो रहे.

2. काम करते समय किसी भी गर्म चीज को नहीं पकड़े. जितना संभव हो गर्म चीजों से दूर रहे. गर्म चीजों को पकड़ने के लिए तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें. या फिर हाथों में दस्ताने पहन कर काम करें.

3. काम करते वक्त या कोई भी सामान पकाते समय आग से दूरी बनाकर रखें. क्योंकि इस प्रकार के रोगों के व्यक्ति के लिए आग अत्यंत घातक होता है.

4. इस रोग वाले व्यक्ति को ज्यादा चलना फिरना मना है. और अगर ज्यादा दूरी तक चलना हो तो रुक रुक कर आराम करने के बाद थोड़ी थोड़ी दूर चले और फिर आराम करें. ऐसा करने से आपको किसी भी प्रकार की कठिनाई महसूस नहीं होगी।

5. जितना हो आंखों पर चश्मा पहनने की कोशिश करें रात को सोते समय आंखों को साफ कपड़ा ढीला करके बांधकर सोए जिससे वे खुली ना रहें.

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