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निरालंब पश्चिमोत्तानासन -शरीर लचीला एवं तंदुरुस्त बनाता है- niralamba paschimottanasana in Hindi – othershealth

niralamba paschimottanasana benefits in Hindi

निरालंब पश्चिमोत्तानासन के लाभ ( niralamba paschimottanasana benefits in Hindi )

इस आसन के नियमित अभ्यास से पैर, पंजे, एड़ी तथा पैरों के संपूर्ण भाग, कमर, पेट, पीठ, छाती, मेरुदंड गर्दन, सिर तथा हाथ और हाथों के सभी अंगों को लाभ प्राप्त होता है.

पाचन संस्था, श्वसन संस्था, नर्व तंत्रिका, अंतः स्त्रावी संस्था और सभी चक्रों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है. शरीर लचीला एवं तंदुरुस्त बनाता है. मानसिक, शारीरिक, अध्यात्मिक तल पर हमें लाभ होता है.

मधुमेह में पाचन क्रिया प्रभावित होती है. इस आसन का सीधा असर पेट पर आने से छोटी, बड़ी आंत, लीवर, किडनी की कार्य क्षमता बढ़ती है. पैंक्रियाज की मालिश होने से बीटा सेल्स से पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन स्रावित होता है और शुगर लेवल के नियंत्रण में मदद मिलती है.

पेट दर्द, कब्ज, मूत्र विकार, प्रजनन संस्था आदि में सुधार होता है. स्पर्म काउंट में वृद्धि होती है. महिलाओं के मासिक संबंधी एवं गर्भधारण संबंधी विकार दूर होते हैं. श्वसन संस्था प्रभावित होने से रक्त संचालन किया तेजी से बढ़ती है और संपूर्ण शरीर स्वस्थ होता है.

अस्थमा तथा हृदय के विकास पूरी तरह ठीक होते हैं. चेहरे पर तेज आती है, मन की प्रसन्नता बढ़ती है. रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ने से बीमारियों से बचाव होता है.

निरालंब पश्चिमोत्तानासन ( niralamba paschimottanasana in Hindi )

निरालंब शब्द का अर्थ है- ‘बिना आधार के’ और पश्चिमोत्तानासन का अर्थ ‘पीठ को मोड़ना’. अतः इसे बिना आधार के पीठ को मोड़ने वाला आसन कह सकते हैं.
मेरुदंड के विकार, घुटनों के दर्द, मोटापा या वजन में कमी, पेट की चर्बी, तनाव आदि समस्याओं पर नियंत्रण पाने में यह आसन अत्यंत उपयोगी है.

आसन विधि

चित्र के अनुसार, अपने पैरों के तलवे को पकड़ ले. यह प्रारंभिक स्थिति है. अपने संपूर्ण शरीर को शिथिल करें. गहरी सांस अंदर ले. अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाएं. दोनों पैरों को सीधा रखने का प्रयत्न करें.
दोनों हाथों से दोनों पैरों को अच्छी तरह पकड़े रखें. शारीरिक स्थिति को पूर्ण संतुलन के साथ बनाए रखें. अब रेचक करें. फिर गहरी श्वास अंदर लें. तत्पश्चात हाथों को खींचते हुए सिर को घुटनों के पास लाने का प्रयास करें.
ख्याल करें कि शरीर के किसी भी अंग में अधिक तनाव ना पड़े. अपनी पीठ को यथासंभव विश्रामपूर्ण स्थिति में रखें. यह इसकी अंतिम स्थिति है. इस स्थिति में या तो कुंभक करें अथवा गहरा एवं धीमा वर्शन करें.कुछ समय तक इस स्थिति में आराम से रहने के पश्चात धीरे-धीरे पैरों को नीचे प्रारंभिक स्थिति मैं ले आए. तत्पश्चात संपूर्ण शरीर को विश्राम दे और श्वसन क्रिया सामान्य रूप से चलने दें. यह इस आसन की प्रथम आवृत्ति हुई. आप चाहे तो इसे तीन बार कर सकते हैं.

सजगता : अपने शरीर के संतुलन एवं स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें. आप चाहे तो अपने सामने दिवार पर किसी बिंदु को देखते हुए खुद को एकाग्र कर सकते हैं.

सीमाएं : इस आसन का अभ्यास उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, स्लिप डिस्क, साइटिका रोग में नहीं करना चाहिए.

ध्यान रखें : निरालंब पश्चिमोत्तानासन के लिए मेरुदंड का अत्यंत लचीला होना आवश्यक है. अतः इसका अभ्यास प्रारंभ करने से पूर्व पश्चिमोत्तानासन में दक्षता प्राप्त कर लेनी चाहिए.

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