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मयूरासन करने की विधि और इससे होने वाले अद्भुत फायदे – mayur Asana steps and awesome benefits – othershealth

Mayur Asana
Mayur Asana

Mayur Asana

जिस प्रकार मयूर सब प्रकार के कीड़े-मकोड़े, यहां तक के विषैले सर्प को भी खा लेते हैं, उसी तरह mayur Asana के अभ्यास से शरीर के सभी विश युक्त विकार बाहर निकल जाते हैं, और पाचन शक्ति अत्यधिक सक्रिय हो जाती है. मयूरासन, योगासन की उच्च श्रेणी में है और इसका प्रसिद्ध योग शास्त्रों में उल्लेख मिलता है.

मयूर संस्कृत शब्द है और पंख फैलाते हुए मयूर पक्षी के समान mayur Asana की अंतिम तिथि है. दोनों पैर मयूर पक्षी की पूंछ और सिर, उसके सिर सडर्स हो जाते हैं तथा हाथों की स्थिति उसके दोनों पैरों और पंजे के समान हो जाते हैं.

 Mayur Asana करने की विधि 

जमीन पर घुटनों को मोड़ कर बैठे. दोनों पैरों को एक साथ रखें और घुटनों को एक दूसरे से अलग रखें. शरीर की स्थिति सिंहासन के समान रहेगी. सामने की ओर झुके और दोनों हथेलियों को घुटनों को मध्य जमीन पर इस प्रकार रखें कि उंगलियों के अग्रभाग पीछे पैरों की तरह उन्मुख रहे.

दोनों कलाइयां और प्रबहुओ को पेट के नजदीक ऐसे लाएं कि वे परस्पर स्पर्श करें. अब आगे झुककर कहानियो के ऊपरी हिस्सों पर पेट को टीका दे. पेट का वह  भाग नाभि प्रदेश से कुछ नीचे होगा. भुजाओं के ऊपरी भाग में छाती को टिका दे. दोनों पैरों को एक साथ मिलाकर एवं साधते हुए पीछे की ओर उठाएं व फैलाएं.

गहरी श्वास भरते हुए शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करें. धीरे-धीरे धड़, सिर और पैर को ऐसे उठाएं, जिससे वे एक सीधी क्षैतिज रेखा में उठकर. जमीन के समांतर स्थिति में आ जाएं. सिर को थोड़ा ऊपर उठाए रखें. पूरे शरीर को हथेलियों पर, कोहनियों वा भुजाओं पर संतुलित रखें.

पैरों को एक साथ मिलाकर सीधे में रखते हुए कुछ और ऊपर उठाएं. यहां शरीर के संतुलन को व्यवस्थित करने की आवश्यकता है. यह अंतिम स्थिति है. इसमें यथासंभव संतुलन बनाए रखने हेतु उंगलियों का उपयोग करें.

यथाशक्ति रुके. तत्पश्चात पैरो को धीरे-धीरे जमीन पर वापस ले आए. यह मयूरासन की प्रथम आवृत्ति हुई. विश्राम करें. लंबी गहरी सांस लें. जब स्वास सहज हो, तो दूसरी आवृत्ति करें.

ध्यान रखें: शरीर पर अधिक तनाव ना दे. एक साथ तीन से अधिक बार इसे ना करें. हथेलियों को भूमि पर इस तरह रखे कि दोनों कोहनिया नाभि के दोनों और रहे, पर संतुलन रखते हुए शरीर का संपूर्ण भाग ऐसे उठाएं, मानो शरीर लकड़ी के गट्ठे के समान हो.

सावधानियां 

Mayur Asana
Mayur Asana

इसका अभ्यास करते समय पेट खाली रहना जरूरी है. अतः इसे सुबह में करना उपयोगी है. कोई भी विपरीत आसन करने के तुरंत बाद मयूरासन ना करें, क्योंकि इससे रक्त संबंधी विकारों के मस्तिष्क की ओर जाने की संभावना रहती है. सभी आसनों के अंत में करना उपयुक्त है. उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, गर्भावस्था, मासिक-चक्र की स्थिति में से ना करें. इस दौरान पीड़ा हो, तो तुरंत आसन रोककर विश्राम करें.

चर्मरोग में जिन बातों का ध्यान रखना चाहिए

इस दौरान मिर्च-मसाले, मास, मिठाई व मिलावटी भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. सरल और सुपाच्य भोजन लें. जिसमें मट्ठा, फल, हरी सब्जियां तथा पके अन्न हो. स्नान करने से पहले शिवांबु ( खुद का मूत्र ) का चर्म रोग में लेपन करें, और 1 मिनट रखें. फिर पानी से धो लें. बाद में मयूर आसन का अभ्यास प्रारंभ करें. इससे एक माह में संपूर्ण चर्म रोगों से मुक्ति मिल जाएगी. अंदर की अशुद्धि तथा विकार दूर हो जाएगा.

Mayur Asana के लाभ

Mayur Asana
Mayur Asana

पेट के सभी प्रकार के रोगों को दूर करने हेतु मयूरासन श्रेष्ठ है. यह गलत भोजन से उत्पन्न विषाक्त तत्वों का निष्कासन करता है. तथा जटरागिन को तीव्र करता है. इससे रक्त संचरण प्रक्रिया और मल निष्कारण प्रक्रिया में भी सक्रियता आती है. रक्त शुद्धिकरण होता है.

शरीर के दाग, चमड़े की सफेदी, फोड़े-फुंसियां आदि चर्म रोग ठीक हो जाते हैं. आंतरिक पाचन तंत्र के अंगों की अच्छी मालिश होती है. अतः स्त्रावी ग्रंथियों के कार्यों में शुभ व्यवस्था और संतुलन आने से संपूर्ण मांसपेशियों में सफलता आती है या यकृत की कमजोरी तथा गुर्दे संबंधी बीमारियों में भी अत्याधिक लाभप्रद है.

mayur-Asana के और भी बहुत सारे फायदे और तरीके है. जो हम आपको अपने आने वाले आर्टिकल में विस्तार से बताएंगे. आज के लिए बस इतना ही काफी है. इस आसन को घर पर करने का प्रयास करिए. और अगर कोई तकलीफ़ हो तो योगा टीचर से संपर्क अवश्य करे. धन्यवाद जय हिन्द

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