Home Yoga स्लिप डिस्क में करे भुजंगासन| Bhujangasana in Hindi |

स्लिप डिस्क में करे भुजंगासन| Bhujangasana in Hindi |

Bhujangasana – दफ्तर में काम करने घंटों कंप्यूटर पर काम करने वाले कई लोग आज स्लिप डिस्क की समस्या से जूझ रहे हैं. इसमें उन्हें भीषण पीठ दर्द उठता है, जो कई बार बर्दाश्त से बाहर हो जाता है. इस तकलीफ में योग विशेषज्ञ भुजंग आसन करने की सलाह देते हैं, जो काफी आराम पहुंचाता है. 

स्पाइनल कॉर्ड या रीढ़ की हड्डी पर शरीर का पूरा वजन टीका होता है. स्पाइनल कॉर्ड की हड्डियों के बीच कुशन जैसी मुलायम चीज होती है. यह डिस्क एक दूसरे से जुड़ी होती है. वर्टेब्रा के बिल्कुल बीच में स्थित होती है. 

डिस्क स्पाइन के लिए शॉक अब्जॉर्बर का काम करती है. वास्तव में डिस्क स्लिप नहीं होती, बल्कि स्पाइनल कॉर्ड के कुछ बाहर आ जाती है. इससे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बनता है. 

इस परेशानी के कई कारण हो सकते हैं |

  • गलत पोस्चर इसका आम कारण है. लेट कर या झुक कर पढ़ना या लगातार काम करना, कंप्यूटर पर काफी देर तक बैठे रहना. 
  • अनियमित दिनचर्या, अचानक झुकना, वजन उठाना, झटका लगने, गलत तरीके से उठने-बैठने की वजह से दर्द हो सकता है. 
  • सुस्त जीवनशैली, व्यायाम ना करना या पैदल ना चलने से भी मसल्स कमजोर हो जाते हैं. अत्यधिक थकान से भी स्पाइन पर जोड़ पड़ता है और एक सीमा के बाद समस्या शुरू हो जाती है. 
  • अत्यधिक शारीरक श्रम, गिरने, फिसलने, चोट लगना, देर तक ड्राइविंग करने से भी डिस्क पर प्रभाव पड़ता है.
  • उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होने लगती है और इससे डिस्क पर जोर पड़ने लगता है. 
Bhujangasana

इन उपायों से करे बचाव 

  • नियमित 3 से 6 किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चले. 
  • देर तक कुर्सी पर झुक कर ना बैठे, अगर डेस्क जॉब करते हैं तो ध्यान रखें कि कुर्सी आरामदेह और इसमें कमर को पूरा सपोर्ट मिले.
  • शारीरिक श्रम मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. लेकिन इतना भी परिश्रम ना करें कि शरीर को आघात पहुंचा. 
  • देर तक ना तो एक ही पोस्चर में खड़े रहे और ना एक स्थिति में बैठे रहे. 
  • किसी भी सामान को उठाने या रखने में जल्दबाजी ना करें. पानी भरी बाल्टी उठाने, अलमारी, भारी सूटकेस उठाते समय सावधानी बरतें. 

किया है समन्या लक्षण 

  • नसों पर दबाव के कारण कमर दर्द, पैरों में दर्द, एरि या पैर की उंगलियों का सुन हो जाना.
  • पैर के अंगूठे या पंजों में कमजोरी.
  • स्पाइनल कॉर्ड के बीच में दबाव पड़ने से कई बार हिप या थाईज के आसपास सुन्न महसूस करना.
  • रीढ़ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द. 
  • चलने-फिरने, झुकने में भी दर्द का अनुभव होना. कभी झुकने या खांसने या अचानक खड़े होने पर ऐसा लगे कि शरीर में करंट प्रवेश कर गया हो. झनझनाहट महसूस हो रहा हो.  
  • जिन लोगों को साइटिका या स्लिप डिस्क की तकलीफ है, वे भी इस आसन के लाभ उठा सकते हैं. लेकिन सावधानी के साथ. संस्कृत में भुजंग का अर्थ है सांप और यह आसन ऐसा है. जैसे सांप ने फन उठाया हो.  
  • भुजंगासनदफ्तर में काम करने घंटों कंप्यूटर पर काम करने वाले कई लोग आज स्लिप डिस्क की समस्या से जूझ रहे हैं इसमें उन्हें भी सन पीठ दर्द हो उठता है जो कई बार बर्दाश्त से बाहर हो जाता है इस तकलीफ में योग विशेषज्ञ भुजंग आसन करने की सलाह देते हैं जो काफी आराम पहुंचाता है  करने की विधि 
  • पेट के बल लेट जाएं और हाथों को जमीन पर कंधों के नीचे रखें अब सांस लेते हुए नाभि को जमीन पर ही रखते हुए छाती और सिर को ऊपर उठा उठाएं और और पीठ को कमान की तरह मेरे पूरे शरीर को इतना कि जितना संभव हो फिर धीरे-धीरे श्वास अंदर ले और छोड़ते हुए सिर को नीचे लाएं 

भुजंगासन के लाभ | Benefits of Bhujangasana |

पीठ की, उदर की और शरीर के ऊपरी भाग की मांसपेशियां मजबूत होती है. यह आसन रीढ़ तंत्रिका में हुए विस्थापन को ठीक करता है और सिंपैथेटिक नारियों को बल प्रदान करता है. किसी भी कारण से पेट दर्द में इस आसन से काफी लाभ होता है |

Bhujangasana करते समय किया सावधानी बरतनी चाहिए 

अगर आप पेप्टिक अल्सर, हर्निया या हायपर थायराइड से पीड़ित है, तो यह Bhujangasana ना करें. ध्यान रखें कि जब शरीर को पीछे की तरफ मोड़ते हैं, तो जोर का झटका ना लगे, क्योंकि इससे मांसपेशियों को सख्त चोट आ सकती है |

Health Expertshttps://othershealth.in
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