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बुखार शत्रु या मित्र? – fever – othershealth

Fever
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बुखार ( fever in Hindi )

आमतौर पर घर में किसी को बुखार होने पर लोग खुद ही आसानी से उपलब्ध दवाइयां दे देते हैं, क्योंकि आम आदमी बुखार के उतरने को ही चिकित्सा की सफलता और लक्ष्य मानता है. इससे तत्काल तो राहत मिल जाती है, मगर आगे चलकर या घातक भी हो सकता है.
विशेषज्ञ की माने, तो बुखार स्वयं में एक रोग नहीं, बल्कि शरीर में होने वाली आसमान गतिविधियों का संकेत, लक्षण या अलार्म है, जो यह बताता है कि शरीर में कोई गड़बड़ी चल रही है. ऐसे में उस गड़बड़ी को जाने बगैर खुद दवा लेना अपने शरीर को नुकसान पहुंचाना है. बुखार के चरण, इसके संकेत तथा उपचार पर विस्तार से बता रहे हैं हमारे विशेषज्ञ.
आमतौर पर देखा गया है कि अलग-अलग चिकित्सक महीनों तक मरीज को बुखार उतारने की दवाई देते रहते हैं. मगर आगे भली-भांति जांच करने पर कैंसर का पता चलता है.
केवल तापक्रम को कम करने के उद्देश्य से बुखार की दवाओं के उपयोग को जर्मनी, अमेरिका और इंग्लैंड जैसे अनेक विकसित देशों में अब विशेषज्ञों द्वारा प्रोत्साहित नहीं किया जाता है.हाल ही में 36 वर्ष की सरिता मेरे क्लीनिक में आयी, जिसे पिछले 4 महीने से हल्का बुखार रह रहा था. 4 महीने में राज्य के विभिन्न स्थानों पर बुखार की चिकित्सा तरह-तरह की एंटीबायोटिक, मलेरिया की दवाई, बुखार उतारने की दवा से की गई.पर पेट की सावधानी जांच और अल्ट्रासाउंड करते ही लीवर में 6 इंच से भी बड़ी कैंसर की गांठ का पता चला. बुखार के कारणों को जानने की पर्याप्त कोशिश के अभाव में केवल बुखार की चिकित्सा अनुमान पर करने से इस प्रकार की घटनाएं बहुत देखने में आती है.

क्यों होता है बुखार  ( Why there is fever )

बुखार मूलतः शरीर में बाहरी शत्रुओं उसमें जीवाणु वायरस बैक्टीरिया फंगस के प्रवेश या आंतरिक गड़बड़ी का अलार्म या खतरे की घंटी है, पर इंफेक्शन के अतिरिक्त आंतरिक उत्तकों के टूट-फूट या क्षति, कैंसर, अर्थराइटिस, चोट लगने, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ियों, कुछ दवाओं, जैसे- अनेक अन्य रोगों में भी बुखार एक लक्षण के रूप में होता है.

यह खतरे के विषय में सचेत करने के साथ-साथ अक्सर खतरों से निबटने में मदद के लिए विकसित एक जटिल जैविक प्रक्रिया है. अनेक परिस्थितियों में बुखार अपने आप में अत्यंत हानिकारक या जानलेवा भी हो जाता है.

किन रोगों मैं होता है बुखार

100 से भी अधिक लोगों में बुखार एक आम लक्षण के रूप में दिखाई पड़ता है, पर बेहतर समझ के लिए इन्हें हम दो वर्गों में बांट सकते हैं. सूक्ष्म जीवाणुओं के कारण होने वाले बुखार को संक्रमण बुखार तथा अन्य अनेक प्रकार के रोगों में होने वाले गैर संक्रामक बुखार.

किया है बुखार ( what is fever in Hindi )

सामान्य स्वास्थ्य की स्थिति में व्यस्क मनुष्य के शरीर का औसतन 36.5 से 37.5 सेल्सियस या 97.7 – 99.5 फारेनहाइट के बीच होता है. तापक्रम को मापने के लिए थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है. थर्मामीटर को अक्सर मुंह के जीभ के नीचे या बगल कांख में 1-2 मिनट तक रखकर शरीर का तापक्रम नापा जाता है.

कभी-कभी छोटे बच्चों में गुदा द्वारा थर्मामीटर लगाया जाता है. मुंह का तापक्रम बगल के तापक्रम से लगभग 1 डिग्री कम और गुदा का तापक्रम 1 डिग्री अधिक होता है. आजकल रोगी को बगैर छुए ताप का में नापने के लिए अन्य प्रकार के यंत्रों का भी व्यवहार किए जाने लगा है.

तापक्रम को एक निश्चित सीमा पर रखने के लिए मस्तिष्क के हाइपोथेलेमस नामक स्थान में एक तापक्रम नियंत्रित केंद्र होता है, जो एक जटिल प्रक्रिया के माध्यम से शरीर के ताप कर्म को एक निश्चित स्तर पर बनाए रखता है.

बाहर वातावरण के तापमान के बढ़ने-घटने की अवस्था में भी शरीर का तापक्रम ऐसी निश्चित बिंदु पर बना रहता है. बाहर बर्फ पड़ने पर वातावरण का तापक्रम सुन्य या इससे भी नीचे चला जाए या गर्मी से 50 से अधिक हो जाए, पर शरीर का तापक्रम इसी निश्चित बिंदु पर बना रहता है.

संक्रामक बुखार

वातावरण में मौजूद 400 से अधिक प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु मनुष्य जाति में अलग-अलग रोग का कारण है. लगभग 90 फ़ीसदी बुखार किसी न किसी सूक्ष्म जीवाणुओं के संक्रमण के कारण होता है.

सूक्ष्म जीवाणुओं के शरीर में प्रवेश करते ही इनका सामना शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के सैनिकों से होता है. यह सैनिक तत्काल बचाव कार्य में लग जाते हैं. जिस प्रकार युद्ध के मैदान में सीमा पर दुश्मन से लड़ने के साथ दुश्मन के आने की खबर मुख्यालय को दी जाती है. ठीक इसी तरह संक्रामक जीवाणुओं के शरीर में आगमन की सूचना एक रसायन ial-1 के माध्यम से तापमान नियंत्रित केंद्र को दी जाती है.

तापक्रम नियंत्रण केंद्र शरीर के तापमान को सामान्य से अधिक करने का प्रयास करता है. बड़ा हुआ तापक्रम मुख्यतः दो प्रकार से मददगार होता है. पहला तो देखा गया है कि बड़े हुए तापक्रम पर सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या वृद्धि नियंत्रित होती है तथा 40 डिग्री के तापक्रम पर इम्यून सिस्टम की कार्य क्षमता बेहतर होती है और वह बेहतर तरीके से जीवाणुओं को नियंत्रित करने या मारने में सक्षम होते हैं.

इस प्रकार संक्रामक बुखार में बढ़ा हुआ तापक्रम दो महत्वपूर्ण तरीकों से सहायक होता है. अब अनेक वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि जिन रोगियों में बुखार की दवाओं के प्रयोग से तापक्रम को कम किया गया, उनमें जीवाणुओं की संख्या अधिक थी और रोग मुक्त होने में अधिक समय लगा और कुछ रोगियों में जटिलताएं भी हुई.

गैर संक्रामक बुखार

आंतरिक उत्तक के टूट-फूट या छती, कैंसर, अर्थराइड्स, चोट लगने, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ियों के खराब होने से भी बुखार हो सकता है बुखार का ठीक-ठीक कारण जाने बगैर बुखार उतारने वाली दवाओं के गैर जिम्मेवार प्रयोग से बुखार में तत्कालिक राहत तो मिलती है, पर रोग भीतर ही भीतर बढ़ कर गंभीर रूप ले लेता है. अनेक प्रकार के कैंसर में बुखार एक प्रारंभिक लक्षण के रूप में होता है.

अज्ञात बुखार

कभी-कभी बुखार के सटीक कारण का पता करने के लिए एक्सरे, रक्त, मूत्र या अन्य परीक्षण आवश्यक हो सकते हैं. कुछ रोगियों में हर प्रकार के परीक्षणों के बाद भी बुखार के सही कारणों का पता नहीं चल पाता.

इस प्रकार के बुखार को पेरेक्सिया ऑफ अननोन ओरिजन या हिंदी में अज्ञात कारण वाला बुखार कहते हैं. इसकी चिकित्सा अत्यंत कठिन होती है चिकित्सक को अनुमान से ही इलाज करना पड़ता है.

बिना दवा के बुखार कम करने के उपाय

हल्के गर्म पानी से बदन पूछना. माथे पर पट्टी देना. हल्के पतले व आरामदायक कपड़े पहनना. अधिक मोटे कंबल में नहीं लपेटना. इससे तापक्रम में बढ़ने की संभावना अधिक होती है.

बच्चा यदि खाना नहीं चाह रहा हो, तो उसे जबरन ना खिलाए. बल्कि पर्याप्त मात्रा में पानी, फलों का रस, वेजिटेबल सूप तथा अन्य तरल पर दे या उसकी पसंद की आसानी से पचने वाली चीजें जैसे- खिचड़ी, दलिया, साबूदाना, नरम चावल खिलाएं.

3 माह से कम उम्र के बच्चे को 100 डिग्री से अधिक होने पर चिकित्सक को तत्काल दिखाना बेहतर होता है.

5 साल के बच्चे को कब ले जाएं चिकित्सक के पास

बार बार उल्टी या पतला पैखाना हो. गर्दन का अकड़ना, तेज सिरदर्द. असामान्य सुस्ती या छटपटाहट. सांस लेने में कष्ट, सांस में आवाज या दम फूलना. पेट दर्द या पेट फूलना. मिर्गी जैसा दौरा या झटका आना.
बेहोशी जैसे लक्षण. शरीर पर दाने निकलना. 3 दिनों से अधिक बुखार हो तब. खाना पीना बंद कर देना. 5 वर्ष के कम उम्र के बच्चे में तेज बुखार के कारण केवल 2 से 5% बच्चों में तेज बुखार 103 से अधिक में मिर्गी के झटके जैसा दौरा पड़ता है. ऐसे बच्चों को चिकित्सक के पास ले जाएं.
बुखार कब है खतरनाक 
किसी भी संक्रामक रोग में अत्याधिक तापक्रम बढ़ने और बुखार के साथ अन्य लक्षणों का संयोग, जैसे- मस्तिष्क का संक्रमण, मलेरिया जानलेवा हो सकता है, जिससे अलग-अलग चिकित्सा की जरूरत पड़ती है.
लंबे समय तक या बार-बार होने वाले गैर संक्रामक रोगों से भी अधिक तापक्रम से मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाती है और शरीर में प्रोटीन तथा अन्य पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, ऑक्सीजन की आवश्यकता बढ़ जाती है.
अनेक हानिकारक पदार्थ जमा होने लगते हैं, वजन कम होने लगता है और जीवन खतरे में पड़ जाता है. इन स्थितियों में रोग की चिकित्सा के साथ तापक्रम को कम करने के उपाय करना चिकित्सा की प्राथमिकता हो जाती है.

कब दे बुखार उतरने कि दवा

बुखारकी डिग्री से अधिक महत्वपूर्ण है बच्चे के स्वास्थ्य के वास्तविक हालात को जानने की. यदि बच्चे का तापक्रम 101 या 102 तक भी है और वह कम ही सही, पर कुछ खा पी रहा है, मल मूत्र त्याग करता है.
लगभग सामान्य गतिविधियां करता है, इन परिस्थितियों मैं बुखार उतारने की दवा जहां तक संभव हो, नहीं देना ही बेहतर है. केवल तापक्रम को कम करने के उद्देश्य से दवाओं के उपयोग को अमेरिका और इंग्लैंड जैसे अनेक विकसित देशों में अब विशेषज्ञों द्वारा प्रोत्साहित नहीं किया जाता है.

बुखार में लक्षण ( fever symptoms in Hindi )

संक्रामक बुखारो में इसकी प्रकृति अलग-अलग होती है, जैसे मलेरिया का बुखारकंपकपी के साथ कुछ ही घंटों में काफी तेज हो जाता है और फिर अचानक पसीने के साथ बिल्कुल उतर कर सामान्य हो जाता है.
टाइफाइड का बुखार सुबह से धीरे धीरे चढ़ता है और शाम होते-होते उच्चतम स्तर पर हो जाता है. इसी प्रकार अनेक बुखारो में सहयोगी लक्षणओ जैसे- खांसी, पेशाब में जलन, जोड़ों में सूजन या दर्द जैसे लक्षणों से बुखार का कारण का ठीक-ठीक पता चलता है.
परंतु पिछले 3 दशकों से केवल को ही रोग मान कर इसे दवाओं के माध्यम से उतारने की प्रवृत्ति रोगियों के साथ-साथ चिकित्सकों में बड़ी है. सटीक कारण जाने बिना दवा लेने से बुखार के सटीक कारणों का पता करना और भी कठिन हो जाता है.
अनावश्यक दवाओं का प्रयोग बढ़ जाता है. यह लगभग वैसा ही है, जैसे घर में दुश्मन के आने की सूचना देने वाला अलार्म का स्विच ही बंद कर दिया जाए. ताप कम कर के दुश्मन से लड़ने वाले इम्युनिटी के सैनिकों का उत्साह ठंडा कर दे या उनके हथियार छीन लिया जाए और फिर अंधेरे में ताबड़तोड़  गोलीबारी करके दुश्मन को मारने का प्रयास किया जाए. इस सामान्य तर्क से तो निश्चित निश्चय ही अधिक नुकसान होगा और कुछ अध्ययनों से इस बात की पुष्टि भी हुई है.

    Reference

Health Expertshttps://othershealth.in
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