स्वास्थ

इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने में रामबाण है आयुर्वेदिक औषधियां

Covid-19 से कैसे बचें ?

आज पूरा विश्व कोविड-19 की महामारी से जूझ रहा है. इस महामारी से कब तक लड़ना होगा, अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है. फिलहाल इसके उपचार के लिए कोई विशिष्ट दवा या वैक्सीन नहीं बनी है. इसके लिए हमें रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाना होगा.

ऐसी स्थिति में चिकित्सा से अधिक इसके बचाव के उपायों पर हम सभी को ध्यान देने की जरूरत है. आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियां है, जो सहज उपलब्ध है और हमने अंदर से मजबूत बनाने में बेहद कारगर भी है. साथ ही जीवन शैली को भी इसके अनुरूप बनाए, तो हम इस महामारी का मजबूती से मुकाबला कर सकेंगे.

इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत कैसे करें ?

ayurved में एक सिद्धांत है ” अनागत बाधा प्रतिषेध ” अर्थात समस्या या व्याधि की उत्पत्ति से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए प्रयास करना. 
Covid-19 के संदर्भ मैं भी यही सिद्धांत कारगर है. जहां तक corona वायरस से संक्रमित व्यक्ति की बात है, तो उसे आयुर्वेदि या एलोपैथ के प्रोटोकॉल का विधिवत पालन करते हुए अपना उपचार कराना चाहिए.  
लेकिन जो corona संक्रमित नहीं है, वे भविष्य में भी इस बीमारी से ग्रस्त ना हो, इसके लिए उन्हें अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाना होगा.

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधियां रामबाण अमृत्तुल्य है. आयुर्वेद में बल और रोग प्रतिरोधक क्षमता को तीन प्रकार का बताया गया है- पहला सहज, दूसरा कालज, तीसरा युक्तिज. सहज व कॉलेज व्याधि क्षमता प्रकृति प्रदत है |

युक्तिज कृत बल को विविध रसायनिक औषधियों के सेवन से बढ़ाया जा सकता है. सर्वसुलभ गिलोय/गुडुची/अमृता रोग- प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी सिस्टम) बढ़ाने में सहायक है.

आयुर्वेद में गिलोय को अमृतवेल भी कहा जाता है, जो दिखने में पान की पत्ते की तरह होती है और लता के रूप में फैली होती है. गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक ओज वर्धक, ह्रदय रोग नाशक, शोधनासक और लिवर टॉनिक भी है. 

पीलिया और जीर्ण ज्वार का नाश करती है. जिस पेड़ को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं. इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है. इसे अलग-अलग आयु वर्ग में के लोगों को अलग-अलग मात्रा में दिया जाता है.

आजकल बाजार में गिलोय से बनी वटी, चूर्ण, घन, स्वरस, आसव, आरिष्ठ उपलब्ध है. इनमें से किसी का भी प्रयोग कर इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है. आंवले के प्रयोग को भी इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा माना गया है. आंवले से बने चवनप्राश का प्रतिदिन प्रयोग संक्रमण से बचाव में कारगर है. 

हल्दी का प्रयोग

इम्यूनिटी बढ़ाने में हल्दी का प्रयोग लाभकारी सिद्ध होता है- खाने पीने की चीजों में तो हम रोज ही हल्दी का प्रयोग करते हैं. क्योंकि इन दिनों काफी गर्मी है, ऐसे में दूध के साथ इसका प्रयोग अधिक लाभकारी होगा.

हल्दी मिला दूध इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत उपयोगी है. चाय तो हम रोज ही पीते हैं, लेकिन वर्तमान परिपेक्ष्य में दालचीनी, कालीमिर्च, तुलसी, अदरक, गुड़ आदि औषध द्रव्यों की चाय सुबह शाम पीना काफी लाभकारी होगा.
इससे हम रोग से बचे रहेंगे और हमारा स्वास्थ्य उत्तम बना रहेगा. इतना ही नहीं अश्वगंधा, मधुईस्ट, पिपली, हरितकी, लवंग, मुनक्का, अजवाइन, शरीर को रोगों से बचाने में काफी सहायक है. प्रतिदिन लहसुन, अदरक आदि का प्रयोग हमें निरोगी बनाते हैं.

आहार-विहार के नियम 

आयुर्वेद में स्वास्थ्य रक्षा तथा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आहार-विहार यानी खान-पान और जीवनशैली के कुछ नियम बताए गए हैं-जैसे – ताजा बने भोजन का ही सेवन करें.

भोजन में दूध व घी को शामिल करें और रात्रि का भोजन शाम 8:00 बजे से पहले कर ले. रात्रि में समय पर सोए. 8 घंटे की नींद जरूर लें. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें. नित्य व्यायाम करें.

बदलते मौसम में ऐसे रखे स्वास्थ्य का ध्यान 

हम सभी जानते हैं कि मौसम का बदलाव कई रोग साथ लेकर आता है. आयुर्वेद में मौसम के बदलाव के कारण होने वाले रोगों तथा उनसे बचाव के उपाय बताए गए हैं. 

वर्तमान समय मौसम में बदलाव का है. थोड़े ही दिनों में वर्षा ऋतु का आरंभ होगा. ऐसे में हमें इस मौसम में होने वाले रोगों, जैसे- खांसी-जुकाम, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया से बचाव के लिए अपने आहार विहार में बहुत सावधानी बरतनी होगी|

कुछ एहतियात इतिहास इस प्रकार हैं – पीने के लिए हमेशा उष्ण जल यानी गर्म पानी का ही प्रयोग करें. हल्का, पौष्टिक तथा सुपाच्य आहार लें. तले-भुने, मसालेदार व खट्टे भोजन से परहेज करें.

खाने में शहद का प्रयोग करें. दिन में सोने से परहेज करें. प्रतिदिन नीम, अजवाइन, कपूर द्वारा घर में हवन करें. इससे जीवाणुओं का नाश होता है और वातावरण शुद्ध हो जाता है. 

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए होम्योपैथी दवा 

Covid-19 से बचाव के मद्देनजर आयुष मंत्रालय ने पिछले दिनों एक होमियोपैथी दवा Arsenicum album 30 के प्रयोग का सुझाव दिया है. 
निर्देशानुसार, व्यस्क व्यक्ति को इसकी चार गोली तथा बच्चों को दो गोली 3 दिनों तक लगातार सुबह खाली पेट लेनी है. पुनः इसी डोज को दूसरे व तीसरे माह में भी प्रयोग करना है. 

लोगों को यहां जानने की जरूरत है कि अभी तक करो ना का कोई इलाज नहीं है. इस होम्योपैथी दवाई को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लिया जा सकता है.
अगर आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा, तो आपको जल्द रोग लगने की संभावना कम होगी और रोग लगने पर भी शरीर में उससे लड़ने की क्षमता अधिक होगी. 

मानसून ने दस्तक दे दी है

आने वाला समय बारिश का होगा, ऐसे में फ्लू की संभावना भी हो सकती है. अतः एहतियात के तौर पर एक अन्य दवा influenzinum 200 दी जा सकती है. 

बड़ों को सप्ताह में एक बार खाली पेट 4 गोली और बच्चों को दो गोली लेनी चाहिए. यह दोनों दवाई गोली तथा लिक्विड रूप में आती है. दोनों में से कोई भी फॉर्म लिया जा सकता है.  

इम्यूनिटी सिस्टम

इस बात का भी ध्यान रहे कि होम्योपैथी चिकित्सा पूरी तरह से बीमारी के लक्षणों पर काम करती है. होम्योपैथी दवाई हमेशा उचित मात्रा में लेना प्रभावी है, अत्याधिक मात्रा में लेना हानिकारक सिद्ध हो सकता है. 

संक्रमण से बचाता है अणु तेल का नस्या प्रयोग 

स्वास्थ्य की देखभाल तथा इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अणु तेल का नशय प्रयोग करना चाहिए. नशय प्रयोग के अंतर्गत अणु तेल को नाक में डाला जाता है.  
अणु तेल की एक एक बूंद नाक में डालें. इसके अतिरिक्त आयुर्वेद में वर्णित एक विशेष गंदुष किर्या भी हमारे शरीर को संक्रमण से बचाती है.

गंडूष की क्रिया में मुंह से तिल या नारियल का तेल लेकर उसे कुछ देर तक रखना होता है और कुछ देर बाद उसे बाहर निकाल देना होता है.

गंडुश क्रिया में 5ml या एक चम्मच तेल मुंह में लेना है. इसके पश्चात गर्म पानी से कुल्ला कर मुख शुद्धि की जाती है. दोनों नासिका रंध्रों में अणु तेल का प्रयोग तथा गंडुष क्रिया शरीर की रक्षा में उपयोगी सिद्ध होते हैं और हमें संक्रमण से बचाते हैं. 

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