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स्वस्थ प्रसव के लिए करे खुद को तैयार – Prepare yourself for a Healthy Delivery |

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Healthy Delivery

स्वस्थ प्रसव के लिए करे खुद को तैयार ? Healthy Delivery in Hindi |

Healthy Delivery गर्भावस्था एक स्त्री के लिए जीवन भर याद रहने वाला समय होता है. इस समय उसके शरीर में तमाम बदलाव होते हैं. कभी वह गर्भवती होने से बेहद खुश होती है, तो कभी परेशान भी की जल्दी से बस डिलीवरी हो जाए. मगर प्रसव एक स्त्री के लिए दूसरे जन्म से कम नहीं होता. सा

प्रसव के मुकाबले आज सिजेरियन डिलीवरी के मामले बढ़े हैं, जो पिछले एक दशक में 3 गुने हुए हैं. इसके कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा से ज्यादा खतरे वाली है, इसलिए जहां तक संभव हो हमेशा नॉर्मल डिलीवरी कराने की कोशिश की जानी चाहिए.

किसी भी स्त्री के लिए मां बनने से बड़ा सुख कोई दूसरा नहीं होता. माता-पिता, परिवार के सदस्य और नाते-रिश्तेदार उस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, जब वह नन्ही सी जान को इस दुनिया में लाती है.

लेकिन जैसे जैसे दिन नजदीक आते हैं, प्रसव पीड़ा को लेकर गर्भवती महिला की उत्तेजना और डर भी बढ़ता जाता है. कुछ वर्ष पहले तक जहां ज्यादातर सामान्य डिलीवरी से ही बच्चे होते थे, वहीं अब सिजेरियन डिलीवरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. भारत में बीएमसी पब्लिक हेल्थ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थागत डिलीवरी में वृद्धि के साथ सिजेरियन सेक्शन के जरिए बच्चों को जन्म में भी बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट में 22,111 बच्चों के जन्म का विश्लेषण दिया गया. इसमें सरकारी और निजी अस्पतालों में सिजेरियन के जरिए बच्चों का जन्म क्रमश 13.7% और 37.9% था. यह निष्कर्ष बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्र की तुलना में से जिनके सिजेरियन के जरिए बच्चों को जन्म निजी अस्पतालों में लगभग 3 गुना अधिक है.

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सर्जरी के जरिए बच्चों का जन्म ना सिर्फ खर्च बढ़ाता है, बल्कि महिलाओं के लिए अनावश्यक जोखिम भी पैदा करता है, इसके कई कारण है. कई मामलों में महिलाएं अब प्रसव पीड़ा नहीं सहना चाहती, बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य जटिलताएं तथा ग्रामीण परिवेश की महिलाओ मैं गरीब गर्भावस्था के दौरान उपलब्ध विकल्पों से अनजान होना भी है. जाहिर तौर पर प्रसव संबंधी जरूरी बातों से महिलाओं को अवगत कराना चाहिए. ऐसे में जानना जरूरी है कि सिजेरियन डिलीवरी क्या है या कब जरूरी होता है, कौन सी बातें सामान्य प्रसव की संभावना को बढ़ाती है.

Healthy Delivery

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Pregnancy

यह वह प्रक्रिया है, जो बिना किसी शल्य चिकित्सा के होती है.  c-section को छोड़िए, एक स्वास्थ्य महिला को तो प्रसव पीड़ा के दौरान दर्दनिवारक की भी जरूरत नहीं होती.  यह बच्चे के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है. इसमें अस्पताल में कम रुकना पड़ता है, संक्रमण का खतरा कम होता है, सिजेरियन की तुलना मे रिकवरी तेज होती है. कम खर्च आता है. 7 से 10 दिन में शरीर में ऊर्जा का स्तर सामान्य हो जाता है.

जोखिम:

ऐसा नहीं है कि सामान्य प्रसव में कोई जोखिम नहीं होता. यह बेहद दर्द भरी प्रक्रिया है. जब तक प्रसव ना हो जाए, तब तक बहुत पीड़ा वा परेशानी उठानी पड़ती है. इसमें मां को प्रसव के पहले और दौरान कई समस्याएं आ सकती है जैसे- योनि क्षतिग्रस्त होना, योनि और गुदा के बीच के मुलायम उतको को नुकसान, गर्भनाल का पहले बाहर आना, यदि मां किसी संक्रमण से पीड़ित है, तो शिशु के संक्रमण की आशंका, फिटल डिस्ट्रेस यानी बच्चे को ऑक्सीजन की पूर्ति कम होना.

C-section delivery

सिजेरियन डिलीवरी को C-section delivery भी कहते हैं. इस प्रक्रिया में डॉक्टर योनि के बजाय मां के पेट और गर्भाशय में चीरा लगाकर शिशु को बाहर निकालते हैं. सिजेरियन योजनाबद्ध तरीके से की जाती है या आपातकालीन स्थितियों में वही आजकल कुछ महिलाएं अपनी इच्छा से सी-सेक्शन डिलीवरी को चुनती है, जिसे सी-सेक्शन ऑन मेट्रनल रिक्वेस्ट कहते है.

हालांकि, अधिकतर सी-सेक्शन डिलीवरी तब होती है. जब सामन्या डिलीवरी में मां या बच्चे या दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका हो. इसमें सामान्यतः जेनरल एनेस्थीसिया का प्रयोग नहीं होता, बल्कि स्पाइनल एनएसथीसिया दिया जाता है.

मां पूरी तरह से अचेत नहीं होती, लेकिन निचला भाग सुन हो जाता है. सिजेरियन में पेट के निचले हिस्से में सामान्यता 10 या 20 सेंटीमीटर तक कट लगाए जाते हैं.

कब जरूरी हो जाती है सीजेरियन डिलीवरी

अमूमन सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय कब लिया जाता है. जब बच्चा सिर के बल नहीं होता, टेड़ा या उल्टा होने पर. गर्भनाल, गर्भाशय के द्वार को ब्लॉक कर देती है. बच्चे का आकार इतना बड़ा होता है कि सामान्य प्रसव संभव नहीं होता. अचानक बच्चे की हृदय की धड़कन धीमी होने लगती है. प्रसव में विलंब हो, मां को हृदय रोग, उच्च रक्तदाब या डायबिटीज हो.

अगर ‘प्रिशियस बेबी’ हो, जो बड़ी उम्र में मां बनने वाली महिला की कोख में जन्म ले रहा है या किसी नवजात की मृत्यु के बाद जन्म ले रहा हो.

मां या डॉक्टर की सुविधा के लिए नहीं है सिजेरियन प्रक्रिया

भारत में पिछले 10 वर्षों में सिजेरियन के मामले 8.5% से बढ़कर 17.5% हो गए हैं. हमेशा इसका कारण मेडिकल नहीं होता. भारतीय शहरों में रहने वाली शिक्षित महिलाएं प्रसव पीड़ा से डरती है और अपने फिगर को खराब नहीं होने देना चाहती, इसलिए वे सिजेरियन डिलीवरी चुनती है.
आज आधुनिक सुख सुविधा ने हमें शारीरिक रूप से निष्क्रिय बना दिया है. महिलाएं घर के काम करने से भी कतराती है. उकड़ो बैठकर पूछा नहीं लगाने, कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करने, इंडिया के बजाय वेस्टर्न स्टाइल की टॉयलेट प्रयोग आदि से महिलाओं के पेलविक क्षेत्र की मांसपेशियां रिलेक्स नहीं होती.
वही कैरियर के चलते कई महिलाएं बड़ी उम्र में शादी करती है, जिस उम्र में पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियां कड़ी हो जाती है. और Healthy Delivery संभव नहीं हो पाती. मोटापा भी इसका बड़ा कारण है.

बचे सिजेरियन डिलीवरी | Healthy Delivery in Hindi

सिजेरियन डिलीवरी बड़ी सर्जरी है, इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. इसमें बच्चा मां की योनि में मौजूद सूक्ष्मजिवियो के संपर्क नहीं आता, जिससे उसकी आहार नाल में अच्छे सूक्ष्म जीव उतनी मात्रा में नहीं होते, जो पाचन में मदद करें, इम्यून तंत्र को विकसित होने दें और हानिकारक बैक्टीरिया से मुकाबला करें.

खास बाते 

सिजेरियन प्रक्रिया मां या डॉक्टर की सुविधा के लिए नहीं है. जागरूक बने. प्रसव पीड़ा से नहीं डरे, दवाएं मौजूद है. सामान्य प्रसव के लिए कोशिश करें. इससे मां को भी तसल्ली होती है|

Healthy Delivery के टिप्स

1. गर्भवती विशेषकर गर्भावस्था के दौरान खास ध्यान रखें ताकि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें.
2. गर्भावस्था और प्रसव के बारे में डॉक्टर से खुलकर चर्चा करें.
3. अनावश्यक तनाव ना पाले. प्रसन्न रहें.
4. सक्रिय रहे, तहले या हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें. ट्रेंड योगी टीचर की निगरानी में योग करें.
5. डिहाइड्रेशन और कब्ज से बचने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लेना जरूरी है. भरपूर पानी पिएं, ताकि यूरिनरी इनफेक्शन ना हो, जो गर्भअवस्था में आम है.
6. 7-8 घंटे की नींद ले. इसके अलावा दोपहर में अतिरिक्त नींद ले, ताकि शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहे.
7. पोषक और संतुलित भोजन का सेवन करें. कैलोरी का सेवन 200-300 बढ़ा दें. गर्भावस्था के दौरान अपना वजन हार्दिक ना बढ़ने दें.

C-section delivery के जोखिम

दवाओं के प्रति प्रतिकूल प्रतिक्रिया, भविष्य में होने वाली गर्भावस्था में जटिलताएं होना, घावों के संक्रमण व रक्त अधिक बहने की आशंका, बड़ी आंत या मलासाय को नुकसान पहुंचना, गर्भाशय की सबसे अंदरूनी परत में संक्रमण हो जाना, शिशु को सर्जरी के दौरान चोट लगने की आशंका और सांस लेने में कठिनाई, स्तनों में दर्द, पेशाब पास करने में दर्द होना.

रिकवरी पीरियड

आमतौर पर सिजेरियन डिलीवरी के पश्चात 4-6 हफ्ते तक आराम करने और कोई काम ना करने की सलाह दी जाती है. भारी सामान ना उठाएं, शारीरिक संबंध ना बनाए, जब तक डॉक्टर सलाह ना दें.

सिजेरियन डिलीवरी से बेहतर है Healthy Delivery

ज्यादा उम्र में मां बनने से सीजर के चांसेज ज्यादा जरूरी नहीं – पहला बेबी सीजर से हो, तो दूजा भी वही अभी के समय में सिजेरियन डिलीवरी अधिक होने की सबसे बड़ी वजह महिलाओं में पेन threshold यानी दर्द बर्दाश्त करने की क्षमता का कम होना है. ज्यादातर हाई क्लास लोग नॉर्मल डिलीवरी के लिए पेन नहीं लेना चाहते हैं.

जो पेशेंट सामान्य प्रसव के लिए अवेयर रहते हैं, हम उन्हें जरूर इनकी सलाह देते हैं, मगर सभी जरूरी जांच सामान्य होने पर. इसके अलावा पहले की अपेक्षा आज लोगों में मेडिकल डिसऑर्डर भी बड़े हैं.

पहले की महिलाएं अधिकतम 24:25 तक परिवार पूरा कर लेती थी, वहीं अब करियार, पढ़ाई, लेट मैरिज आदि कारणों से 30 की उम्र के बाद ही मां बनती है, जिस एज पीरियड में कई मेडिकल कॉम्प्लिकेशंस की शुरुआत होती है.

महिलाओं में धारणा है कि अगर पहला बच्चा ऑपरेशन से हुआ है तो दूसरी बार भी सर्जरी ही होगी?

कोई जरूरत नहीं है कि पहली बार सिजेरियन हुआ, तो दूसरी बार भी इसकी जरूरत होगी. कुछ ही कारणों मै रिपीट सिजेरियन की जरूरत पड़ती है, जिन्हें जांच में देखा जाता है, जैसे- पहले सिजेरियन के संकेत, पहली और दूसरी डिलीवरी में अंतराल, गर्भवती में पिछले ऑपरेशन के दौरान या तुरंत बाद कोई जटिलता जैसे- ब्लड ट्रांसफ्यूजन, फीवर आदि.
वहीं वर्तमान प्रेगनेंसी में बच्चे का वजन, तरल मात्रा, विकास आदि फैक्टस है, जो यह तय करने में मदद करते हैं कि प्रसव किस विधि से किया जाना चाहिए.

गर्भवतीयों के लिए किए जाने वाले वे कौन-से उपाय हैं, जो सामान्य प्रसव की संभावना को बढ़ाते हैं ?

प्रेगनेंसी के दौरान के जाने वाले कुछ सुरक्षित एक्सरसाइज है, जिसके लिए पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. जैसे- पलटी मार कर दोनों हाथों से दोनों घुटनों को पकड़े. जांघों को जमीन से स्पर्श कराते हुए आराम से उपर नीचे करें.गर्भस्थ शिशु का विकास, अल्ट्रासाउंड, सोनोग्राफी आदि रिपोर्ट्स सही हो, तो सामान्य प्रसव की संभावना रहती है.

स्वास्थ्य प्रसव के लिए कुछ अन्य सुझाव ?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती को सेव, चुकंदर, अनार, पालक, अंडा, पनीर आदि हेल्थी फ़ूड, साथी ही आयरन व कैल्शियम सप्लीमेंट निर्देशानुसार लेनी चाहिए. पर्याप्त आराम करना चाहिए. तनाव से बचे वा खुश रहें. रोज हल्के-फुल्के एक्सरसाइज करने से जोड़ लचीले रहते हैं, जिससे सामान्य प्रसव में मदद मिलती है.

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