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हड्डियों में मिनरल्स का कम होना है ओस्टियोपोरोसिस – Osteoporosis in Hindi – othershealth

Osteoporosis in Hindi
Osteoporosis

ओस्टियोपोरोसिस ( Osteoporosis in Hindi )

ओस्टियोपोरोसिस – हड्डियों का बिना वजह टूटना या हल्की चोट या ठेस लगने पर भी कि उसका चटक जाना हड्डियों के कमजोर होने का लक्षण है, जिसे मेडिकल टर्म में ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है.

यूं तो इसे बुजुर्गों का रोग समझा जाता है, पर अब युवाओं में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख कारण है, समुचित पोषण वाला आहार ना लेना.

और ऐसे क्रॉनिक डिजीज जिनकी वजह से हड्डियों में मिनरल्स को नुकसान पहुंचता है. इस गंभीर बीमारी को समय रहते टाला जा सकता है. इसके बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं हमारे विशेषज्ञ.

ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों में कैल्शियम और अन्य मिनरल्स की कमी हो जाना. ऑस्टियोपोरोसिस वह वजह है, जिसके कारण बुजुर्गों में हल्की चोट लगने या कई बार तो झटका लगने पर भी हड्डियां चटक जाती है.

हड्डियों की मजबूती

इसका कारण है हड्डियों की मजबूती का कम हो जाना. इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि जब हम कोई मकान बनाने जाते हैं, तो उसमें पिलर या स्तंभ की अहम भूमिका होती है.

हमारी हड्डियां शरीर के लिए उस पिलर का काम करती है. यदि पिलर कमजोर हो तो पूरी इमारत कमजोर हो जाएगी और गिर जाएगी. उसी प्रकार हमारी हड्डियां कमजोर हो जाने पर हम हल्के झटके पर गिर जाते हैं या फिर हमारे कदम डगमगाने लगते हैं.

ऐसा इसलिए होता है कि जिस प्रकार एक पिलर छड़, बालू, सीमेंट आदि से बनी होती है, उसी प्रकार हमारी शरीर की हड्डियों में भी कई मिनरल्स से बनी होती है. इनमें से सबसे मुख्य अवयव है कैल्शियम.

इसके अलावा हमारी हड्डियों में फास्फोरस, सिल्कन और जिंक मौजूद होते हैं. हमारी हड्डियों में करीब 10 से 20 फ़ीसदी तक पानी भी मौजूद होता है. इसका मतलब हड्डियों के निर्माण में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

हमारी हड्डियां 60 से 70 फ़ीसदी तक कैल्शियम और फास्फोरस से बनी होती है. साथ ही प्रोटीन और इन ऑर्गेनिक साल्ट भी हड्डियों में पाए जाते हैं.

कैलशियम मेटाबॉलिज्म बिगड़ना

पैरा थायरॉयड और थायरॉयड के असंतुलन या उसके लेवल में गड़बड़ी से कैल्शियम का मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है, महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के कम या खत्म हो जाने के कारण भी कैल्शियम मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है.

जो ऑस्टियोपोरोसिस का प्रमुख कारण है. अधिक उम्र के साथ हड्डियों का कमजोर होना आम बात है. अधिक उम्र में हड्डियां कैल्शियम को रिटर्न करने या संभाल कर रखने में असमर्थ हो जाती है. इससे हड्डियों का क्षरण होने लगता है.

युवावस्था से ही इसका ख्याल रखा जाए

हालांकि युवावस्था से ही इसका ख्याल रखा जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक टाला या रोका जा सकता है. वहीं, दूसरे कारणों में हार्मोन असंतुलन सबसे अहम है. कैल्शियम रेगुलेटिंग, हारमोंस में पैराथायराइड हारमोंस, विटामिन डी और कैल्सीटोनिन हार्मोन की आम भूमिका होती है.

इसके अलावा एड्रिनल कॉर्टिकोस्टेरॉइड, एस्ट्रोजन, थायरोक्सिन और ग्लूकोगोन हारमोंस भी हड्डियों में कैल्शियम की मौजूदगी को प्रभावित करते हैं.

स्टेरॉइड और कुछ अन्य दवाएं बोन मिनिरल डेंसिटी को कम कर सकती है, जैसे- हार्टबर्न के लिए उपयोग की जाने वाली एंटासिड. इसमें एलुमिनियम होता है जो हड्डियों को कमजोर करता है.

कैंसर के ट्रीटमेंट मैं उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी भी ओस्टियोपोरोसिस का प्रमुख कारण है. ब्लड क्लोटिंग से बचाने के लिए दी जाने वाला दवा हेपरिन भी ऑस्टियोपोरोसिस का कारण हो सकता है. गर्भनिरोधक दवाओं के अधिक सेवन से भी हड्डियां कमजोर हो सकती है.

किसे अधिक रिस्क ?

मेनोपॉज से गुजरने वाली महिलाएं, 50 और उससे अधिक उम्र के पुरुष और यदि पूर्व में हड्डी टूटी हो तो वैसे लोगों को इसका अधिक खतरा रहता है. इसके अलावा और वैसे लोग जो धूर्मपन करते हो, अधिक शराब का सेवन करते हो, और फैमिली में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास रहा हो उनमें भी या खतरा अधिक होता है.

आप किया करे ?

सबसे पहले तो बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा ना लें. डॉक्टर से पूरा चेकअप कराने के बाद ही उनके द्वारा बताए गए डोज के हिसाब से ही दवा लें. साथ में कुछ व्यायाम जैसे- टहलना, दौड़ना और नाचना आदि आपकी हड्डियों की मजबूती के लिए अच्छा है. इसे किशोरावस्था से ही अपनी जीवनशैली में शामिल करें. धुर्मपन और शराब के सेवन को छोड़ें.

डाइट

प्रतिदिन 1000 से 1200 mgs कैल्शियम और 1000 से 2000 iu vitamin-D का सेवन करें. यह आप आहार से भी ले सकते हैं. पर आहार इसकी पूर्ति ना कर पाए तो आप डॉक्टर की सलाह से टेबलेट या अन्य स्रोत से भी इसे ले सकते हैं.

गिरने से बचे : उम्र ढलने के साथ हड्डियां और मांसपेशियां दोनों कमजोर होने लगती है. ऐसे में बुजुर्गों को खास ख्याल रखना चाहिए. सबसे पहले तो यह बात ध्यान में रखेगी बोन मिनरल डेंसिटी 1 दिन में कमजोर नहीं होती और ना ही मजबूत होती है.

पोषण युक्त आहार ले

किशोरावस्था और युवावस्था में आपकी खानपान की आदतों और खेल कूद और व्यायाम का असर उस पर पड़ता है. इसलिए किशोरावस्था से ही खुद को एक्टिव रखें और पोषण युक्त आहार ले.

क्योंकि 20 से 30 वर्ष की ही वह अवस्था होती है, जिसमें आपके शरीर में कैल्शियम डिजोजिट हो सकता है. महिलाओं को इसका खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि मेनोपॉज के समय में और उसके बाद हड्डियों का क्षरण तेजी से होने लगता है.

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण व कारण

ऑस्टियोपोरोसिस का कई बार कोई लक्षण नहीं दिखता और हल्की चोट लगने पर हड्डियों के टूटने पर एक्स-रे से इसका पता चलता है. हालांकि, बार-बार हड्डियों में दर्द होना, घुटनों जांघ या कमर में अक्सर दर्द रहना इसके प्रमुख लक्षण हैं.

कैसे पता करे की हड्डियां कमजोर हो रही है ?

आपकी हड्डियों का स्वास्थ्य कैसा है या उसके मिनरल डेंसिटी कैसी है, इसके लिए आपको बोन मिलना डेंसिटी की जांच करानी होती है, जिसे DXA टेस्ट भी कहा जाता है. यह एक तरह का एक्स-रे है.

जिसमें दर्द नहीं होता. यह आपकी हड्डियों की मजबूती को चेक करता है. इसके अलावा डॉक्टर स्पाइन फैक्चर में उपयोग की जाने वाली एक्स-रे और एम आर आई जांच भी करते हैं.

50 वर्ष की उम्र पार करने पर इन बातों का रखें ख्याल

बाथरूम में फिसलने वाली चप्पल ना पहने. चलते समय संभल कर चलें. घरों में वैसे डोर स्टेप ना रखे हैं जो मोरे हो या जिसमें पेर मुड़ सकते हो. बुजुर्गों के लिए इंडियन स्टाइल के बजाय कमोड बाथरूम बनवाए, जिससे उन्हें अधिक झुकना ना पड़े.

कमोड और बाथरूम के दीवार पर बार हैंडल लगा दे. जिससे बुजुर्ग उसके सहारे चल फिर सके और उनके फिसल कर गिरने की आशंका कम हो. फर्श पर पानी या कोई ऐसी चीज ना गिरी हो, जिससे फिसलन हो सकती है.

यदि बार-बार आपको कमर का दर्द हो, जांघ के आसपास दर्द हो, टांगों में दर्द हो या फिर अक्सर क्रैंप्स आते हो, तो आपको बोन मिनिरल डेंसिटी की जांच जरूर करानी चाहिए.

कैलशियम सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह से 60 के बाद कुछ कुछ दिनों पर लेते रहना चाहिए. दूध और दूध से बने प्रोडक्ट नियमित रूप से लें. व्यायाम खासकर ब्रिस्क वाक हर उम्र में फायदेमंद है.

दवा के डोज से भी घट सकती है बोन मिनिरल डेंसिटी

उम्र और हार्मोन असंतुलन के अलावा कुछ दवाओं के लंबे समय तक सेवन से भी बोन मिनिरल डेंसिटी में कमी आती है, जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर होने लगती है. कमजोर हड्डियों के हल्की चोट पर भी टूटने का डर रहता है.

जो ना केवल कष्ट कारक है, बल्कि बुजुर्गों के लिए आशंका या पूर्णकालिक विकलांगता का भी कारण हो सकता है.

स्टेरॉइड

glucocorticoids या स्टेरॉइड जैसे- कॉर्तिसों और Prednisone ऐसी दवाएं हैं, जो अर्थराइट्स, अस्थमा या दमा, सीओपीडी, लियुप्स, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज, सोरायसिस व अन्य त्वचा रोग में उपयोग होता है.

अधिक दिनों तक लेने से हड्डियों को कमजोर कर देता है. कई बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट के दौरान भी एस्ट्रोराइड का उपयोग रिजेक्शन के रिस्क को कम को कम करने के लिए दिया जाता है. स्टेरॉइड कई तरीके से दिया जाता है.

मसलन, गोली के रूप में खाने के लिए, इंजेक्शन के रूप में, नेजल स्प्रे या इनहेलर के रूप में और स्क्रीन पर लगाने के लिए ऑइंटमेंट के रूप में. इनमें से इंजेक्शन और गोली के रूप में लिया जाने वाला स्ट्राइड ऑस्टियोपोरोसिस का प्रमुख कारण है.

कारण

आमतौर पर शरीर हड्डियों का क्षरण और निर्माण होता रहता है. स्टेरॉयड की वजह से हड्डियों का क्षरण तो जारी रहता है, पर नहीं हड्डियों का निर्माण बंद हो जाता है.

स्टेरॉइड 3 माह तक उपयोग में लाने से ही यह बोन मिनिरल डेंसिटी को कम करने लगता है. यह शुरुआती छह माह तक बहुत तेजी से हड्डियों को कमजोर करती है, पर यह तब तक जारी रहता है जब तक कि आप स्टेरॉइड का सेवन करना बंद नहीं करते.

इसलिए जो भी डॉक्टर स्टेरॉयड की दवाई चलाते हैं, वह आपको कैल्शियम और विटामिन-डी का सेवन करने की सलाह देते हैं. ताकि हड्डियां कमजोर ना हो. इतना ही नहीं डॉक्टर इसे लंबे समय तक उपयोग करने की सलाह नहीं देते.

कई लोग दवा दुकानों से खुद से स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर लेते हैं, जो बिल्कुल गलत है. इससे आप की हड्डियां कमजोर होने लगती है और ओस्टियोपोरोसिस की वजह से आपकी हड्डियों के हल्के चोट से गंभीर अवस्था में बिना चोट के भी टूटने का डर रहता है.

महिलाओं को अधिक खतरा रखें खास ख्याल

महिला और पुरुष में ऑस्टियोपोरोसिस होने का अनुपात 2:1 है. मोटापा भी इसका कारण है. महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हड्डियों का घनत्व बनाए रखने वाले हार्मोन एस्ट्रोजन के स्तर में भी कमी आ जाती है, जिससे उनमें मेनोपॉज के बाद रोग का खतरा बढ़ाता बढ़ जाता है.

महिलाओं में 55 से 60 वर्ष की उम्र तक हड्डियों का घनत्व 30% तक कम हो जाता है. इसके अलावा धुरमपान और अल्कोहल का सेवन करने वाली महिलाओं में तो मेनोपॉज से पहले ही प्री मोनॉपज में ही ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा होता है.

ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा

महिलाओं में यह रोग ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा हार्मोनल कारणों के अलावा उनके खानपान की आदतों के कारण भी होता है. आमतौर पर घर की बुजुर्ग महिलाएं खानपान को लेकर लापरवाही होती है. उन्हें जब सबसे अधिक आवश्यकता होती है कैल्शियम और विटामिन-डी की तब वे दूध दही खाना बंद कर देती है.

50 वर्ष के बाद पुरुषों और महिलाओं को बोन मिनिरल डेंसिटी की जांच जरूर करा लेनी चाहिए. ओस्टियोपोरोसिस अगर उनकी हड्डियां कमजोर है, तो उन्हें अपने आहार में दूध-दही की मात्रा बढ़ाने के साथ अन्य कैल्शियम युक्त आहार लेना चाहिए. डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम और विटामिन-डी की भी गोली लेनी चाहिए.

एक्सरसाइज जरूर करे

घरेलू जिम्मेदारियों के कारण अक्सर महिलाएं खुद के प्रति लापरवाह हो जाती है. वही वर्किंग विमेन भी समय के अभाव में खुद की सेहत का ध्यान नहीं रखती है. यदि नियमित रूप से मात्र आधा घंटा प्रतिदिन अपनी सेहत पर खर्च किया जाए, तो ओस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं को काफी हद तक टाला जा सकता है.

एक्सरसाइज से हड्डियां हेल्थी रहती है. रेगुलर एक्सरसाइज से हड्डियों का निर्माण तेजी से होता है. अतः नियमित रूप से व्यायाम करें और खानपान का खास ख्याल रखें, जिसमें कैल्शियम और विटामिन-D युक्त आहार ले.

रोजाना कम से कम 30 से 40 मिनट सूर्य की रोशनी के सामने रहे, जिसमें आपके शरीर से कम से कम 40 से 50 फ़ीसदी हिस्से पर सीधी धूप पड़े.

Reference

Health Expertshttps://othershealth.in
Health experts: आजकल की जीवनशैली ऐसी है की लोग विभीन्न तरह की बीमारियों से पीड़ित है और दवा लेते लेते थक चुके है। Othershealth.in के माध्यम से आप अच्छे से अच्छा घरेलू उपचार और चिकित्सा कर सकते है। हम Doctors and Experts की टीम है,जिसमे चिकित्सा विशेषज्ञ के द्वारा यह जानकारी दी गयी है की हम एक अच्छी और स्वस्थ जीवन कैसे जी सकते हैं।

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