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मोटापा दूर भगाएं बेरियाट्रिक सर्जरी – bariatric surgery in Hindi

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9 डॉक्टरों से पूछे जाने वाले कुछ अहम सवाल

बेरियाट्रिक सर्जरी – bariatric surgery in Hindi


मोटापा कम करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. कुछ दवाइयां लेते हैं, तो कुछ कसरत में पसीना बहाते हैं. मगर आज चिकित्सा तकनीकी में विकास में बेरियाट्रिक सर्जरी का हमें तोहफा दिया है.
यह तकनीक मोटापे की वजह को ही जड़ से खत्म कर देती है. ऐसी अत्याधुनिक तकनीक से लोगों का जीवन सुखमय बनाने वाले तमाम चिकित्सकों को हम डॉक्टर्स डे पर विशेष आभार प्रकट करते हैं. दिल्ली व मुंबई के प्रतिष्ठित बेरियाट्रिक सर्जन इस तकनीक पर दे रहे हैं विशेष जानकारी. 
कई लोगो को जीवनशैली बदलने के बावजूद मोटापे से छुटकारा नहीं मिल पाता. ऐसे लोगों के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी बेहतर विकल्प के तौर पर उभर कर सामने आई है. शहरों में इस सर्जरी की मदद से मोटापे से छुटकारा पाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. 
सर्जरी के 6 माह के अंदर ही वजन 60 किलो तक घट जाता है. इसका साइड इफेक्ट भी नाम मात्र का है. यही नहीं, यह सर्जरी डायबिटीज, जॉइंट पेन, हार्ट प्रॉब्लम, हाई बीपी आदि बीमारियों में भी काफी फायदेमंद है. 


क्या है बेरियाट्रिक सर्जरी – what is bariatric surgery in Hindi


इस सर्जरी की मदद से आमाशय का आकार बदला जाता है. ताकि व्यक्ति कम मात्रा में भोजन ग्रहण करें और ज्यादा फैट शरीर में जमा ना हो. सर्जरी तीन प्रकार की होती है. तीनों सर्जरी की प्रक्रिया अलग अलग है और तीनों का मोड ऑफ एक्शन भी अलग-अलग है.
मोटापे के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य सर्जरी के मुकाबले बेरियाट्रिक सर्जरी का रिजल्ट लोंग लास्टिंग है. मोटे तौर पर मोटापे को जड़ से खत्म करने की तकनीक है बेरियाट्रिक सर्जरी. 


सर्जरी कितने प्रकार की होती है – how many type of bariatric surgery in Hindi


सर्जरी के 3 मुख्य प्रकार होते है .


लैंप बैंड सर्जरी – lap band surgery in Hindi


इसमें आमाशय के ऊपरी हिस्से पर बैंड लगाया जाता है. जिससे आमाशय का छोटा सा हिस्सा बैंड के ऊपर और बड़ा हिस्सा बैंड के नीचे रहता है. खाना खाने के बाद खाना बैंड के ऊपरी हिस्से में जाता है. वह हिस्सा भर जाने पर व्यक्ति की भूख खत्म हो जाती है. 
इससे व्यक्ति कम खाता है और शरीर को एनर्जी रुके हुए फैट से पूरी करनी करनी पड़ती है. इस सर्जरी का रिजल्ट लोंग लास्टिंग होता है. रिजल्ट भी 2 वर्षों में नजर आता है. डेढ़ से 2 साल में व्यक्ति 60 से 65 किलो तक वजन घटा सकता है. 
इसमें पेट में कोई कट नहीं लगाया जाता है. मरीज को अस्पताल में 1 दिन रुकना पड़ता है. परेशानी होने पर बैंड दोबारा एडजस्ट किया जा सकता है. 


स्लीव गास्ट्रिकटोमी सर्जरी – sleeve gastrectomy surgery in Hindi


यह सर्जरी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से होती है. इसमें व्यक्ति के आमाशय का लगभग 80% हिस्सा हटा दिया जाता है और केले के आकार का एक टेबुलर हिस्सा छोड़ दिया जाता है. छोटा पेट होने से सर्जरी के बाद ही व्यक्ति का वजन कम हो जाता है. 
व्यक्ति खाना भी कम खाता है. इसमें वजन सर्जरी के तुरंत बाद से ही कम होना शुरू हो जाता है. हर हफ्ते 1.5 से 2 किलो वजन कम होता है. सर्जरी के डेढ़ साल बाद वजन 80 से 50 फ़ीसदी तक कम हो जाता है.

स्ट्रिक बायपास सर्जरी – gastric bypass surgery in Hindi


यह सर्जरी सबसे कामन है इसमें आमाशय में एक पंच लगाकर उसे दो हिस्सों में बांटा जाता है और छोटे हिस्से को सीधे छोटी आंखों से जोड़ा जाता है. इससे पेट कम भोजन ग्रहण कर पाता है और कैलरी भी कम ही ली जाती है.  
भोजन से मिलने वाली कैलरी छोटी आंत में चली जाती है. यह सर्जरी लंबे समय तक कामयाब रहती है. मरीज की रिकवरी भी जल्दी होती है. सर्जरी के बाद मोटापा तेजी से घटने लगता है. हालांकि इसमें अस्पताल में काफी दिनों तक स्टे करना पड़ता है.  


बेरियाट्रिक सर्जरी के फायदे – bariatric surgery benefits in Hindi


सर्जरी के बाद डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सर्जरी के तुरंत बाद डाइजेशन में प्रॉब्लम हो सकती है इसलिए हल्का और पौष्टिक आहार ही लेना चाहिए. ऐसे में लिक्विड लेना फायदेमंद रहेगा. सर्जरी के 1 साल बाद तक चिकित्सक की सलाह पर ही अपनी दिनचर्या बनाएं. विदेशों के मुकाबले अब भारत में भी बायोटिक सर्जरी की समुचित व्यवस्था है. इस सर्जरी के लिए कुछ प्रमुख संस्थान है- मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली, बीएलके हॉस्पिटल दिल्ली. केआईएमएस हैदराबाद.  


बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद कम हो जाती है भूख


बेरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन देखने को मिलते हैं. सर्जरी कराने के बाद व्यक्ति के खाने की क्षमता कम हो जाती है. खाना भी देर से पचता है. इसलिए रोगी को सर्जरी के तुरंत बाद कुछ समय तक लाइट फूड लेना चाहिए.
सर्जरी के दौरान भूख जगाने वाली ग्रेहलिन नामक हार्मोन भी बनना बंद हो जाता है या फिर बहुत कम बनता है. इससे व्यक्ति को भूख बहुत कम लगती है और शरीर में जमा फैट एनर्जी के रूप में इस्तेमाल होता है. इससे बॉडी स्लिम होने लगती है. सर्जरी के बाद सही डाइट नहीं लेने से विटामिन, मिनरल्स की कमी हो सकती है.


डॉक्टरों से पूछे जाने वाले कुछ अहम सवाल


Q1. वजन किन कारणों से बढ़ता है? 


वजन बढ़ने के कई कारण होते हैं, जिनमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, अधिक कैलरी युक्त भोजन, अधिक अल्कोहल का सेवन, व्यायाम की कमी, अधिक तनाव, नींद की कमी, जैसे कुछ दवाइयां आदि शामिल है. वजन वृद्धि के लिए किसी खास कारण को जिम्मेदार बता मुमकिन नहीं है. 


Q2. क्या बेरियाट्रिक सर्जरी हर कोई करा सकता है 


वैसे मरीज जिनका बीएमआई 32.5 यानी जिनके शरीर में 20 से 25 किलो अतिरिक्त वजन हो, वे यह सर्जरी करा सकते है. 

Q3. क्या आनुवंशिक रूप से मोटे लोगों में भी बेरियाट्रिक सर्जरी कारगर है 

ल्कुल, अनेक मरीजों के परिवार में मोटापे का प्रचलन होता है और उन सभी को इस सर्जरी से फायदा हुआ है.

Q4. बेरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद क्या व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है

ल्कुल जी सकता है. सर्जरी के 5 से 6 दिन बाद ही कोई भी व्यक्ति ऑफिस जा सकता है और 2 से 3 दिन बाद ही ड्राइव भी कर सकता है. अधिकतर विदेशी मरीज सर्जरी के 1 सप्ताह बाद ही 10 से 16 घंटे की यात्रा भी करते हैं. 

Q5. बेरियाट्रिक सर्जरी पर कितना खर्चा आता है  

र्जरी का खर्च चुनी गई प्रक्रिया पर निर्भर है. इन प्रक्रियाओं का खर्चा अलग अलग है, जो डेढ़ लाख से शुरू होता है और करीब सात 7.50 लाख के आसपास तक पहुंच जाता है. 

Q6. बेरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद गर्भधारण में कोई समस्या भी आती है? 

र्जरी के बाद 1 साल तक गर्भ धारण नहीं करना चाहिए. 1 साल बाद गर्भधारण करने भ्रूण के स्वास्थ्य और विकास को कोई जोखिम नहीं होता है.

7. किन रोगों से ग्रस्त मरीजों को बायोटिक सर्जरी नहीं करानी चाहिए? 

स्थाई हृदय समस्या और मानसिक रूप से अस्थिर लोग यह सर्जरी ना कराएं.

कहता है आपका बीएमआई 

MI यानी बॉडी मास इंडेक्स या बताता है कि शरीर का भार उसकी लंबाई के अनुपात में ठीक है या नहीं. उदाहरण के लिए भारतीयों के लिए उनका बीएमआई 22.1 से ज्यादा नहीं होना चाहिए. व्यस्क व्यक्ति के शरीर का अपेक्षित भार उसकी लंबाई के अनुसार होनी चाहिए.
जिससे उसके शरीर का ढांचा ठीक लगे. बीएमआई को किसी व्यक्ति को दोगुना कर उसमें भार किलोग्राम से भाग देकर निकाला जाता है. यानी बॉडी मास इंडेक्स जाने का फार्मूला है वजन लंबाई. एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए who ने 25 और भारत सरकार ने 23 बीएमआई तय किया है.
अगर आपका बीएमआई 23 या इससे काम है तो आप फिट है. 23 से 25 ओवरवेट. 25 से 30 मोटे. 30 से ज्यादा – बहुत मोटे की श्रेणी में आते हैं. 


लिपोसक्शन और बेरियाट्रिक सर्जरी में किया अंतर है

इपोसक्शन और बेरियाट्रिक सर्जरी दोनों ही मोटापे को कम करने की तकनीक है. लाइपोसक्शन में जहां शरीर के विभिन्न हिस्सों में फ्लैट निकाला जाता है, वही बेरिएट्रिक सर्जरी में आमाशय को कम किया जाता है. लाइपोसक्शन मोटापे से छुटकारा कर स्थाई इलाज नहीं है, जबकि बेरियाट्रिक सर्जरी को स्थाई इलाज माना जाता है.
लाइपोसक्शन में सक्शन मशीन हो कैनुला से जोड़ा जाता है. जिस स्थान से फैट निकालना होता है, वहां छोटे-छोट छिद्र बनाए जाते हैं. इसके बाद मांसपेशियों और स्किन के बीच से सेक्शन द्वारा फैट को बाहर निकाला जाता है.
इस सर्जरी में मरीज को कोई टांका नहीं लगाया जाता. छोटे छिद्र भी कुछ दिनों में खुद ब खुद भर जाते हैं. सर्जरी का रिजल्ट मिलने मैं भी समय लगता है. बताए गए परहेज और दिनचर्या अपनाने से मनचाहा आकार पा सकते हैं.
लाइपोसक्शन सर्जरी में बेरियाट्रिक सर्जरी के मुकाबले ज्यादा खर्च नहीं आता. इसमें 70 से 75 हजार खर्च होते हैं. वैसे यदि ज्यादा फैट निकालना हो, तो खर्च भी बढ़ सकता है.  

गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी 


1. सर्जरी में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है. 
 2. तीन से पाच दिन अस्पताल में रुकना पड़ता है. 
 3. रिकवरी में 3 महीना लगता है. वजन सबसे तेजी से कम होता है. 


लैंप बैंड सर्जरी 


1. सर्जरी में 1 घंटे से भी कम वक्त लगता है. 
2. एक रात या सर्जरी के तुरंत बाद भी घर लौट सकते हैं. 
3. रिकवरी में 10 दिन लगते हैं. इसमें वजन देर से कम होता है. 


स्लीव गस्ट्रिकटोमी 


1. सर्जरी में लगभग 1 घंटे का समय लगता है. 
2. दो से 3 दिन अस्पताल में रुकना पड़ता है. 
3.रिकवरी में लगभग 1 महीना लगता है इस सर्जरी में वजन नियंत्रण कम होता है. 

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