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कोरोना के बाद बढ़ सकती है मानसिक बीमारियां – mental illness in Hindi

मानसिक बीमारियां – mental illness in Hindi

कोरोना संकट ने एक और समस्या को जन्म दिया है और यह समस्या मानसिक बीमारी के रूप में सामने आई है. कोरोना के इस दुष्प्रभाव के शिकार हो रहे हैं दुनिया भर के युवा. और इसका भी फिलहाल कोई उपचार ढूंढा नहीं जा सका है. 

कोरोना के बाद मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ेगा. चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लॉकडॉउन और सोशल डिस्टेंसिंग का दुष्परिणाम दिखेगा। हालांकि दुष्परिणाम नजर आने में वक्त लगेगा। महामारी की स्थिति में लोगों को अनिश्चितता महसूस होती है। अकेलेपन इन बातों को और बढ़ा देता है, यही विचार और भावनाएं एगजंटी डिसऑर्डर में बदलने लगती है.

लोकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग कैसे बढ़ाएगा समस्या को

कोरोना के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग बड़ी है. लाकडाउन से मेलजोल भी कम हो गया है. ऐसे में अवसाद, चिड़चिड़ापन, गुस्सा बढ़ेगा. जैसे पहले हमारे घर मेहमानों का आना जाना बहुत अच्छा लगता था, आप अपने विचार सुख-दुख बांटा करते थे. बिल्कुल अकेलेपन अच्छापन का ना लग पाना है.

पहले लोग अपने मेहमानों को बुलाने के विभिन्न तरीके अपनाते थे, जैसे पूजा-पाठ के बहाने, जन्मदिन आदि समारोह का आयोजन करके और उस दौरान लोग कितने खुश रहते थे. लेकिन अब ऐसी स्थिति कहां? 

जिन लोगों को अवसाद, चिड़चिड़ापन, घबराहट सहित अन्य तरह की समस्याएं होती है. उन्हें एकांतवास छोड़ने सोसायटी और लोग एवं सगे-संबंधी के बीच से ज्यादा वक्त बिताने की सलाह दी जाती थी. ऐसे में इस तरह के रोगी को करोना काल में संभालना बहुत मुश्किल भड़ा काम है. 

कोरोना संकट के बीच मानसिक बीमारी किशोरों और युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। दुनिया भर में 4 में से एक युवा मानसिक बीमारी का शिकार हो रहा है। संक्रमणकारी महामारी आम लोगों में चिंता और घबराहट को बड़े पैमाने पर बढ़ाती है. दरअसल, हमारे समाज में सिर्फ शारीरिक रूप से ठीक ना होने को ही बीमारी माना जाता है.

लेकिन सच्चाई तो यह है कि शारीरिक स्वास्थ्य से भी ज्यादा जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य. इसका असर हमारी जिंदगी पर पड़ता है, ऐसे में कोरोना वायरस मानसिक स्वास्थ्य का एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही हम सभी परेशान हो जाते हैं। जैसे हमारे सामने कोई विकट समस्या आ गई हो, मगर ऐसा बिल्कुल नहीं है. 

एक इंसान को पूर्णत: स्वस्थ रहने के लिए उसके मानसिक स्वास्थ्य का अच्छा होना भी काफी जरूरी है। बल्कि सच्चाई तो यह है कि शारीरिक स्वास्थ्य से भी ज्यादा जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य। इसका असर हमारी जिंदगी पर पड़ता है। ऐसे में कोरोना वायरस के दौर में यह जरूरी हो चुका है, कि हम इस बारे में खुलकर बातचीत करें।

दरअसल जब भी कोई आपदा आती है, तो उसकी वजह से मानव प्रजाति को बड़ा नुकसान होता है। जिसका असर सालों साल तक देखने को मिलता है। लोग उस नज़ारे को भुलाने में सफल नहीं हो पाते हैं, क्योंकि उनसे बहुत कुछ छीन चुका होता है।  

ऐसा ही कुछ करोना वायरस की वजह से भी हुआ है. एक शोध में कहा गया है कि कोरोना वायरस की वजह से आर्थिक तौर पर भारी नुकसान हुआ और कई देशों की तो अर्थव्यवस्था ही पटरी से उतर गई. ऐसे में भारी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं. जिसकी वजह से उनके दिमाग पर गहरा असर पड़ा है. और उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है.

तमाम शोधों में यह खुलासा हो चुका है कि करोना वायरस की वजह से मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, ऐसे में अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर क्यों? शोध में उन कारणों का भी जिक्र किया गया है. जिसकी वजह से कोरोना वायरस का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा पड़ा है. 

  मानसिक बीमारियां बढ़ने के कारण – Causes of increasing mental illnesses in Hindi

1. बिगड़ती अर्थवयवस्था 

2. बेरोजगारी दरो में बढ़ोतरी 

3. घर में रहकर नशे की लत का बढ़ते जाना 

4. घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी 

5. सामाजिक दूरी 

6. घरों में कैद रहना 

7. Corona वायरस का खौफ 

उपरोक्त कारणों की वजह से मानसिक रोगों में बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से कई लोग अवसाद के शिकार हो गए हैं. इतना ही नहीं, लोगों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि आखिर उनका भविष्य क्या होगा? क्या आने वाले समय में corona वायरस ठीक होगा या फिर उनकी जिंदगी ऐसी ही चलेगी.

आपको जानकर हैरानी होगी कि कोरोना वायरस का असर बच्चों के दिमाग पर भी पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें अब अपना भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है. कुल मिलाकर करोना वायरस ने लोगों के दिमाग और दिल में एक अजीब सा खोफ पैदा कर दिया है, जिसकी वजह से वे अवसाद ग्रस्त हो रहे हैं.

मानसिक बीमारियां के कुछ होम्योपैथिक दवाइयां – Some homeopathic medicines of mental illnesses in Hindi 

भविष्य अंधेरे में नजर आना – फास्फोरस 30 रोज सुबह एक बार लें. 

चिंता, डर या व्यापार में घाटे का डर सताए – आर्सेनिक एलब 30 रोज एक बार लें. 

मरने का डर – एकोनाइट, आर्सेनिक, जेल्सीमियम लें. 

नशा करके घर में झगड़ा करना – एसिड सल्फ 30 दिन में तीन बार दें. 

घरेलू चिंता से नींद न आना – कॉक्यूलस इंडिका 30 दिन में। तीन बार लें. उपरोक्त दवाएं आप आपने चिकित्सक के देख देख में ही लें. 

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