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रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है इसे कैसे बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए – what is immunity power in Hindi

रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है – what is immunity power in Hindi

बहुत ही साधारण शब्दों में कहे, तो शरीर की रोग पैदा करने वाले हानिकारक कीटाणुओं को कोशिकाओं के अंदर प्रवेश ना करने देने की क्षमता को ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं.

रोग प्रतिरोधक क्षमता का काम किया है? – how Did immunity work? In Hindi

रोग प्रतिरोधक क्षमता का काम है रोगाणुओं से लड़ना और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए आवश्यक संतुलित पोषण. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाते हैं प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिंस जो हमें मिलते हैं उसका सतीत्व भोजन से जिसे प्रकृति ने हमें इसी उद्देश्य से प्रदान किया है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता कितने प्रकार की होती है – how many type of immunity power in Hindi

यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है. 

1. जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता. 

2. उपार्जित प्रतिरोधक क्षमता.

जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता : किसी भी जीव में जन्म के साथ से ही विद्यमान होती है जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता. 

उपार्जित प्रतिरोधक क्षमता : उपार्जित प्रतिरोधक क्षमता जन्म के बाद हासिल की जाती है। जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता के काम ना करने की स्थिति में उपार्जित रोग प्रतिरोधकता अपना काम करने लगती है.

उपार्जित प्रतिरोधक क्षमता भी दो प्रकार की होती है 

1. प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधक क्षमता.

2. किर्तिम उपार्जित रोग प्रतिरोधक क्षमता. 

प्राकृतिक उपार्जित प्रतिरोधक क्षमता भी दो प्रकार की होती है. 

1. पैसिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधक क्षमता.

2. एक्टिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधक क्षमता.

पैसिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधक क्षमता 

 गर्भावस्था के दौरान मां से भ्रूण में प्लेसेंटा के द्वारा स्थानांतरित की जाती है. इसमें मुख्यता आई जी का ट्रांसफर होता है और जन्म के तुरंत बाद के दूध में आईजी एंटीबॉडीज का ट्रांसफर होता है.

एक्टिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधक क्षमता :

 एक्टिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधक मैं रोग पैदा करने वाले किसी भी रोग कारक के संपर्क में आने के बाद शरीर में उसकी पैसिव किर्तीम उपार्जित प्रतिरोधकता एंटीबॉडी ट्रांसफर से प्राप्त की जाती है। जबकि एक्टिव कीर्तिम उपार्जित रोग प्रतिरोधकता प्राप्त करने के लिए वैक्सीन का सहारा लिया जाता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय – how to increase immunity power in Hindi


कोरोना वायरस से बचने के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे अपना रहे हैं. पर ऐसे नुस्खे अपनाने से शरीर की दिक्कतें भी बढ़ सकती है. मसलन 1 दिन में 2 दिन 3 बार से अधिक काड़ा पीने या गरम मसालों से बनी चाय पीने से पेट से संबंधित बीमारी भी हो सकती है.
ऐसे में किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श भी लेना जरूरी है. इस मामले में कब क्या करना चाहिए, इसके लिए आयुर्वेद, होम्योपैथी व एलोपैथ की प्रैक्टिस करने वाले कुछ चिकित्सकों से बात की गई है. प्रस्तुत है इनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश. 
रोज तीन बार से अधिक काड़ा पीना सही नहीं 
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आयुष मेडिकल ऑफिसर सुमित सर ने बताया कि आयुर्वेदिक काढ़ा शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए काफी लाभदायक है. पर दिन में 3 बार से अधिक काढ़ा पीने से पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती है. 
उन्होंने बताया कि 50 से 60 एमएल आयुष कवाथ दिन में 2 से 3 बार पिया जा सकता है. या फिर दालचीनी, तुलसी के पत्ते, सूखी अदरक, काली मिर्च को मिलाकर काढ़ा बनाया जा सकता है.
पर दालचीनी, अदरक के अधिक सेवन से पेट खराब हो सकता है. या शरीर में उष्णता बढ़ती जाती है. इससे त्वचा, पेट, छाती व गले में जलन हो सकती है. इसलिए दिन में दो से तीन बार काढ़ा को पिया जा सकता है.
इम्यूनिट के लिए लें गर्म पानी में नींबू का रस
डॉ सुर बताते हैं कि आजकल लोग कोरोना से बचने के लिए गर्म या गुनगुना पानी पी रहे हैं. पर इसके कई अन्य फायदे भी है. अगर आप मोटापे से परेशान हैं और इसे कम करना चाह रहे हैं, तो रोज सुबह एक गिलास गर्म पानी आपके लिए मददगार साबित होगा.
गर्म पानी से शरीर में जमा वसा खत्म हो जाती है. नतीजन आपका वजन कम होने लगता है. रोज सुबह गर्म पानी पीने से पाचन शक्ति भी दूरस्त होती है. जो खाना अच्छे से पहचाने या डाइजेस्ट करने में मददगार होगी और पूरी सेहत को सही बनाए रखेगी.
गरम पानी ब्लड सरकुलेशन को भी ठीक करता है. इतना ही नहीं गर्म पानी पीने से पूरे शरीर में फैले विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं. इस बदलते मौसम में हेल्दी बने रहने के लिए रोज सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में नींबू डालकर पिएं इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
अगर आपको कब्ज की शिकायत रहती है, तो भी गर्म पानी आपकी मदद करेगा. ऐसे में सुबह गर्म पानी पीना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. अगर छाती में जलन या जुकाम की शिकायत अक्सर रहती है, तो ऐसे में गर्म पानी दवा के रूप में काम करेगा. गर्म पानी पीने से आपका गला ठीक रहेगा और छाती को आराम मिलेगा.
धूप से कारोना पर असर नहीं 
नेताई चरण चक्रवर्ती होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पैथोलॉजी विभाग के डॉक्टर बताते हैं कि सुबह की धूप शरीर के लिए काफी फायदेमंद है. ऊष्मा का मुख्य स्रोत होने के कारण सूर्य की रोशनी ठंड से पूरे शरीर को गर्माहट देती है. जिससे शरीर के भीतर की ठंडक और पित्त की कमी दूर होती है. 
सुबह की धूप में विटामिन डी मौजूद होने पर ही शरीर कैल्शियम का अवशोषण कर पाता है. पर दिन भर धूप में खड़े होने से सनबर्न हो सकता है. त्वचा की अन्य समस्याएं हो सकती है. इस मौसम में प्रोटीन की अधिक जरूरत है. हरी सब्जी, पालक, टमाटर, गाजर, अंडा, दूध आदि का सेवन करना जरूरी है. शाकाहारी लोग छेना भी खा सकते हैं. 
सही है गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करना 
इस विषय में डॉक्टर विश्वजीत घोष आयुष मेडिकल ऑफिसर बताते हैं की करो ना काल में गले के दर्द से लोग परेशान हो जा रहे हैं. इससे निजात पाने के लिए नमक के पानी से गरारे करना काफी जरूरी है.
नमक के पानी से गरारे करना गले के दर्द या फिर खराश के लिए काफी कारगर साबित होता है. एक गिलास गर्म पानी में नमक मिलाकर पांच से छह बार गरारे करें. रात को ऐसा करने से आप चैन से सो सकते हैं. क्योंकि ऐसा करने से गले की खराश आपको परेशान नहीं करेगी. नमक के पानी से गरारे करने से गले की सूजन से राहत मिलेगी और मुंह के बैक्टीरिया खत्म होंगे. 
Immunity को बढ़ाने में कारगर है गिलोय 
डॉक्टर घोष के अनुसार शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाने में गिलोय काफी कारगर है. यह आपको कई रोगों से लड़ने की क्षमता देता है. Corona से बचने के लिए आपके भीतर मजबूत इम्यूनिटी का होना जरूरी है.
इसलिए जरूरी है कि रोजाना आप निश्चित मात्रा में गिलोय का सेवन करें. गिलोय के जूस का नियमित सेवन करने से बुखार, फ्लू, डेंगू, मलेरिया, पेट में कीड़े होने की समस्या, रक्त में खराबी, लो ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी, टीवी पेट के रोग, डायबिटीज और त्वचा संबंधी बीमारियों से राहत मिल सकती है. गिलोय से भूख भी बढ़ती है. गिलोय के टेबलेट, रस व चूर्ण बाजार में उपलब्ध है. टेबलेट या रस को लगातार एक महीने तक लिया जा सकता है. 
किया कहते हैं एलोपैथी चिकित्सक 
कोलकाता स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के डॉक्टर मानव कुमार घोष व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राज्य अध्यक्ष डॉक्टर आरबी दुबे बताते हैं कि दवा जब तक उपलब्ध ना हो जाए, तब तक बचाव ही एक मात्र इलाज है. डॉक्टर को उसके अनुसार गले में दर्द व खराश को दूर करने के लिए गर्म पानी में बेटाडिन से कुल्ला किया जा सकता है.  
डॉक्टर दुबे के अनुसार बचाव के लिए आयुर्वेदिक उपायओ को अपनाया जा सकता है. गिलोय काफी फायदेमंद है. इसके अलावा गरम पानी पी सकते हैं. बाहर से आने के बाद हल्का गर्म पानी से स्नान भी किया जा सकता है. हल्का गर्म पानी से नाक की सफाई करें. व कुल्ला जरूर करें.   
अपने हिसाब से ना करें आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट 
करवाना के संक्रमण से बचाव के लिए हर कोई अपने हिसाब से काढ़ा बनाकर सेवन कर रहा है. लेकिन खुद से आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट ना करें, क्योंकि आयुर्वेदिक औषधि में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उचित मात्रा की है. 
अधिक मात्रा में किसी भी चीज को लेना हितकारी नहीं होता, चाहे वह भोजन ही क्यों ना हो, यह बातें नाड़ी वैद्य डीके शर्मा ने कही. उन्होंने बताया कि corona काल में रोग से बचाव के लिए सबसे अधिक जरूरी इम्यूनिटी को बढ़ाना है. 
सबसे पहले कोशिश या होनी चाहिए कि शरीर व खासकर फेफड़ों को मजबूत कैसे बनाए रखा जाए. सर्दी, खांसी या यूं कहें कि कफ के दुष्प्रभाव से बचने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता है. 
बिना उचित मात्रा में कड़ा अपने हिसाब से ना लें, क्योंकि सभी व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग-अलग होती है. ऐसे में अधिक मात्रा हो जाने पर परेशानी हो सकती है. अगर उचित गाइडलाइन ना हो, तो ऐसे में दो गिलास पानी के लिए एक लॉन्ग, चार चुटकी हल्दी, चार चुटकी जीरा, व दो चुटकी सौंफ मिलाकर 10 से 15 मिनट तक उबालें लें और चाय के कप की साइज में चार व्यक्ति सुबह और शाम लें.
उपलब्धता के आधार पर आप इसमें गिलोय एक टुकड़े मिला सकते हैं. इसके अलावा तुलसी के चार पांच पत्ते, नीम के 4 पत्ते भी मिला सकते हैं. शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए योग व व्यायाम कारगर हो सकता है. योगा या व्यायाम की जानकारी के अभाव में आप सिर्फ रस्सी कूदकर भी अपनी शारीरिक क्षमता को बढ़ाएं रख सकते हैं.   गर्म पानी के बजाय गुनगुना पानी अधिक लाभदायक 
किसी भी ट्रीटमेंट को शुरू करने के पहले उसकी सही मात्रा और उससे होने वाले फायदे व नुकसान के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि हर चीज की अपनी तासीर होती है और हर व्यक्ति की भी अपनी एक तासीर होती है. 
ऐसे में दोनों के बीच सही संतुलन स्वास्थ्य रहने या स्वास्थ्य होने की दिशा में सबसे बड़ी जरूरत मानी जाती है. अधिक गर्म पानी पीने की बजाय गुनगुने पानी को पीना ज्यादा लाभदायक है. यह बातें वैध सुभाष शर्मा ने कही.
उन्होंने बताया कि ठंडा पानी जहां कफ वृद्धि कारक है, तो वह अधिक गर्म पानी पीना अल्सर को बढ़ावा दे सकता है. काड़ा में आयुर्वेदिक घटक की मात्रा भी बहुत सोच समझकर इस्तेमाल की जानी चाहिए, जो व्यक्ति काड़ा ले रहा है. वह किस प्रकार की जलवायु में रह रहा है. उसकी शरीर की अपनी तासीर क्या है. यह सब कुछ मसालों के सेवन और मात्रा के लिए जरूरी है. 
अगर अधिक गर्म प्रदेश हो, तो गरम पदार्थों का प्रयोग कम ही करें तो अच्छा है. शरीर में उष्णता अधिक है, तो अधिक मात्रा में गर्म मसालों का सेवन परेशानी को बढ़ा भी सकती है. मौसम्मी, संतरा, हल्के गर्म पानी में नींबू का उपयोग वात, पित्त और कफ को कंट्रोल करने में सहायक है.  
मगर याद रहे कि बाहर और शरीर के अंदर तापमान में बैलेंस होना बहुत जरूरी है. संतुलित खानपान पर ध्यान रखा जाए, तो बहुत अच्छा है. भारी भोजन लेने की बजाय स्वस्थ भोजन लेना ज्यादा लाभदायक है. सुबह 6:00 से लेकर 8:00 बजे तक ही धूप लेना अच्छा है. इसके बाद यह फायदे की बजाय नुकसान करती है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ 

आज हम बात करेंगे उन्हें खाद पदार्थों की जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करने में सहायक है। प्रकृति के प्राणी मात्र के कल्याण के लिए विभिन्न प्रकार की अमूल्य खाद पदार्थ उपलब्ध करा रखी है. आवश्यकता है सिर्फ उनके बारे में जानने की और उचित प्रयोग की।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में तो इस विषय के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है, लेकिन यहां पर पाठकों की जानकारी के लिए संक्षेप में कुछ गुण बताए जा रहे हैं।

नीम : नीम एक सहज सुलभ प्राकृतिक औषधि है, जो एंटीसेप्टिक और antibiotic है। नीम मलेरिया का भी औषधि है। नीम चर्म रोग में भी कारगर होती है। यह गले सड़े घाव में औषधि के रूप में काम आती है। नीम से गर्भ निरोधक औषधियां भी तैयार होने लगी है और भी विभिन्न प्रकार के रोगों में इसकी औषधियों का प्रयोग होता है। 

तुलसी : तुलसी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला पौधा है। यह सभी प्रकार के बुखार एवं खांसी की दवा के काम आती है। यह अन्य कई प्रकार के रोगों में भी काम आती है। तुलसी में जबरदस्त प्रतिरोधक क्षमता है.

नींबू : नींबू भी भरपूर रोग प्रतिरोधक क्षमता रखता है. इसका नियमित प्रयोग सभी प्रकार के संक्रमण रोगों से बचाव करता है. नींबू पेट एवं त्वचा की विभिन्न बीमारियों में प्रयोग होता है. मोटापा कम करने की अचूक औषधि है. 

आंवला : आंवला एक बहू आयामी औषधि है, जो विटामिन सी का भरपूर खजाना होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता का खजाना भी है। अनेक रोगों में इसकी प्रयोग किया जाता है। इसका स्वादिष्ट मुरब्बा स्वास्थ्य के लिए रामबाण है।

हल्दी : हल्दी को सूजन कम करने की विशेषता के कारण ओस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए सदियों से उपयोग किया जा रहा है। आप सभी अब जान चुके हैं कि हल्दी के अंदर पाए जाने वाला करक्यूमिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करने में सर्वोपरि है और यह एंटीवायरल भी है.

लहसुन : इसके अंदर पाया जाने वाला सल्फर युक्त कंपाउंड एलीसिन कमाल का है. इसी के कारण आयुर्वेद में लहसुन को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला बताया गया है. 

अदरक : अदरक में पाया जाने वाला जिंजीरोल ही इसकी जान है. तीखा जरूर है मगर है बहुत कमाल का। गले की खींच खींच मिनटों में दूर करता है। इन्फ्लेमेशन का काम करता है और कोलेस्ट्रॉल भी कम करता है.

नींबू वर्गीय फल : नींबू वर्गीय फल में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यह विटामिन से ही हमें रोगों से लड़ने की अनोखी शक्ति प्रदान करता है. विटामिन सी श्वेत रक्त कणिकाओं से बनने में सहायक होता है और यह श्वेत रक्त कणिकाएं ही रोगाणुओं से लड़कर हमें रोग से बचाती है. फलों में चकोतरा, संतरा,औ नींबू, मुसम्मी आदि प्रमुख हैं.   

पपीता : पपीता भी विटामिन सी का अच्छा स्रोत है. इसके अलावा पपीते में पेपन होता है, जो डाइजेस्टिव एंजाइम है  और anti-inflammatory है.

कीवी फल : कीवी में भी विटामिन सी के अलावा फोलिक एसिड, पोटेशियम, विटामिन के और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कारगर है. 

ब्लूबेरी : ब्लूबेरी में एंथोसाइएनिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो एंटीऑक्सीडेंट होता है और स्वसन तंत्र के इम्यून डिफेंस सिस्टम को मजबूत बनाता है.

बादाम : प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन ई का बेहतरीन स्रोत। क्योंकि विटामिन ई वसा में घुलनशील विटामिन है, इसलिए बदाम के साथ भी प्रयोग विटामिन ई के अवशोषण को काफी हद तक बढ़ा देता है. 

सूरजमुखी के बीज : इसमें फास्फोरस और मैग्नीशियम के अलावा विटामिन बी सिक्स और विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है, जिनके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में यह बहुत अच्छी भूमिका निभाते हैं.

योग्रट : एक दिन हमने पहले भी बताया था कि इसके अंदर प्रोबायोटिक होते हैं. अथार्थ ऐशे लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, जो अपनी संख्या बढ़ाकर रोग पैदा करने वाले रोगाणुओं के लिए समस्या पैदा कर देते हैं और उन्हें पनपने नहीं देते हैं. योगर्ट का नियमित सेवन प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखता है.   

डार्क चॉकलेट : डार्क चॉकलेट में पाया जाने वाला थियोब्रोमिन शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाकर शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

शिमला मिर्च : शिमला मिर्च में संतरे के मुकाबले में 3 गुना विटामिन सी पाया जाता है। इसके अलावा इसमें beta-carotene भी भरपूर होता है, जो हमारे शरीर में जाकर विटामिन ए में बदल दिया जाता है। विटामिन ए हमारी आंखों की ज्योति के लिए भी परम आवश्यक है.

ब्रोकली : इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई के अलावा रेशा भी खूब होता है। बस आपको करना इतना है कि इसे या तो कच्चा ही खाइए या कम से कम पकाई या फिर भाप में पकाएं.

पालक : पालक में ना केवल विटामिन सी और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, बल्कि इसके अंदर आसंख्या एंटीऑक्सीडेंट और beta-carotene भी पाया जाता है और यह सभी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करने में सहायक है.

शकरकंद : शकरकंद में beta-carotene पाया जाता है, जो शरीर में जाकर विटामिन ए में बदल जाता है और शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है.

उपरोक्त 19 खाद्य पदार्थों के अलावा कुछ जड़ी बूटियां भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करती है, जैसे गिलोय और कालमेघ। इनका जिक्र किसी अन्य पोस्ट में करेंगे और हां हमेशा की तरह गौ माता से बेहतरीन सुरक्षा कौन प्रदान कर सकता है।

पंचामृत का सेवन आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेगा. इसलिए गाय के दूध, गाय के दूध की दही, गाय के दूध से बना घी, शहद और नारियल पानी से बने पंचामृत का नियमित सेवन करें.

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Health experts: आजकल की जीवनशैली ऐसी है की लोग विभीन्न तरह की बीमारियों से पीड़ित है और दवा लेते लेते थक चुके है। Othershealth.in के माध्यम से आप अच्छे से अच्छा घरेलू उपचार और चिकित्सा कर सकते है। हम Doctors and Experts की टीम है,जिसमे चिकित्सा विशेषज्ञ के द्वारा यह जानकारी दी गयी है की हम एक अच्छी और स्वस्थ जीवन कैसे जी सकते हैं।

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