Healthy Diet

खानपान बिगाड़ न दे मानसून का मजा | Your Healthy Diet For Monsoon |

Healthy Diet For Monsoon – स्वास्थ्य रहने के लिए मौसम के अनुकूल आहार का अधिक महत्व है.ऋतुचर्या यानी ऋतु के अनुसार खाद पदार्थ का सेवन ही हमें सेहतमंद रखता है. एक ऋतु की समाप्ति वा दूसरे ऋतु के शुरू होने के समय व्यक्ति के बीमार होने की आशंका अधिक रहती है. 14 दिनों की अवधि ऋतु संधि कही जाती है. इस दौरान मौसम में अचानक बदलाव आने लगता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है.

शरीर में विभिन्न प्रकार के दोष होते हैं. प्रत्येक ऋतु में इन दोषों में बदलाव होते रहता है. यह एक सामान्य प्रक्रिया है. वैज्ञानिक भाषा में इसे इस्कार्डियान रिडीम कहते हैं. किसी भी ऋतु में हमारे शरीर में किसी एक दोष में वृद्धि हो जाती है और दूसरा दोष शांत हो जाता है. वही दूसरे ऋतु में कोई दूसरा दोष बढ़ जाता है जबकि अन्य शांत हो जाता है.

इस प्रकार मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ ऋतु का गहरा संबंध है. ऋतु के अनुसार आहार-विहार ( Healthy Diet For Monsoon ) अपनाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है इससे मनुष्य लोग लोगों से बचा रहता है. 

भारत में कुल कितने ऋतु हैं 

भारत में छह ऋतु में हैं माघ फागुन में शिशिर चैत्र वैशाख में वसंत जेस्ट आसार में गिरीश में सावन भाद्रपद में वर्षा अश्विनी कार्तिक में शरद और मार्गशीर्ष पौष में हेमंत ऋतु होती है वर्तमान समय वर्षा ऋतु का है इस ऋतु में हमें अपने आहार-विहार को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है 
इस समय वातावरण में हरियाली के साथ-साथ नमी और ड्राइनेस होती है इसके कारण ही मच्छर मक्खी आदि की पतंग उत्पन्न होते हैं जो बीमारी के प्रमुख कारण बनते हैं 

वर्षा ऋतु का शरीर पर किया प्रभाव पड़ता है | Healthy Diet For Monsoon |

इस ऋतु में पाचन शक्ति दुर्बल होती है. बारिश के कारण पृथ्वी से निकलने वाली वास्प, आमल की अधिकता, धूल और धुआं से युक्त वात का प्रभाव पाचन शक्ति पर पड़ता है. क्योंकि इन दिनों सूर्य की गर्मी बढ़ जाती है और शरीर में पित्त दोष का संचय होने लगता है.
इससे शारीरिक शक्ति क्षीण हो जाती है. इन्हीं कारणों से शरीर में आम दोष का बनना शुरू हो जाता है. इसमें मलेरिया, फाइलेरिया, बुखार, जुकाम, डस्ट, आंत्रशोध, वात रक्त व त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ जाती है. 

वर्षा ऋतु में किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए | Healthy Diet For Monsoon |

इस समय प्रत्येक व्यक्ति की पाचक अग्नि दुर्बल होती है. इसके कारण हल्के, सुपाच्य, ताजे, गर्म और पाचक अग्नि को बढ़ाने वाले आहार का सेवन करना चाहिए.
वात दोष को शांत करने वाले आहार का सेवन करें. इस दृष्टि से गेहूं, जो, शैली, साठी के चावल जैसे पुरानी अनाज, खिचड़ी, दही, मक्का, सरसों, राई, मूंग की दाल आदि को डाइट में शामिल करें. 

  • जल की शुद्धि का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पानी को हमेशा उबालकर ठंडा होने पर पिए.
  • सेब, केला, अनार, नाशपाती और पके देसी आम खाएं. घी व तेल से बने नमकीन पदार्थों का सेवन भी फायदेमंद है. 
  • दही की लस्सी में त्रिकूट ( सोंठ, पिपली और काली मिर्च ) सेंधा नमक, अजवाइन, बाजरा डालकर पीने से पाचन शक्ति ठीक रहती है. 
  • रोज शहद का सेवन करें, लेकिन इसे कभी गर्म करके ना ले. 
  • वात और कफ दोषों को शांत करने के लिए तीखा, अम्लीय और क्षारीय पदार्थ का सेवन करना लाभदायक होता है, लेकिन सीमित मात्रा में ही ले.
  • अम्ल, नमकीन और चिकनाई वाले पदार्थ के सेवन से वात दोष शांत होता है. विशेष रूप से उस समय जब अधिक वर्षा से मौसम ठंडा हो गया हो. 

वर्षा ऋतु में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए 

वर्षा ऋतु में बहुत से ऐसे से छोटी-छोटी बातें हैं जिनका ध्यान रखकर हम बीमार होने से बच सकते हैं. 

  • दिन में दो बार स्नान करें 
  • साफ सुथरा और हल्का वस्त्र पहने. 
  • भूख लगने पर ही भोजन करें. 
  • घर के आसपास सफाई रखें. 

इन खानपान और आदतों से बनाएं दूरी 

  • पत्ते वाली सब्जियां पत्तागोभी, फूलगोभी ठंडे और सूखे पदार्थ, चना, मटर, मसूर, जो, कटहल आदि का सेवन करने से बचे. 
  • पानी में घोलकर सत्तू का सेवन ना करें. इससे वात दोष बढ़ता है, जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है. 
  • वर्षा ऋतु में पित्त दोष का संचय होना शुरू हो जाता है. इसलिए बेसन से बने पदार्थ, तेज- मिर्च मसाला, बासी और पित्त बढ़ाने वाले आहार का सेवन ना करें.
  • भारी भोजन का सेवन, बार बार भोजन करना, भूख ना होने पर भी भोजन करने से स्वास्थ्य खराब होता है. 
  • इस समय ना दिन में सोना चाहिए, ना ही देर रात तक जागना चाहिए. धूप में घूमना, अधिक पैदल चलना व अधिक शारीरिक व्यायाम करने से परहेज करें.

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