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एक्टिव रहकर दूर भगाएं मोटापा – obesity in hindi – othershealth

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Obesity

मोटापा ( obesity-in-hindi )

मोटापा के कारण भी उसके स्वरुप की तरह जटिल है. आप ये नहीं के सकते कि व्यक्ति फलाना कारण से ही मोटा हो गया है. उसके पीछे कई कारण हो सकते है. शारीरिक श्रम अपने आहार के अनुसार न करना एक प्रमुख वजह है.

जब हम भोजन अधिक कर लेते हैं और शारीरिक श्रम नहीं करते, तो भोजन में मौजूद वसा या फैट धीरे-धीरे पेट में जमा होने लगता है, जिस वजह से हमारी टमी या तोंड निकल आता है.

इसके अलावा मोटापा हार्मोनइक, आनुवंशिक, हाइपोथाइरॉएड, ग्रोथ हार्मोन का अत्यधिक बढ़ जाना, लेप्टिन हारमोंस रेसिस्टेंस, इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाना या अधिक इंसुलिन की दवाई का उपयोग करना हाइपोगोनेडिज्म आदि भी इसके कारण है.

साथ ही कुछ दवाइयां जैसे- थायराइड की दवाई, you कारणों से ली गई दवाई, माइग्रेन की समस्या में ली जाने वाली दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी मोटापा बढ़ सकता है. इसके अलावा वैज्ञानिक भी इसके कारणों पर शोध कर रहे हैं, ताकि इस गंभीर समस्या के कारणों को पहचान कर इसका ट्रीटमेंट कराया जा सके.

लंबी अवधि तक चलता है treatment

मोटापा को कम करना आसान नहीं है. इसके लिए सबसे पहले खुद से दिन संकल्प होना पड़ेगा कि मुझे अपना वजन कम करना ही है. इसके बाद अपने खाने-पीने पर संयम बरतने की जरूरत होगी. यदि आप खुद से डाइट को कंट्रोल में नहीं रख सकते तो बेहतर होगा कि किसी डाइटिशियन से अपना डाइट चार्ट बनवा लें और उसी के अनुसार आहार ले.

डाइटिशियन इसके लिए सबसे पहले आपके वेट और हाइट के अनुसार आपका बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स निकालेंगे और फिर आप का डाइट प्लान करेंगे. इसके साथ ही फिजिकल फिटनेस पर ध्यान देना जरूरी होगा. रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज चाल में मॉर्निंग या इवनिंग वाकिंग जरूरी होगी.

साथ ही योग या फिर अन्य एक्सरसाइज जरूरी होंगे. कुछ तरह की दवाइयां और इंजेक्शन भी मोटापा को कम कर सकते हैं, पर संभव है कि उसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो.

बैरियाट्रिक सर्जरी भी एक उपाय

मोटापा कम करने के लिए बैरियाट्रिक सर्जरी भी एक उपाय हो सकता है, इसमें सर्जरी कर पेट में जमा फैट के अतिरिक्त मांस को हटाया जाता है. बैरियाट्रिक सर्जरी भी कई तरह की होती है जो इस प्रकार है- गैस्ट्रिक स्लीव, गैस्ट्रिक बाईपास, दुओडानाल स्विच, लैप बैंड्स, गैस्ट्रिक बैलून, विब्लोक थेरेपी और एस्पायर एसिस्ट.

इनमें से सभी तरीके एक बार में नहीं अपनाए जाते हैं. व्यक्ति के वेट और उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर यह निर्णय लेते हैं कि इनमें से कौन-कौन से उपाय उस पर उपयोग में लाए जा सकते हैं. हालांकि, ऑपरेशन के बाद भी यदि व्यक्ति अपने फिटनेस पर ध्यान ना दे, तो दोबारा मोटापे का शिकार हो सकता है.

इसके साथ ही कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज प्रतिदिन 25 से 40 मिनट तक करना फायदेमंद होगा. कुशल योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में योग और प्राणायाम के कुछ आसन करना भी मोटापा और उससे जनित रोगों को दूर करने में मददगार है.

क्या है मोटापा ( what is obesity-in-hindi )

मोटापा एक मेटाबॉलिक सिंड्रोम है यह दुनिया भर में महामारी की तरह फैल चुका है आज हर तीसरा चौथा व्यक्ति मोटापे राशि महिलाओं में मोटापे की टेंडेंसी अधिक देखी जा रही है इससे उनके शरीर का टेस्टोस्टरॉन, एंड्रोजन, एस्ट्रोजेनिक हारमोंस असंतुलित हो जाता है.

बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान, जंक फूड का बढ़ता चलन, एक जगह बैठ कर काम करने की प्रवृत्ति और फिजिकल एक्टिविटीज की कमी इसके प्रमुख कारण है.

उम्र के साथ होने वाली समस्याएं

महिलाओं में मोटापे की समस्या को तीन कैटेगरी में बांटा जा सकता है किशोर, युवा और मेनोपॉज के समय की समस्याएं. महिलाओं को दो तरह की परेशानी मुख्य रूप से होती है. पोलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम और प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याएं.

मोटापे की वजह से ही 11-12 साल की लड़कियों में मासिक चक्र शुरू हो जाता है. लेकिन यह रेगुलर नहीं रहता. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की अधिकता से मुंहासे, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल जैसी समस्याएं आती है. फिगर के प्रति सचेत कई किशोरिया मोटापा कम करने के लिए वे खानपान खाना पीना बंद कर देती है.

इससे उनको लाभ की जगह नुकसान ज्यादा हो सकता है. युवा महिलाएं मोटापे की वजह से डिप्रेशन की शिकार हो जाती है. उनकी शादी तय होने में दिक्कत आती है. वहीं, हार्मोन असंतुलन के कारण उनमें सेक्स ड्राइव में आरुषि और कंसीव करने में भी परेशानी आती है. मोटापे की अवस्था में यदि कंसीव कर भी लिया जाए, तो भी बच्चे को गर्भ में कई परेशानियों से जूझना पड़ता है.

कुछ गर्भवती महिलाओं का शुगर लेवल बढ़ जाने पर गर्भवती महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज होने की आशंका होती है. इससे कुछ बच्चे प्रीमेच्योर भी पैदा होते हैं. ऐसी महिलाओं को एक्स्ट्रा ब्लीडिंग या सीपीएच पोस्टमार्टम हेमरेज होने की आशंका बढ़ जाती है.

डॉक्टर इंजेक्शन और मेडिसिन देकर इसे कंट्रोल करते हैं. सी- सेक्शन से हुए बच्चों में जौंडिस और बड़े होकर डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है.

मेनोपॉज : मेनोपॉज की स्थिति तक पहुंची महिलाओं में अधिक वजन के कारण ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. मासिक चक्र अनियमित हो जाता है. यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग मोटी हो जाती है. ऐसे में अत्यधिक ब्लडिंग होने लगती है.

मोटापा हृदय रोग के लिए घातक ( obesity is dangerous in heart disease )

मोटापा रोग तो नहीं, पर क्रॉनिक प्रॉब्लम यानी दीर्घकालिक समस्या है. यह कई गंभीर रोगों की जननी है. मोटापा कम करके या कहें कि सही वेट मेंटेन करके व्यक्ति कई क्रॉनिक डिजीज से दूर रह सकता है.

मोटे लोगों में हृदय रोग होने की आशंका अधिक है. वजन बढ़ने का सीधा संबंध डायबिटीज से है. मोटापा बढ़ने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है क्योंकि मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण एक ही है.

इनमें अधिक भोजन करना, भोजन में फैट की मात्रा अधिक लेना और ट्रांस फैट वाले फूड का अधिक सेवन करना तथा फैट बर्निंग के लिए फिजिकल एक्सरसाइज पर ध्यान ना देना आदि है.

प्लाक से रक्त संचार में समस्या

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हृदय की धमनियों में प्लाक जमने लगत है. प्लाक जमने से हृदय की मांसपेशियों में ऑक्सीजन युक्त ब्लड सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता है. इससे engaina में दर्द होता है. कभी-कभी प्लाक फट जाता है, जिससे धमनियों के अंदर रक्त पर का प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है. इससे हार्ट अटैक की स्तिथि बन जाती है.

बड़ जाता है heart failure का खतरा

मोटापा बढ़ने से aatriyaal फेब्रिलेशन का रिस्क बढ़ जाता है. यह हृदय की धड़कन की बीमारी है, जिसमें धड़कनों की गति तेज और अनियमित हो जाती है. मोटापा बढ़ने से हार्ट फैलियर की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. मोटे लोगों में बड़े हुए फैट के कारण ब्लड सप्लाई करने के लिए हृदय को अधिक समय और ऊर्जा लगानी पड़ती है. इससे हार्ट फैलियर का खतरा बढ़ जाता है.

वजन कम करने से इन सभी बीमारियों के होने की आशंका स्वतः कम होने लगती है. 10 किलोग्राम वजन घटाने से ब्लड प्रेशर 10 एमएम एचजी तक घट जाता है. शुगर कंट्रोल होना इन सभी बीमारियों की आशंका को कम करता है. इंसुलिन व अन्य दवाइयां कम लेनी पड़ती है. मानसिक तनाव में कमी आती है. इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि हृदय रोगों को दूर रखने में सहायक है परफेक्ट वेट.

मोटापा हो सकता है डिप्रेशन का कारण ( obesity is a reason of depression )

मोटापे के कारण कई लोगों को हंसी का पात्र बनना पड़ता है, जिससे वे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. कलॉस्टरोल बढ़ने से हृदयरोग व हाई ब्लड प्रेशर का खतरा रहता है. हड्डियां कमजोर होने से ओस्टियोआर्थराइटिस हो सकता है. ध्यान न दिए जाने पर नी रिप्लेसमेंट कराना पड़ सकता है. कुछ लोगों में स्लिप एपनिया भी हो सकता है ( सोते समय सांस में दिक्कत ). इसमें व्यक्ति की कई बार मौत भी हो जाती है.

फिट रहने के लिए खेल कूद अपनाएं

डॉक्टर मोटे लोगों की काउंसलिंग करते हैं और वजन कम करने के लिए प्रेरित करते हैं. इसके लिए बेहतर खानपान के साथ नियमित एक्सरसाइज जरूरी है. स्वसन तंत्र को बेहतर करने के लिए योग करना बेहतर उपाय है. इससे फैट बर्न करने में भी मदद मिलती है. साथ ही साइकिलिंग और स्विमिंग का सहारा ले सकते हैं. यह दोनों फैट बर्निंग के लिए बेस्ट ऑप्शन है. फिजिकल एक्टिविटीज के लिए बैडमिंटन, कबड्डी आदि गेम खेल सकते हैं.

फिट रहने के लिए अपनाएं ये उपाय

30-40 प्रतिदिन तेज चल चले. इससे एक सप्ताह में आप 1000 कैलरी तक बर्न कर सकते हैं.

यदि आप सप्ताह मै कम से कम एक दिन 30 मिनट स्विमिंग करते है, तो आप 330 कैलरी तक बर्न कर सकते है.

सिर्फ 5 मिनट दौड़ लगाने से एक दिन मैं 100 कैलोरी, जबकि एक सप्ताह में 700 कैलोरी बर्न कर सकते है.

आसनों से मोटापा कम करना आसान

मोटापे की मुख्य वजह है- बेवजह खाना, अधिक चर्बीदार भोजन करना, कोई व्यायाम ना करना, पाचन प्रणाली का अच्छा ना होना, कम पानी पीना आदि. रिफाइन से बने भोज्य पदार्थ, मैदा और किर्तीम रूप से रंगे गए तथा कीर्ट्रिम सुगंध वाले आहार भी मोटापे की वजह है.

बच्चों में मोटापे का सबसे बड़ा कारण है फास्ट फूड, तोंद निकल आना, श्रम युक्त काम करने पर दम फूलना, थकान, अधिक नींद और शरीर में दर्द होना मोटापे के सामान्य लक्षण है.

मोटापा से उबरने में हलासन, कटिचक्रासन, उस्त्रासना, मत्स्यासन आदि आसन बहुत लाभकारी है.

हलासन : यह आसन अतरिक्त वजन को कम करता है.

विधि : पीठ के बल लेट कर दोनों पैरों को आपस में मिलाएं. हथेलियों को कमर के पास जमीन पर रखें. शरीर को ढीला छोड़ दें. अब सांस भरे और पेट को जितना संभव हो अंदर की ओर सिकोड़ लें.

अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं और सिर के पीछे तक ले जाने का प्रयास करें. ( शुरुआत में इस स्थिति में आने के लिए शरीर की मांसपेशियों पर जोर पड़ता है, मगर लगातार प्रयास से आप इस क्रिया पर नियंत्रण पा सकते हैं ) इस स्थिति में यथाशक्ति रुकने के बाद धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ जाए. पूरी प्रक्रिया के दौरान घुटने ना मोड़े.

कटिचक्रासन : इससे कमर की चर्बी दूर होती है और कमर आकर्षक बनता है. यह शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाकर आलस्य दूर करता है. इस आसन से पहले उत्तानपादासन करना लाभकारी है.

विधि : दोनों हाथों को सिर के नीचे रखें. कोहनिया जमीन पर रखते हुए बाएं पैर को घुटने से मोड़कर पैर के तलवे को दाईं जंघा पर रखें. सांस छोड़ते हुए बाएं घुटने को दाएं ओर कमर को साइड से मोड़ते हुए जमीन पर ले जाने का प्रयास करे.

इस स्थिति में आंखें बंद कर सांस को सामान्य होने दे. यथाशक्ति रुके और उसके बाद सांस भरते हुए घुटने को धीरे से वापस लाकर पैरों को सीधा कर ले. दोनों पैरों से यह प्रक्रिया दो दो बार आराम से करें.

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