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बचें लू के कहर से – heat stroke in Hindi – othershealth

लू लगना – heat stroke in Hindi

Heat Stroke in Hindi – इन दिनो चिलचिलाती धूप वाह भीषण गर्मी में एक कदम चलना दूभर है. घर से बाहर निकलते ही लू थपेड़ो का खतरा मंडराने लगता है. जरा सी लापरवाही बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक को अपनी चपेट में ले सकती है. वैसे तो यह गर्मी की आम समस्या है, लेकिन बचाव ना हो, तो घातक भी हो सकती है. इस अंक में लू से बचाव पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टर.

लू लगना किया है

जब कोई व्यक्ति तेज धूप में घर से बाहर निकलता है और गर्म हवा के थपेड़ों के संपर्क में आता है, तो व्यक्ति के शरीर का तापमान एकाएक बढ़ जाता है. इससे शरीर में पानी की कमी होना भी आम है. इसलिए कहा जाता है कि गर्मी में ज्यादा से ज्यादा पानी पीने पिएं. 
गर्म हवा के थपेड़ों के संपर्क में शरीर जितना ज्यादा रहेगा, लू लगने की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाएगी. शरीर के अंदर तापमान को नियंत्रित करने वाले थर्मोस्टेट सिस्टम जब शरीर का तापमान ठंडा नहीं रख पाता, तब शरीर के अंदर गर्मी बढ़ती है और शरीर का पानी पसीने के माध्यम से बाहर आ जाता है. इस स्थिति में शरीर में गर्मी बढ़ जाती है और लू लग जाती है.
इसके अलावा खुश्की और थकावट महसूस होना भी आम बात है. लू लगने पर बुखार भी हो सकता है. अक्सर यह बुखार काफी तेज व गंभीर होता है. बीपी भी लो हो जाता है. यदि ज्यादा समय तक यह लक्षण नजर आए, तो चिकित्सक से सलाह लें अन्यथा या घातक साबित हो सकता है. 

लू लगने के लक्षण – Heat stroke symptoms in Hindi

लू लगने के कई करण हो सकते है जिनमे से कुछ कारणों का वर्णन नीचे दिया गया है. 

  1. शरीर का तापमान बढ़ा हुआ महसूस होना.
  2. थकावट.
  3. बेहोशी जाना.
  4. तेज बुखार.
  5. उल्टी चक्कर डस्ट सिरदर्द आदि होना. 
  6. कमजोरी महसूस होना.
  7. शरीर में खुश्की हो जाना.  

लू लगने पर अपनाएं यह तरीके 

लू लगने पर व्यक्ति को ठंडी जगह पर बिठाए. कोशिश करें कि ऐसी, कूलर के सामने बिठाने के बजाय प्राकृतिक ठंडी जगह पर बिठाए, जैसे- पेड़ की छांव में, उसे ढीले कपड़े पहनाएं और पानी पिलाएं. शरीर पर ठंडा कपड़ा रखने से भी काफी राहत महसूस होगी. 
लगातार पानी पिलाते रहे. नमक व चीनी मिला हुआ पानी भी काफी लाभदायक है. आंखों को आराम देने के लिए लू से पीड़ित व्यक्ति की आंखों पर गिला कपड़ा रखें. तला भुना खाने से परहेज कराएं.
यदि ऐसा करने पर भी राहत ना महसूस हो, तो चिकित्सक को दिखाकर ट्रीटमेंट कराएं. यदि मरीज शुगर पेशेंट है, तो उसे बिना चीनी का शरबत देकर खुश्की दूर कर सकते हैं. नींबू पानी और इलेक्ट्रॉन पिलाते रहे. 

लू लगने से बचाव – prevention of heat stroke in Hindi

लू कोई बीमारी नहीं है, मगर यह शरीर में ऐसे लक्षण पैदा कर देता है, जिससे शरीर विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाता है. लू का कोई ठोस इलाज भी नहीं है. चिकित्सकों की मानें, तो लू से बचना ही सबसे बेहतर उपाय है. इसके अलावा कुछ सुझाव निम्न है, जो आपको लू से बचा सकता है.
घर से बाहर तेज धूप में निकलने से पहले शरीर को अच्छे से ढक लें. ऐसा करने से शरीर के विभिन्न हिस्से बाहर चल रही गर्मी गर्म हवाओं के संपर्क में आए में आने से बच सकते हैं. 

  1. ज्यादा टाइट कपड़े ना पहने.
  2. धूप में निकलते वक्त छाते का प्रयोग करें.
  3. खाली पेट घर से बाहर ना निकल. 
  4. आंखों का बचा भी करे, हो सके तो चश्मा, टोपी आदि पहन कर घर से बाहर निकले.
  5. तरल खाद पदार्थों का सेवन अधिक करें.
  6. बाहर निकलते वक्त पानी भी की बोतल भी साथ लेकर चले.
  7. पसीना आने के तुरंत बाद ऐसी या पंखे में ना बैठे. 

आप कुछ निम्न घरेलू उपाय अपनाकर भी लू से बचाव बच सकते हैं.   

  1. एक चम्मच पुदीने के रस और
  2. चम्मच सौंफ के रस को दो चम्मच ग्लूकोस पाउडर में मिलाकर आधे-आधे घंटे के अंतराल में देते रहें.
  3. नारियल की गिरी से दूध निकाले और काले जीरे के साथ पीसकर शरीर पर लगाएं. इससे शरीर के तापमान में गिरावट आएगी. 
  4. प्याज के रस से छाती की मालिश करने से भी लू में आराम मिलता है. 

लू से बचाव में क्लीजिंग भी है रामबाण 

यदि आप चिलचिलाती धूप में बाहर निकलते हैं, तो आपके लिए क्लिजिग बेस्ट ऑप्शन है. इस मौसम में आप दिन में दो बार स्किन की डीप क्लींजिंग करा सकते हैं. क्लीजिन्नग से आप इस स्क्रीन पर जमी गंदगी को भी दूर कर सकते हैं. एलोवेरा, लेवेंडर, लेमन, पिपरमेंट आदि से बने फेस वॉश और जेल अच्छी क्लींजर है. इनके इस्तेमाल से फेस को साफ सुथरा रखा जा सकता है.
इससे स्किन के अंदरूनी हिस्से भी अच्छी तरह सक्रिय रहते हैं. और किसी समस्या के चपेट में कम आते हैं. इसलिए धूप में भी दमकती स्किन पाने के लिए क्लिजिंग करा सकते हैं. क्लोजिंग के बाद टोनिंग भी कराएं, इसके इससे त्वचा को पर्याप्त पोषण मिलता है. इसके अलावा d-10 थेरेपी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जो लोकप्रिय है. इससे टैनिंग और एलर्जी की समस्या से काफी हद तक राहत पा सकते हैं. 

धूप से बचने के लिए किया करे

धूप से बचने के लिए करे सनस्क्रीन का क्रीम का प्रयोग. गर्म हवा के संपर्क में आने से सबसे ज्यादा नुकसान स्किन को होता है. चिलचिलाती धूप और गर्म हवा स्किन की नमी को तो सोख ही लेती है, साथ ही यह कई प्रकार की समस्याओं को भी जन्म देती है. कुछ प्रमुख समस्याएं और उनसे बचने के उपाय नीचे दिए गए हैं.  
घमौरियां : यह समस्या गर्मी में आम है. गर्म हवा के संपर्क में आने से स्किन की नमी खत्म हो जाती है. इसलिए यह समस्या आती है. इसमें स्किन पर दाने हो जाते हैं और उनमें खुजली और जलन होती है. बचाव के लिए जरूरी है कि आप घर से बाहर निकलते वक्त शरीर को पूरा ढककर निकले. ठंडे पानी से दिन में कई बार स्नान करें. ग्लिसरीन युक्त साबुन का इस्तेमाल लाभदायक है. 
सनबर्न : यह समस्या लू की चपेट में आने पर ज्यादा देखने को मिलती है. इसमें स्किन लाल हो जाती है और कई बार तो सूजन भी आ जाती है. सनबर्न होने पर प्रभावित हिस्से पर ठंडे पानी की पट्टी रखे और कैलेमाइन लोशन का इस्तेमाल करें. धूप से निकलने से पहले सनस्क्रीन क्रीम या लोशन का प्रयोग करें.
फोटो एलर्जी : तेज धूप में अधिक समय तक रहने से त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और उनमें खुजली होती है. इस समस्या से बचने के लिए अपनी स्किन को ढक कर बाहर निकले. छाते का प्रयोग करें.
टैनिंग : तेज धूप में लगातार बाहर रहने से स्किन का कलर बदल जाता है. इस समस्या में अक्सर स्किन पर सांवलापन नजर आने लगता है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि सूती और पूरे बहं वाले कपड़े पहन कर ही बाहर निकले.

लू के कारण शरीर में उत्पन्न होने वाली समस्याएं 

लू के कारण शरीर में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती है. जो निम्न है, जिनका वर्णन नीचे किया गया है.
एक्सहोशन : शरीर में पानी और न्यूट्रीलाइट के पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाने पर व्यक्ति को बहुत ही थकावट महसूस होती है. इस स्थिति को एक्सहोशन कहते हैं. इस अवस्था में प्यास कम लगती है. पेशाब भी कम हो जाता है.  
हीट क्रैंप्स : अत्याधिक गर्मी के कारण हाथ-पैर में क्रैंप्स हो जाते हैं.
हीट hyperpyrexia : शरीर में तापमान के नियंत्रण की व्यवस्था होती है, जिससे शरीर का तापमान एक समान बना रहता है. अत्यधिक गर्मी से इसका फंक्शन नष्ट हो जाता है, जिससे शरीर का तापमान अचानक बढ़ कर 105 डिग्री हो जाता है. इसे हीट hyperpyrexia कहते हैं. इसमें शरीर में पसीना नहीं निकलता और त्वचा बिल्कुल ड्राई हो जाती है. रोगी बेहोश हो जाता है. यह बहुत ही घातक होता है और इससे जान जा सकती है. 
हीट स्ट्रोक : यह भी ताप नियंत्रण प्रणाली फेल होने से ही होता है. इसमें भी रोगी बेहोश हो जाता है और तापमान 105 डिग्री हो जाता है. लेकिन इसमें पसीना निकलता रहता है.  
हीट सिंकॉप : अत्याधिक गर्मी में शरीर के बाहरी हिस्से में ब्लड सप्लाई ज्यादा होने से दिमाग में ब्लड सप्लाई कम हो जाती है. इससे चक्कर आ जाता है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है. यह बहुत देर तक धूप में खड़ा होने से होता है.
सनबर्न : तेज धूप में अक्सर त्वचा काली पड़ जाती है. इसे सनबर्न कहते हैं. 
उपचार : एक्सहोसेन होने पर पानी में नमक और नींबू घोलकर पिलाने से लाभ होता है. हाइपरपीरेक्सिया में रोगी के शरीर के ताप को घटाने के लिए पानी में बर्फ मिलाकर या अत्यधिक ठंडे पानी से नहालयें.
शरीर का ताप तुरंत कम हो जाता है. बीच-बीच में तापमान को चेक करें कि कहीं जरूरत से कम तो नहीं है. उसके बाद अन्य उपचार करना चाहिए. हिट सिंकोप की अवस्था में रोगी को तुरंत किसी छायादार स्थान पर ले जाकर लिटा देना चाहिए. 

घमौरी कैसे होता है 

पसीना निकलने वाली नालियां जाम होने से शरीर पर दाने निकलते हैं. इसे ही घमौरिया या मिलीएरिया कहते हैं. 

घमौरी कितने प्रकार का होता है

  1. मिलायरिया क्रिस्टलीना : छोटे दाने जिनमें पानी की बूंदे जैसा- साफ तरल पदार्थ होता है. त्वचा पर लालिमा नहीं होती है.
  2. मिलियरिया रूबा : छोटे तथा लाल दाने. इसमें कांटा चुभने जैसा एहसास होता है, इसलिए इसे प्रिकलीहिट भी कहते हैं.
  3. मिलाइरिया स्टुलोसा : जब मिलीएरिया रुबरा में इंफेक्शन होता है, तो यह मिलीएरिया स्टूलोसा परावर्तित हो जाता है. इससे मवाद हो जाता है.
  4. पेरिपोराइट्स : पसीने के नली के चारों ओर इन्फेक्शन होने से बड़ा दाना निकलता है. बड़ा दाना के सिर में निकल जाने से बालों की जड़ों को हमेशा के लिए नुकसान हो सकता है. इन सब से बचाव के लिए जब भी पसीना निकले तो उसे साफ और गीले कपड़े से पूछते रहे. एंटी फंगल पाउडर का इस्तेमाल करें.

लू से बचने के लिए क्या खाएं?

यदि आप अपने खानपान में बदलाव लाते है, तो आपको लू से छुटकारा मिल सकता है. गर्मियों में ऐसा भोजन करें जिससे शरीर के अंदर गर्मी पैदा ना हो. कोशिश करें कि ठंडी चीजों का सेवन ज्यादा हो. इससे शरीर के मेटाबॉलिज्म से शरीर में अधिक गर्मी पैदा नहीं होती है. 
प्राकृतिक चीजों का ज्यादा प्रयोग करें जैसे- फल, दूध से बने उत्पाद आदि. सब्जियों में कद्दू ज्यादा खाए. ककड़ी और खीरा आदि भी ज्यादा से ज्यादा खाएं, यह शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाते हैं.
अधिक से अधिक पेय पदार्थों का सेवन करें जैसे- नारियल पानी, लस्सी, शिकंजी, सत्तू, शरबत, बेल का जूस आदि. तली हुई चीजें खाने से परहेज ही सबसे ज्यादा फायदेमंद है, इसलिए ऑइली चीजों को गर्मियों में ना खाएं. 

Reference

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