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स्वस्थ जीवन का आधार है जल नेति – jal neti in Hindi

जल नेति – jal neti in Hindi

आज तेजी से पेड़ों के कटने और वातावरण में प्रदूषण के बढ़ने से दमा, माइग्रेन आदि रोग देखने को मिल रहे हैं. अगर हम रोजाना आसानी से किए जाने वाले जल नेति क्रिया का अभ्यास करें, तो ना केवल रोगों से दूर रहेंगे, बल्कि जीवन सुंदर एवं स्वस्थ रहेगा.  

जल नेति किया है – what is jal neti in Hindi

आज के भागम भाग के दौर में जो मुख्य समस्याएं सामने आ रही है, वह है वातावरण में तेजी से बढ़ता प्रदूषण, शहरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती गाड़ियों की संख्या, पेड़ों का तेजी से कटना और औद्योगिककरण. इनके चलते लोगों में खासतौर पर बच्चों में कान, नाक और गले में होने वाली बीमारियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. परिणाम स्वरूप लोगों में एलर्जी की समस्या और इम्यून सिस्टम का कमजोर होना देखा जा रहा है. 

इसके अलावा जो लोग खदान में या कल कारखानों में काम करते हैं, उन्हें हर रोज मिट्टी धूल और वैशाली गैसों का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते अनचाहे रूप में इनके अंस सांस के जरिए उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.

नतीजन वैसे लोगों में प्रमुख रूप से साइनस, दमा, न्यूमोनिया, तपेदिक, टॉन्सिलाइटिस, मुंह से सांस लेने की आदत, आंखों में पानी, कानों का दोष, सुबह-सुबह लगातार छींक आना और मैग्रेन आदि समस्याएं देखने को मिलती है.

मेडिकल साइंस में इन लक्षणों को तत्कालीन रूप से कम करने की क्षमता तो है, किंतु स्थाई रूप से इन रोगों से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय जल नेती क्रिया ही है. जल नेति शष्टकरम के अंतर्गत किए जाने वाला अभ्यास है. यह एक अद्भुत एवं पूर्णता: सुरक्षित अभ्यास है, जो अपने प्रभाव से इन बीमारियों से मुक्ति दिला सकने में सक्षम है.

जलनेति की तैयारी : इसके लिए विशेष प्रकार के बने टोटी लगे लौटे मैं हल्का गर्म पानी ले और उसमें नमक की थोड़ी मात्रा डाल ले. 

जल नेति की विधि – jal neti karne ka tarika 

दोनों पैरों को फैलाकर सीधे खड़े हो और सामने की ओर झुके. सिर को थोड़ा पीछे करके एक और झुकाए. मुंह से सांस ले और छोड़ें. लोटे की टोटी को नासिका छिद्र में डालें. एकाग्रता बनाए रखें. पानी धीरे-धीरे दूसरे नासिका छिद्र से बाहर आने लगेगा. 

लोटा आधा खाली हो जाए तो सीधा खड़े हो जाएं. इस दौरान यदि नाक से थोड़ा कफ आए, तो धीरे से छिड़क कर बाहर निकाल दें. फिर इसी अभ्यास को दूसरी नासिका छिद्र से पूरा करें. अंत में दोनों नासिका को बारी-बारी से छिड़क दे. अब दोनों नासिका को एक साथ छिड़क दें.

जल नेति करने में कितना समय लगता है – jal neti karne main kitna samay lagta he  

अभ्यास में 8 से 10 मिनट का समय लगता है. इसे रोज एक बार जरूर करना चाहिए.

जल नेति का अभ्यास कब करना चाहिए – jal neti ka abhyas kab karna chahiye

जलनेति हमेशा आसन और प्राणायाम के पूर्व करना चाहिए. किंतु आवश्यकता पड़ने पर उसका अभ्यास कभी भी किया जा सकता है. हां भोजन के तुरंत बाद इस अभ्यास को ना करें. 

जल नेती का विशेष लाभ – jal neti ke labh

खास तौर से कल कारखाना या खदानों में काम करने वाले लोग जलनेति को नियमित करते हैं, तो इंटी से संबंधित तमाम बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है.

जल नेति करते समय किया सावधानी बरतनी चाहिए – jal neti karte samay Kiya savdhani baratni chahye

यदि नाक से खून आए या नासिका की संरचना में कोई अवरोध हो, तो अभ्यास से की पूर्व किसी योग विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी लें. जल नेती क्रिया का प्रारंभ कुशल योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए.

जल नेति के फायदे – jal neti ke fayde

जलनेति मुख्यता: सिर के अंदर वायु मार्ग को साफ करने की क्रिया है. यह योग की सरल एवं प्रभावशाली क्रिया है. इसे करने के फायदे अनेक है. यह दिमाग की कार्यक्षमता बड़ाती है तथा हमें एकाग्र बनाती है. यह सामान्य सिर दर्द, माइग्रेन, तनाव, दमा, मिर्गी आदि रोगों को दूर रखती है. आंखों की रोशनी भी बढ़ाती है. अगर चश्मा लगा भी हो, तो धीरे-धीरे उतर जाता है. सर्दी-जुकाम से निजात दिलाने में भी यह क्रिया बेहद लाभदायक है. 

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