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घुटनों के गठिया को न करें नजरअंदाज – arthritis in Hindi – othershealth

Arthritis in Hindi
Arthritis

गठिया ( arthritis in Hindi )

गठिया की शुरुआत घुटनों, पीठ या उंगलियों के जोड़ों में मामूली दर्द के साथ होती है, लेकिन अक्सर लोग इस मामूली दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं. गाड़ी से उतरते समय एकाएक शुरू होने वाले पैर या कूल्हे में होने वाले दर्द को लोग गंभीरता से नहीं लेते. लोग समझते हैं कि अभी उनकी उम्र गठिया से पीड़ित होने की नहीं है और दर्द का कारण समन्या से मोच है.

अध्ययन उम्र में ऑस्टियो आर्थराइटिस होने का खतरा अधिक रहता है. इसमें जोड़ों के कार्टिलेज में विकृति आ जाती है. कार्टिलेज जोड़ों के लिए शॉक ऑब्जर्वर का काम करता है. गठिया की शुरुआत आमतौर पर महिलाओं में 35 वर्ष एवं पुरुषों में 40 वर्ष की उम्र में हो जाती है. लोगों को सीढ़ियां चढ़ने उतरने में दर्द होता है, नीचे बैठ कर उठने में दर्द होता है और कभी-कभी सोने के बाद भी दर्द होता है.

गठिया की अवस्था ( Arthritis starting )

डॉक्टर ऐसे टेस्ट की खोज में लगे हुए हैं, जिससे गठिया का पता सुरूवाती अवस्था में ही लग जाए. एक्सरे से हड्डियों की हालत की पूरी जानकारी तो मिल जाती है, लेकिन कार्टिलेज की सही तस्वीर नहीं मिल पाती. कार्टिलेज पानी सोखे हुए स्पंज की तरह होता है.

कार्टिलेज में पानी, कांद्रसाइट्स और कई अन्य घटक होते हैं.   कांद्रासाइट्स ऐसे कोशिकाएं हैं, जो कार्टिलेज की नई मात्रा पैदा करती है. जब जोड़ों पर दबाव पड़ता है, तो स्पंज की तरह कार्टिलेज से सोखा हुआ द्रव्य बाहर निकल जाता है.

दबाव कम होने पर कार्टिलेज इस द्रव्य को फिर से सोख लेता है. सोखने और निचोड़ने की प्रक्रिया से इस द्रव्य की गुणवत्ता बनी रहती है और कार्टिलेज स्वस्थ रहता है. यही कारण है कि जोड़ों की कसरत और टहलना आदि हमें ओस्टियो अर्थराइटिस से बचाते हैं.

कभी-कभी 40 से 55 साल की उम्र में कांद्रोसाइट अपना काम ठीक से नहीं कर पाते और कार्टिलेज कमजोर पड़ना शुरू होता है और दर्द भी शुरू हो जाता है. यही अवस्था गठिया रोग है.

किया है इलाज

यदि घुटनों में दर्द बहुत रहता है, तो दर्द की गोलियां कुछ दिनों तक सेवन करें. रोज प्रातः ब्राह्मण करें. यदि जोड़ एकदम घिस गए हैं और मुश्किल से चल पाते हैं, तो नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी ही 21वीं सदी का इलाज है. वैज्ञानिक अनुसंधान कह रहे हैं कि कोई नई चिकित्सा आए, ताकि लोग नी रिप्लेसमेंट से बच सके.

ऐसे करें बचाव

अब तो मेडिकल साइंस भी कहता है कि हमारे लिए शाकाहार ही उत्तम है. असल में मांसाहार कैंसर तत्वों को बढ़ावा देता है. इसलिए इससे बचना ही श्रेयस्कर है. घुटनों की मजबूती के लिए रोज कम से कम 3 से 5 किलोमीटर तेज कदम से चले.

बाहर संभव ना हो, तो घर के अंदर ही चले. कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो बीच-बीच में आधा घंटा उठकर चले. लोग कहते हैं सीढ़ियां ना चढ़े, मैं कहता हूं कि सीढ़ियां रोज चढ़े. यह घुटनों का बेस्ट एक्सरसाइज है. इसके अलावा कुछ पकड़ कर बैठे उठे. खटिया में सो जाइए.

पैर को दोनों हाथों से मोड़ लीजिए, फिर खोलें. घुटनों में दर्द है तो 10-10 सीढ़ियां ही चरे. चलना मत छोड़िए, वरना 4-5 लाख खर्च कर के भी समस्या से घिरे रहेंगे. गठिया से ग्रस्त होने पर पानी ज्यादा मात्रा में पिएं. पानी का ज्यादा सेवन गठिया में फायदेमंद है. साथ ही डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम सप्लीमेंट ले सकते हैं.

किया है प्रमुख कारण

गठिया का सबसे बड़ा कारण कसरत करने की आदत एकदम से छोड़ देना है. इसका जोड़ों पर काफी बुरा असर पड़ता है. एक और बड़ा कारण मोटापा या अत्यधिक वजन भी है. पहले वैज्ञानिक मानते थे कि गठिया के लिए केवल कार्टिलेज का क्षय ही उत्तरदाई है.

गलत फिटिंग के जूते या चोट जोड़ों में गठिया पैदा कर सकता है. लेकिन कुछ लोगों के जोड़ों का कार्टिलेज किसी भी क्षति से अपना बचाव करने में ज्यादा सक्षम होता है. ऐसे लोगों के जोड़ ज्यादा स्वस्थ रहते हैं.

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