Home Uncategorized ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) बनाएं बेबी को हेल्दी - breastfeeding in...

ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) बनाएं बेबी को हेल्दी – breastfeeding in Hindi

ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) – breast feeding in Hindi

नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध अमृत के समान माना गया है, क्योंकि यह शिशुओं को कई बीमारियों से बचाता है. मगर स्तनपान की सही जानकारी के अभाव में बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं. डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में करीब 40% वर्ष के बच्चे ही शुरुआती 6 महीने तक स्तनपान कर पाते हैं. वहीं 23% माताएं ही शिशु को जन्म के 1 घंटे के अंदर पहला जरूरी दूध पिला पाती है. समाज में स्तनपान के प्रति जागरूकता लाने के मकसद से अगस्त माह के प्रथम सप्ताह को पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है. 

ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) किया है – what is breastfeeding in Hindi

नवजात शिशु के लिए पहला भोजन मां का दूध होता है. इसमें नवजात शिशु को वे तमाम आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जिनकी उसे जरूरत होती है. जन्म के समय शिशु में ना तो इम्यूनिटी सिस्टम विकसित होता है और ना ही पाचन क्रिया को सक्रिय करने वाले बैक्टीरिया मौजूद होते हैं.

ऐसे में उसे मां के दूध से उचित मात्रा में फैट, शुगर, पानी, प्रोटीन आदि आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं. यह बच्चे के लिए एंटीबायोटिक का कार्य भी करता है. कई बार मां किसी कारणवश बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग ( स्तनपान ) नहीं करा पाती है. इस कारण बच्चा कुपोषित होता है और उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है. 

शिशु को जरूर दें कोलोंस्ट्रम ( मां का पहला पिला दूध ) 

शिशु के जन्म के बाद मां का पहला दूध शिशु का प्रथम भोजन होता है, जिसे कोलोस्ट्रम भी कहते हैं. यह थोड़ा चिपचिपा और गाढ़ा पीले रंग का होता है. इसमें इम्यूनो ग्लोबिन ए, लिंफोसाइट, लेक्टोफेरेन, सेक्रेटरी आईजीए, बाईफिडिस नामक प्रोटीन के अलावा प्लाजमा सेल्स से निर्मित एक विशेष प्रकार का प्रोटीन पाया जाता है.

इतना ही नहीं, इस दूध में विटामिन ए, डी, ई और के भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जिससे नवजात शिशु विभिन्न प्रकार के संक्रमण से तो बचाता ही है, साथ ही सभी उपयुक्त आहार भी प्राप्त करता है. नवजात शिशु को मां का दूध कई रोगों से सुरक्षित भी रखता है.

जन्म के तुरंत बाद मां का दूध बच्चे को दे देना चाहिए. इसे पीने से शिशु मानसिक रूप से भी जल्दी विकसित होता है और उसमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. यह दूध बच्चे के लिए सुपाच्य होता है और उसे पेट संबंधी समस्याओं से बचाता है. 

डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट मैं इस बात की पुष्टि हुई है कि जिन बच्चों को जन्म के तुरंत बाद और 6 माह से 1 साल तक मां का दूध मिलता है, उनमें हाइपरटेंशन और कार्डियो प्रॉब्लम की आशंका काफी कम देखने को मिलती है.

मां के लिए किस तरह फायदेमंद है ब्रेस्ट फीडिंग – maa ke liye kaise faydemand he breastfeeding 

breast_feeding
Breast_feeding

ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) कराने से ना सिर्फ नवजात शिशु को ही फायदा होता है, बल्कि यह मां के लिए भी काफी फायदेमंद है. चिकित्सक बताते हैं कि नवजात शिशु को दूध पिलाने के लिए मां को प्रतिदिन 500 कैलोरी खर्च करना होता है. इससे मां का बॉडी वेट कंट्रोल में रहता है.

मां के शरीर में जमा फैट भी दूध बंद कर बाहर निकलता है, आत: दूध पिलाने से मां के शरीर से फैट भी कम होता है. ब्रेस्टफीडिंग से मां को मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा कम होता है. ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) कराने से मां को भी कई बीमारी से बचाया जा सकता है. जैसे इससे टाइप टू डायबिटीज की आशंका काफी कम हो जाती है.

डब्ल्यूएचओ द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी कहा गया है कि जो मां 2 साल तक ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) कराती है, उससे उसमें बीमार होने की आशंका 30% तक कम हो जाती है. ब्रेस्ट फीड कराने से मां के ब्रेस्ट और युटेरस कैंसर की आशंका भी काफी कम हो जाती है क्योंकि ब्रेस्टफीडिंग कराते समय मां के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन खत्म होता है. इस हार्मोन की अधिकता ही शरीर में कैंसर को जन्म देती है.  

महिलाओं को किन बीमारियों से बचाता है ब्रेस्ट फीडिंग – mahilaon ko Kon Kon si bimariyon se bacahat he breastfeeding 

28% कम होता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा. 

50% कम होता है रूमेटॉयड अर्थराइटिस का खतरा. 

निरत्रण में रहता है फैट. 

कम होता है डायबिटीज का खतरा. 

ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं का डाइट

नवजात शिशु को ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को अपनी सेहत और डायट का विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता है, क्योंकि मां के मजबूत होने से ही बच्चे में भी मजबूती आएगी. ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली मां के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार बेहद जरूरी है.

ब्रेस्ट फीडिंग मैं सबसे ज्यादा फैट और कैल्शियम की खपत होती है. फैट तो प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में जमा हो जाता है, मगर कैल्शियम की को यदि उचित मात्रा में ना लिया जाए, तो मां के शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है और बाद में कैल्शियम की कमी से ऑस्टोपोरेसिस समेत कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है. 

इसलिए ब्रेस्टफीडिंग कराते समय कैल्शियम युक्त आहार को अपनी डाइट में अवश्य शामिल करें. ब्रेस्टफीड में प्रतिदिन 200 से 400 मिलीग्राम कैल्शियम खर्च हो जाता है. अतः मां को प्रतिदिन औसतन 1000 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए. 

कैल्शियम के लिए दही, केला, दूध, पनीर आदि का सेवन करें. इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रहे कि खाने में सभी विटामिंस और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में हो. इसके अलावा नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल ना करें.  

किया दूध पिलाने से फिगर खराब हो जाती है?

यह देखा गया है कि ब्रेस्ट फीडिंग के मामले में शहर की शिक्षित महिलाओं गांव की महिलाओं से पीछे है. ऐसा शहर की महिलाओं में एक गलत धारणा कारण है यह धारणा फिगर को लेकर है. वह सोचती है कि ब्रेस्ट फीडिंग कराने से उनका फिगर खराब हो जाएगा. जबकि होता वास्तव में उल्टा है. प्रेग्नेंसी के दौरान मां का वजन 12 किलो तक बढ़ता है. वजन बढ़ाने वाले फैट मां के दूध के साथ ही बाहर आता है. 

इससे उनका फिगर जल्दी सामान्य होता है. दूसरा कारण है सभी शहरी महिलाओं का कामकाजी होना. काम की व्यवस्था से वे बच्चे को अधिक समय नहीं दे पाती है. जबकि गांव में अधिकतर महिलाएं ग्रहनी होती है. इससे वे बच्चों को अधिक समय दे पाती है. गांव में जॉइंट फैमिली होने के कारण अक्सर बुजुर्ग महिलाएं भी स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करती है. इस कारण भी गांव की महिलाएं इस मामले में आगे हैं.  

स्तनपान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बच्चों को जैसी जरूरत होती है दूध उसी हिसाब से निकलता है. उसी हिसाब से मां का दूध भी बढ़ता जाता है. जबकि बाहर से दूध देने पर इसकी सही मात्रा का अनुमान लगाना मुश्किल है कि बच्चे को कितनी दूध की जरूरत है. मां के दूध में कई प्रकार के एंटीबॉडीज होते हैं.

इससे बच्चा रोगों से बचा रहता है. बच्चा यदि बीमार पड़ता है, तो वह दूध नहीं पीता है. इससे मां को उसके बीमार होने का पता पहले ही चल जाता है. जबकि बोतल में दूध पिलाने से क्रम में इसका पता देर से चलता है. आमतौर पर देखा जाता है की बोतल से दूध पिलाने में एक बार दूध पिलाने के बाद जब दोबारा दूध पिलाना होता है, तो उस बोतल को बिना धोए उससे ही दोबारा दूध पिला देती है.

ऐसा बार बार करने पर बोतल में कीटाणु पनप जाते हैं और इसके कारण भी बच्चे बीमार पड़ते हैं. यह समस्या आम तौर पर कामकाजी महिलाओं के साथ होती है. अतः कामकाजी महिलाओं को बिजी लाइक से थोड़ा समय अपने बच्चे के लिए भी निकालना चाहिए, ताकि बच्चा स्वस्थ रहे, हंसता खेलता रहे.

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान किया हो डाइट – breastfeeding main Kiya khana chahiye aur Kiya nahi 

मां बनने के बाद महिलाएं बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर फिक्रमंद तो रहती है, लेकिन डाइट को लेकर ओवेयर नहीं होती. पौष्टिक आहार के अभाव में मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है. यह जानकारी आपकी करेगी मदद. 

reastfeeding करने वाली महिलाओं के लिए डाइट का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि उनके द्वारा लिए गए डाइट का सीधा प्रभाव उनके शिशु पर पड़ता है. इसके लिए उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए. 


पेय पदार्थों का सेवन अधिक करें 


पर्याप्त मात्रा में पीने पानी पिए. जितना हो सके तरल पदार्थ का सेवन अधिक करें. खासकर ब्रेस्टफीडिंग कराने से पहले पौष्टिक पेय पदार्थ, जैसे- जूस, लस्सी, नारियल पानी आदि लेना चाहिए. फिर बच्चे को स्तनपान कराएं. 


संतुलित आहार ना सिर्फ महिलाओं के दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि उनके ऊर्जा भंडार को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है. ऐसे समय में उन्हें इसकी अधिक आवश्यकता होती है, क्योंकि उन्हें अपने बच्चे का ख्याल रखना होता है.

लों और हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम, विटामिन, आयरन और प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है. इसलिए उपयुक्त मात्रा में इसका सेवन सेवन करना चाहिए. ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां व अन्य किसी दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए. 

दि जरूरत हो, तो अपने चिकित्सक से पहले परामर्श करें, क्योंकि कुछ दवाइयां स्तनपान करने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकती है.

जन की मात्रा को थोड़ा बढ़ाएं 


यदि आप संतुलित भोजन ले रहे हैं, तो उसे थोड़ा-थोड़ा करके और बढ़ा दीजिए, यदि गर्भावस्था से पहले दो रोटी ले रही थी और गर्भावस्था में तीन, तो ब्रेस्टफीडिंग कराते समय 2.5 रोटी से कम ना लें. 

हार में दाल, फलिया, नट्स, हरे पत्ते वाली सब्जियां, मौसमी फल, दूध, दही और पनीर भी होने चाहिए. टमाटर और संतरे का प्रयोग अधिकाधिक करें. कुछ समुद्री मछलियां जैसे swordfish खाने से बचना चाहिए. 

कि इन में पारा अधिक होता है. ताजे पानी वाली मछलियां, जैसे- कताला और रेहू को चुने. इनमें पारा होने की आशंका कम होती है. अंकुरित आहार, जैसे- चना, बदाम आदि का सेवन सुबह दूध के साथ लेना काफी फायदेमंद है. 

पनाएं कुछ खास तरीके – breast feeding ke dauran diet barane ke liye apnaye kuch khas tarike 

1. ज्यादा मसालेदार और तला हुआ भोजन ना करें. घी और मिठाइयों के अधिक सेवन से बचे.
2. वजन कम होने से आप आस्वस्थ हो सकती हैं. इसका सीधा असर आपके बच्चे पर पड़ता है. 
3. फिटनेस को अपनी और अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्राथमिकता में रखें. 
4. कम वसा वाले उत्पादों जैसे- टोंड दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पादों को चुने. 
5. शराब के सेवन से बचें. यह आपके स्तन के दूध तक पहुंचकर बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है. 
6. डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पानी और अन्य स्वास्थ्य वर्धक पेय पदार्थों का सेवन करें. 
7. आपके द्वारा खाई जाने वाली कुछ चीजों से बच्चों को एलर्जी हो सकती है, अतः वैसे पदार्थ खाना छोड़ दे. 

महिलाओं द्वारा पूछे जाने वाले डॉक्टर से कुछ अहम सवाल और उनके जवाब  


Q1. अगर जन्म के तुरंत बाद किसी कारण मां का दूध शिशु को ना मिल पाए, तो क्या उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है? 

ns. जन्म के समय निकलने वाले कोलोस्ट्रम मैं एंटीबॉडीज होते हैं. नॉर्मल डिलीवरी में शिशु को आधे घंटे के अंदर दूध देना चाहिए, क्योंकि इस दौरान बच्चे के सर्वाइकल का खतरा होता है. इसे देने से बच्चे को रोग से लड़ने की क्षमता मिल जाती है. यदि या ना देकर शहद या दूसरी चीजें देते हैं, तो इंफेक्शन का खतरा होता है. हालांकि सिजेरियन डिलीवरी या अन्य कारण से तुरंत दूध देना संभव ना हो, तो 4 घंटे के अंदर दूध देना चाहिए. इसका भी शिशु को उतना ही लाभ मिलता है, जितना की और पहले देने पर. इससे गुणवत्ता कम नहीं होती है.

2. क्या गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से दूध की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव पड़ता है?

ns. गर्भनिरोधक गोलियों गोलियां बहुत ही सुरक्षित होती है. ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान इनके सेवन से दूध की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. हालांकि शिशु के जन्म के बाद पांच से छह महीने तक ब्रेस्ट फीडिंग के कारण ओव्यूलेशन बंद हो जाता है. इससे शुरू मैं गोलियों कि जरूरत नहीं पड़ती है. इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें. 

3. बच्चों को कितनी उम्र तक ब्रेस्ट फीडिंग कराना ( स्तनपान ) चाहिए?

ns. जन्म के पहले 6 महीने तो सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए. उसके बाद दो साल तक ठोस आहार के साथ इसे जारी रखना चाहिए. उसके बाद भी देने से कोई हानि नहीं है, लेकिन उसके बाद बंद कर देना ही बेहतर होता है.   

4. ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) दिन में कितनी बार करनी चाहिए? 

ns. हर दो-तीन घंटे के अंतराल पर ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) करानी चाहिए. दिन में 8 बार भी करा सकते हैं.

स्ट फीडिंग ( स्तनपान ) से संबंधित भ्रातियां और सच 

थक : डिलीवरी के बाद मां को लिक्विड कम मात्रा में लेना चाहिए.

च : शिशु के जन्म के बाद मां को अधिक मात्रा में लिक्विड लेना चाहिए, क्योंकि जितना अधिक लिक्विड लिया जाएगा, उतना ही अधिक दूध का

होगा.मिथक : डिलीवरी के 3 दिन बाद भी दूध पिलाना चाहिए 

च : यह धारणा बिल्कुल गलत है. बल्कि असलियत यह है कि जन्म के आधे घंटे के अंदर ही मां बच्चे को दूध पिला सकती है. जन्म के तुरंत बाद मां का पीला गाढ़ा दूध ही बच्चे को विभिन्न प्रकार के संक्रमण से बचाने में सहायक होता है. 

थक : पाउडर दूध मां के दूध के समान ही होता है 

च : मां के दूध से बढ़कर कोई भी वैकल्पिक चीज नवजात शिशु के लिए अच्छी नहीं है, क्योंकि मां के दूध में बच्चे के लिए पर्याप्त और प्रत्येक पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं, जबकि पाउडर दूध में सभी प्रकार के पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते. 

थक : बोतल के दूध से बच्चों को अच्छी नींद आती है 

च : वास्तविकता यह है कि बोतल का दूध पचने में अधिक समय लेता है, जिससे बच्चा ज्यादा देर तक सोता रहता है. 

थक : अगर शिशु बार-बार स्तनपान करना चाहता है, तो इसका अर्थ है कि वह भूखा है. 

च : मां का दूध आसानी से पच जाता है, इसलिए शिशुओं को जल्दी जल्दी भूख लग जाती है. शिशुओं को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान कराना चाहिए.

थक : मां का दूध बच्चे के लिए कम पड़ता है या इसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती 

च : मां का दूध बच्चे के भोजन के रूप में सबसे पौष्टिक है. ऐसा बहुत कम ही होता है, कि मां का दूध बच्चे के लिए कम पड़ जाए. 

थक : जन्म के 4 से 5 दिन के दौरान दूध कम बनता है 

च : जन्म के तुरंत बाद पर्याप्त मात्रा में विशेष दूध बनता है.  जिसे कोलेस्ट्रम कहते हैं. यह शिशु को बीमारी और अन्य खतरे से तो बचाता ही है, पेट भी स्वस्थ रखता है. 

थक : गर्मी में शिशु को पानी देने की जरूरत पड़ती है.

च : तापमान के अनुसार मां के दूध में पानी होता है. 6 महीने तक बच्चों को सिर्फ ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) कराएं.

थक : आधुनिक फीड फॉर्मूला मां के दूध के समान ही होता है

च : मां का दूध सभी पोषक तत्वों से भरपूर होता है. वैकल्पिक चीजों में एंटीबॉडीज, एंजाइम, पोषक तत्व नहीं होते हैं.

स्ट फीडिंग ( स्तनपान ) कराने के फायदे – breastfeeding ke fayde  

हले 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ बेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) कराएं. अन्य कुछ नहीं. 12 महीने के बाद पोषाक आहार के साथ ब्रेस्टफीडिंग ( स्तनपान ) जारी रखें.बच्चे के लिए ब्रेस्ट फीडिंग ( स्तनपान ) के फायदे – bacche ke liye breast feeding ke fayde
यदि बच्चा 4 महीने से अधिक बेस्ट फिटिंग करता है तो रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा 72% कम हो जाता है.
36% कम हो जाता है सदेन इंफेट डैथ सिंड्रोम का खतरा. 
23% कम हो जाता है कान का इन्फेक्शन. 
30% कम हो जाता है टाइप – 1 डायबिटीज का खतरा. 
20% घट जाता है aquet लिमफो साइटिक लीउकेमिया का खतरा. 

Health Expertshttps://othershealth.in
Health experts: आजकल की जीवनशैली ऐसी है की लोग विभीन्न तरह की बीमारियों से पीड़ित है और दवा लेते लेते थक चुके है। Othershealth.in के माध्यम से आप अच्छे से अच्छा घरेलू उपचार और चिकित्सा कर सकते है। हम Doctors and Experts की टीम है,जिसमे चिकित्सा विशेषज्ञ के द्वारा यह जानकारी दी गयी है की हम एक अच्छी और स्वस्थ जीवन कैसे जी सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

क्या हो आपकी आपकी हेल्दी डाइट – national nutrition week

national nutrition week - नेशनल न्यूट्रिशन वीक स्वस्थ रहने के लिए पोषक खुराक शरीर की पहली जरूरत है, जिसे...

प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के कारण, लक्षण व बचने के उपाय – premature delivery ...

कई बार अनेक कारणों से बच्चे का जन्म समय पूर्व हो जाता है. ऐसे शिशु को गर्भ...

हैपेटाइटिस : प्रकार, लक्षण, कारण, उपचार और दवा – hepatitis symptoms in Hindi

हैपेटाइटिस - hepatitis in hindiदुनिया में हर 12वां व्यक्ति हेपेटाइटिस से पीड़ित है. इसके पीड़ितों की संख्या कैंसर या एचआईवी पीड़ितों से भी...

थकान दूर कैसे करें और खुद को स्वस्थ कैसे रखे – How to relieve fatigue and keep yourself healthy

आज हर व्यक्ति अपने जीवन यापन के लिए दिन-रात कार्य में व्यस्त है. इस कार्य में उसके पास अपने लिए भी समय...